इस खिलाड़ी की बदले बनती वैभव सूर्यवंशी की जगह, लेकिन गंभीर का चहेता होने के चलते नहीं किया जाता बाहर
Published - 18 Oct 2026, 11:18 PM | Updated - 18 Oct 2026, 11:24 PM
भारतीय टी20 टीम में युवा चेहरों की भरमार है, लेकिन प्लेइंग-11 को लेकर छिड़ी बहस थमने का नाम नहीं ले रही। घरेलू क्रिकेट और जूनियर लेवल पर अपने बल्ले से कोहराम मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) लगातार डगआउट में बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। गलियारों में चर्चा है कि मध्यक्रम में बार-बार लड़खड़ा रहे एक खिलाड़ी की जगह वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को आजमाया जाना चाहिए था। मगर हेड कोच गौतम गंभीर का तिलक पर अटूट भरोसा ऐसा है कि इन-फॉर्म बैठे युवाओं के लिए दरवाजे खुल ही नहीं रहे।
तिलक वर्मा के हाथ से फिसलते मौके

तिलक वर्मा को टीम इंडिया के टी20 सेटअप में मौके तो भरपूर मिले हैं, लेकिन जब भी मैच को फिनिश लाइन के पार ले जाने की बात आई, उनका बल्ला ऐन वक्त पर धोखा दे गया। विंडीज के खिलाफ चौथे मुकाबले की ही बात लें 25 गेंदों पर 43 रन बनाकर वे उस नाजुक मोड़ पर विकेट फेंककर चले गए, जहां से टीम को जीत की दरकार थी।
बीच के ओवरों में स्पिन के सामने डॉट गेंदें खेलना और जरूरी रन रेट को ऊपर चढ़ने देना उनकी पुरानी कमजोरी बनकर सामने आ रहा है। इसके बावजूद उनका नाम हर मैच की टीम शीट में सबसे पहले नजर आना फैंस की समझ से परे है।
Vaibhav Sooryavanshi की बेखौफ बल्लेबाजी
दूसरी तरफ वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) का बल्ला जिस आग को उगल रहा है, उसकी अनदेखी करना अब आसान नहीं रहा। अंडर-19 के दिनों से लेकर घरेलू सर्किट तक, ताबड़तोड़ शतक ठोकने वाले वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) की सबसे बड़ी खूबी उनका निडर मिजाज है।
वे क्रीज पर सेट होने के लिए दस गेंदें जाया नहीं करते, बल्कि पहली ही बॉल से विरोधी गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिखेरने का माद्दा रखते हैं। मैदान के चारों तरफ खुलकर खेलने वाला ऐसा आक्रामक बल्लेबाज जब अपने करियर के सबसे बेहतरीन टच में हो, तब वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को सिर्फ पानी पिलाने के लिए टीम के साथ रखना समझ से परे लगता है।
टीम सिलेक्शन पर सवाल
गौतम गंभीर अपने फैसलों पर अड़े रहने के लिए जाने जाते हैं, और तिलक वर्मा का मामला इसका ताजा उदाहरण है। तिलक के पक्ष में सबसे बड़ी दलील यह जाती है कि वे बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और जरूरत पड़ने पर दो-तीन ओवर ऑफ-स्पिन भी फेंक लेते हैं। इसी कामचलाऊ ऑलराउंड हुनर ने उन्हें गंभीर के खाके में एक ढाल दे रखी है।
लेकिन क्रिकेट के जानकार सीधा सवाल पूछ रहे हैं, अगर बात विशुद्ध बैटिंग फॉर्म, इंपैक्ट और मौजूदा लय की हो, तो क्या तिलक की जगह वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को अंतिम एकादश में मौका नहीं मिलना चाहिए था? गंभीर का यह एकतरफा फैसला अब टीम में निष्पक्ष चयन की नीति पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
ऑथर के बारे में
यह लेखक Cricketaddictor का एक सदस्य है जो क्रिकेट से जुड़ी खबरों और विश्लेषण पर लिखता है।