दुनिया का इकलौता क्रिकेटर जिसने चढ़ा Mount Everest, मौत को मात देकर बना था हीरो
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माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 8,848 मीटर है। हर साल हजारों पर्वतारोही इसे फतह करने का सपना देखते हैं, लेकिन बेहद कठिन परिस्थितियों और जानलेवा चुनौतियों के कारण बहुत कम लोग ही इसमें सफल हो पाते हैं।
क्रिकेट की दुनिया में भी कई खिलाड़ियों ने मैदान पर बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन एक ऐसा क्रिकेटर भी हुआ जिसने मैदान से बाहर जाकर इतिहास रच दिया। न्यूजीलैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एडम परोरे दुनिया के इकलौते क्रिकेटर हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) की चोटी पर पहुंचकर यह अनोखी उपलब्धि हासिल की हैं।
क्रिकेट से संन्यास के बाद चुनी नई चुनौती

एडम परोरे ने साल 2002 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। क्रिकेट करियर खत्म होने के बाद उन्होंने खुद को एक नई और बेहद कठिन चुनौती देने का फैसला किया। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) पर चढ़ने का लक्ष्य बनाया।
इस मिशन को सफल बनाने के लिए उन्होंने लंबे समय तक तैयारी की और आखिरकार साल 2011 में एवरेस्ट अभियान पर निकल पड़े। उनका यह फैसला खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया क्योंकि इससे पहले किसी क्रिकेटर ने ऐसा कारनामा नहीं किया था।
नेपाल पहुंचकर की महीनों तैयारी
एवरेस्ट (Mount Everest) की चढ़ाई केवल शारीरिक ताकत का ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती का भी इम्तिहान होती है। एडम परोरे ने अपनी चढ़ाई शुरू करने से लगभग दो महीने पहले, 27 मार्च 2011 को नेपाल पहुंचकर तैयारी शुरू कर दी थी।
वहां उन्होंने हिमालय एक्सपीरियंस कंपनी के साथ प्रशिक्षण लिया और खुद को ऊंचाई वाले मौसम और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुसार ढालने का प्रयास किया।
पर्वतारोहण विशेषज्ञों की निगरानी में उन्होंने कई सप्ताह तक अभ्यास किया ताकि वास्तविक चढ़ाई के दौरान किसी भी मुश्किल का सामना कर सकें।
जब ऑक्सीजन खत्म हुई तो सामने आ गई मौत
एवरेस्ट (Mount Everest) अभियान के दौरान एडम परोरे को एक ऐसे पल का सामना करना पड़ा जिसने उनकी जान खतरे में डाल दी। चढ़ाई के दौरान उनकी ऑक्सीजन सप्लाई लगभग खत्म हो गई थी। इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
परोरे ने बाद में बताया कि उस कठिन समय में उनके साथ मौजूद शेरपा ने उनकी मदद की और उन्हें सुरक्षित रखा। उनके अनुसार यदि शेरपा के साथ नहीं होता तो शायद वह जिंदा वापस नहीं लौट पाते। यही वजह है कि उन्होंने अपने शेरपा को अपने जीवन का रक्षक बताया।
Mount Everest फतह करने के बाद कैसा रहा अनुभव?
कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद एडम परोरे आखिरकार मई 2011 में माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि शिखर पर पहुंचने के बाद वहां ज्यादा देर तक खड़े रहना भी आसान नहीं था।
उन्होंने लगभग 20 मिनट वहां बिताए, तस्वीरें खिंचवाईं और फिर नीचे उतरना शुरू किया। वापसी के दौरान उनकी तबीयत काफी खराब हो गई और कुछ समय के लिए उनकी आवाज भी चली गई।
हालांकि बाद में उनकी स्थिति सामान्य हो गई। एडम परोरे का यह कारनामा आज भी क्रिकेट इतिहास में एक अनोखी उपलब्धि माना जाता है। मैदान पर शानदार प्रदर्शन करने वाले इस खिलाड़ी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी फतह कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और साहस से किसी भी चुनौती को जीता जा सकता है।
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