कभी कोयले की खदान में काम करना चाहता था टीम इंडिया का ये क्रिकेटर, फिर अचानक बना सुपरस्टार

Published - 17 Sep 2026, 02:38 PM | Updated - 17 Sep 2026, 03:08 PM

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भारतीय टीम (Team India) में जगह बना पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता है। तमाम कठिनाइयों और रुकावटों को पार करने के बाद ही खिलाड़ी टीम में अपनी जगह हासिल करने में कामयाब हो पाते हैं। कई प्लेयर्स आर्थिक तंगी को मात देकर अपने सपने को सकार करते हैं, तो कोई सीमित संसाधनों के बीच ही अपनी प्रतिभा की बदौलत पहचान बनातें हैं।

लेकिन टीम इंडिया (Team India) में एक ऐसा भी गेंदबाज रहा है, जिसका सपना कभी कोयले की खदान में काम करना था। लेकिन उसकी किस्मत ने ऐसी करवट ली कि उसका नाम टीम इंडिया के महानतम गेंदबाजों की सूची में शामिल हो गया।

कोयले की खदान में काम करना चाहता था Team India का ये खिलाड़ी

Umesh Yadav

हम जिस खिलाड़ी की बात कर रहे हैं, वो और कोई नहीं बल्कि टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज उमेश यादव हैं। उनका जन्म एक बेहद ही साधरण परिवार में हुआ था। उनके पिता उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले थे, लेकिन परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें नागपुर (महाराष्ट्र) के पास वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) में कोयला खदान मजदूर के रूप में काम करना पड़ा। ऐसे में उममेश यादव का बचपन खदान के पास ही एक कॉलनी में गुजरा।

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पुलिस में भर्ती होने का भी था सपना

घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से उमेश यादव ने कोयला खदान में ही क्लास-IV (चतुर्थ श्रेणी) की नौकरी के लिए आवेदन भी किया, जिससे वह परिवार की मदद कर सके। लेकिन उन्हें यह जॉब नहीं मिल सकी। इसके अलावा उमेश यादव ने पोलिस फोर्स में कॉन्स्टेबल बनने की भी कोशिश की, जिसमें वह नाकाम रहें। लिखित और फिजिकल टेस्ट में कुछ अंकों से चूक जाने की वजह से उनका यह सपना भी अधूरा रह गया।

टेनिस गेंद से की थी क्रिकेट खेलने की शुरुआत

उमेश यादव ने क्रिकेट खेलने की शुरुआत टेनिस गेंद से की थी। 19-20 की उम्र तक उन्होंने लेदर की गेंद से कभी नहीं खेला। हालांकि, एक बार दोस्तों के कहने पर वह लेदर बॉल के एक लोकल क्लब मैच में पहुंच गए, जहां उनकी तेज गेंदबाजी ने विदर्भ के पूर्व क्रिकेटर प्रीतम गंधे का ध्यान खींचा। उनकी मदद से उमेश यादव ने विदर्भ की रणजी टीम में जगह बनाई और इस घरेलू टूर्नामेंट में 140+ किमी/घंटा की रफ्तार से सभी को प्रभावित किया।

फिर जल्द ही उन्हें आईपीएल (IPL) में दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) से बुलावा आया और 2010 में उन्होंने टीम इंडिया (Team India) के लिए डेब्यू किया। लेकिन अब अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, प्रिंस यादव जैसे युवा खिलाड़ियों के उभरने के बाद उनके लिए राष्ट्रीय टीम की दरवाजे लगभग बंद हो गए हैं।

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