IND vs ZIM सीरीज के बीच पसरा मातम, दिग्गज का हुआ आकस्मिक निधन, ब्लैक बैंड के साथ खेले खिलाड़ी
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IND vs ZIM T20I Series: भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज हरारे में खेली जा रही है। इस सीरीज के दो मैच हो चुके हैं और दोनों में जीत दर्ज करते हुए भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। दूसरा मुकाबला शनिवार (25 जुलाई) को खेला गया, जिसमें भारतीय टीम 90 रनों के बड़े अंतर से विजयी रही। इसी के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में टीम ने पहली सीरीज जीतने में कामयाबी पाई।
दूसरे मैच के दौरान भारत और जिम्बाब्वे दोनों ही टीमों के खिलाड़ी बांह पर काली पट्टी बांधकर मैदान में उतरे, जिसने फैंस का ध्यान खींचा। अब इसकी वजह सामने आ गई है और पता चल गया है कि दोनों ही टीमों के खिलाड़ियों ने ऐसा क्यों किया।
IND vs ZIM दूसरे टी20 में खिलाड़ियों ने क्यों बांधी काली पट्टी
दरअसल, जिम्बाब्वे क्रिकेट के उपाध्यक्ष सिल्वेस्टर मत्शाका का शुक्रवार की रात निधन हो गया। सिल्वेस्टर एक सम्मानित व्यक्ति थे। इसी वजह से भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए दूसरे टी20 में खिलाड़ियों ने काली पट्टी बांधकर उन्हें सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी।
सिल्वेस्टर मत्शाका को IND vs ZIM दूसरे टी20 के दौरान दी गई श्रद्धांजलि

हरारे स्पोर्ट्स क्लब में भारत और जिम्बाब्वे (IND vs ZIM) के बीच खेले गए दूसरे T20I मैच के दौरान, दोनों टीमों के खिलाड़ी काली पट्टी (ब्लैक आर्मबैंड) पहनकर मैदान पर उतरे। यह सम्मान जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड के उपाध्यक्ष सिल्वेस्टर मात्शाका की याद में दिया गया, जिनका शुक्रवार, 24 जुलाई को हरारे के वेस्ट एंड क्लिनिक में 76 साल की उम्र में निधन हो गया था।
बीसीसीआई ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर लिखा,
"भारत और जिम्बाब्वे के खिलाड़ी जिम्बाब्वे क्रिकेट के वाइस-चेयरमैन सिल्वेस्टर मात्शाका को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी बांध रहे हैं, जिनका कल रात निधन हो गया।"
#TeamIndia and Zimbabwe players are wearing black armbands to pay their respects to the Zimbabwe Cricket Vice-chairman Sylvester Matshaka, who passed away last night. pic.twitter.com/pAknRA6KAR
— BCCI (@BCCI) July 25, 2026
जिम्बाब्वे क्रिकेट की प्रगति में मत्शाका की रही अहम भूमिका
यह संयुक्त श्रद्धांजलि दिखाती है कि क्रिकेट जगत में मात्शाका का कितना सम्मान था। 2006 में जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड से जुड़ने और 2015 तक वाइस चेयरमैन के तौर पर काम करने के बाद, उन्होंने लगभग दो दशक तक एडमिनिस्ट्रेटिव लीडरशिप में योगदान दिया। जिम्बाब्वे क्रिकेट के लिए एक अहम दौर में, उन्होंने देश में इस खेल को आगे बढ़ाने और विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।
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