कभी सोचा IPL में Orange और Purple Cap ही क्यों होती है? जानें इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
Published - 13 May 2026, 10:35 PM | Updated - 13 May 2026, 10:46 PM
आईपीएल (IPL) की चमक सिर्फ चौकों-छक्कों या रोमांचक मुकाबलों तक सीमित नहीं है। इस टूर्नामेंट की कई ऐसी परंपराएं हैं, जिन्होंने इसे दुनिया की सबसे अलग क्रिकेट लीग बना दिया है। उन्हीं में से एक है ऑरेंज कैप और पर्पल कैप।
हर सीजन में फैंस की नजर सिर्फ टीमों की ट्रॉफी रेस पर नहीं रहती, बल्कि इस बात पर भी रहती है कि आखिर सबसे ज्यादा रन और विकेट किस खिलाड़ी के नाम होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन कैप्स के लिए ऑरेंज और पर्पल रंग ही क्यों चुने गए? इसके पीछे सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि एक खास सोच और ब्रांडिंग रणनीति जुड़ी हुई है।
IPL में कैप की शुरुआत कैसे हुई?

साल 2008 में जब IPL का पहला सीजन खेला गया, तब आयोजकों का मकसद सिर्फ एक टी20 लीग बनाना नहीं था। वे चाहते थे कि टूर्नामेंट में खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को भी उतनी ही पहचान मिले, जितनी टीम की जीत को मिलती है।
इसी सोच से ऑरेंज कैप की शुरुआत हुई। 25 अप्रैल 2008 को पहली बार यह कैप मैदान पर दिखाई दी। उस वक्त न्यूजीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज ब्रेंडन ब्रेंडन मैकुलम (Brendon McCullum) ने पहले ही मैच में 158 रन ठोककर पूरे टूर्नामेंट को नई पहचान दे दी थी और वही पहले खिलाड़ी बने जिन्होंने ऑरेंज कैप पहनी।
इसके कुछ समय बाद गेंदबाजों के लिए पर्पल कैप की शुरुआत की गई। IPL में बल्लेबाज अक्सर सुर्खियां बटोरते थे, इसलिए गेंदबाजों को भी बराबरी का सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया गया। इससे टूर्नामेंट में रन और विकेट दोनों की रेस और ज्यादा दिलचस्प हो गई।
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ऑरेंज और पर्पल रंग ही क्यों चुने गए?
यह फैसला बिल्कुल यूं ही नहीं लिया गया था। IPL की ब्रांडिंग टीम ने ऐसे रंग चुने जो टीवी स्क्रीन पर तुरंत ध्यान खींचें और खिलाड़ियों की उपलब्धि को अलग पहचान दें। उस वक्त किसी भी टीम की जर्सी ऑरेंज और निली रंग की नहीं थी साथ ही ऑरेंज रंग को ऊर्जा, जुनून और आक्रामकता का प्रतीक माना जाता है।
बल्लेबाज मैदान पर उसी ऊर्जा के साथ उतरता है और बड़े रन बनाकर मैच का रुख बदल देता है। यही वजह है कि सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के लिए ऑरेंज कैप चुनी गई।
वहीं पर्पल रंग को हमेशा से शाही अंदाज, संतुलन और विशेष सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। क्रिकेट में विकेट लेना सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि दिमाग और चतुरता का खेल माना जाता है। गेंदबाज अपनी लाइन-लेंथ, गति और दिमाग से बल्लेबाज को मात देता है।
शायद यही कारण है कि विकेट लेने वाले गेंदबाजों के लिए पर्पल रंग को चुना गया। एक और दिलचस्प बात यह है कि दोनों रंग मैदान और टीवी प्रसारण में काफी अलग और आकर्षक दिखते हैं, जिससे दर्शकों को तुरंत पता चल जाता है कि कौन खिलाड़ी टूर्नामेंट में सबसे आगे चल रहा है।
समय के साथ बढ़ती गई इन कैप्स की अहमियत
आज IPL में ऑरेंज और पर्पल कैप सिर्फ एक रंगीन टोपी नहीं रह गई हैं। यह पूरे सीजन में खिलाड़ी की निरंतरता, मेहनत और दबदबे का प्रतीक बन चुकी हैं। मैच दर मैच कैप का बदलना फैंस के लिए भी एक अलग रोमांच पैदा करता है।
जो बल्लेबाज सबसे ज्यादा रन बनाता है, वह फील्डिंग के दौरान ऑरेंज कैप पहनता है, जबकि सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज पर्पल कैप के साथ मैदान पर उतरता है।
पहले सीजन में शॉन मार्श (Shaun Marsh) ऑरेंज कैप जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने थे, जबकि सोहेल तनवीर (Sohail Tanvir) ने पहली पर्पल कैप अपने नाम की थी। इसके बाद विराट कोहली (Virat Kohli), क्रिस गेल (Chris Gayle) और डेविड वार्नर (David Warner) जैसे दिग्गज बल्लेबाजों ने कई बार ऑरेंज कैप जीतकर इतिहास रचा।
अब हाल यह है कि कई बार फैंस मैच से ज्यादा कैप की रेस पर नजर रखते हैं। एक अच्छी पारी या एक शानदार स्पेल पूरे समीकरण बदल देता है। यही वजह है कि IPL की ये दोनों कैप्स टूर्नामेंट की पहचान बन चुकी हैं और हर खिलाड़ी अपने करियर में कम से कम एक बार इन्हें पहनने का सपना जरूर देखता है।
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सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर