IPL में सालों तक मचाया धमाल, लेकिन BCCI ने कभी नहीं दिया टीम इंडिया में मौका
Published - 11 Aug 2026, 09:24 PM
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Team India: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने भारतीय क्रिकेट को कई ऐसे खिलाड़ी दिए, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने के बाद टीम इंडिया (Team India) तक का सफर तय किया। हालांकि कुछ क्रिकेटर ऐसे भी रहे, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट के साथ IPL में भी सालों तक अपनी उपयोगिता साबित की, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कभी भारतीय सीनियर टीम की जर्सी पहनने का मौका नहीं मिला।
ऐसा ही एक भारतीय ऑलराउंडर IPL के शुरुआती सीजन से लगातार अपनी गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी के दम पर पहचान बनाने में सफल रहा। खासकर अपनी धीमी मीडियम पेस गेंदबाजी से इस खिलाड़ी ने बड़े-बड़े बल्लेबाजों को परेशान किया, लेकिन शानदार घरेलू रिकॉर्ड के बावजूद टीम इंडिया के दरवाजे उसके लिए कभी नहीं खुले।
रजत भाटिया ने IPL में छोड़ी अपनी खास छाप
यह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि दिल्ली में जन्मे ऑलराउंडर रजत भाटिया (Rajat Bhatia) है। भाटिया IPL के पहले सीजन यानी 2008 से ही इस लीग का हिस्सा रहे और 2017 तक खेले। अपने IPL करियर में उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स, कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR), राजस्थान रॉयल्स और राइजिंग पुणे सुपरजायंट जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने IPL में 342 रन बनाने के साथ 71 विकेट भी हासिल किए। उनकी धीमी गेंदों और गति में बदलाव को पढ़ना बल्लेबाजों के लिए आसान नहीं होता था।
KKR को चैंपियन बनाने में निभाई अहम भूमिका
रजत भाटिया (Rajat Bhatia) के IPL करियर का सबसे यादगार दौर कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ रहा। गौतम गंभीर की कप्तानी वाली KKR ने 2012 में पहली बार IPL का खिताब अपने नाम किया था और उस अभियान में भाटिया ने गेंद से महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने उस सीजन में 13 विकेट हासिल किए थे। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने 2014 की नीलामी में उन्हें 1.7 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा। उन्होंने उस सीजन 12 मुकाबलों में 12 विकेट लेकर फ्रेंचाइजी के भरोसे को सही साबित किया।
घरेलू क्रिकेट में भी शानदार रिकॉर्ड, फिर भी नहीं मिला भारत से मौका
सिर्फ IPL ही नहीं, घरेलू क्रिकेट में भी रजत भाटिया का रिकॉर्ड शानदार रहा। उन्होंने अपने लंबे फर्स्ट क्लास करियर में 6,000 से ज्यादा रन बनाए और 100 से अधिक विकेट हासिल किए। दिल्ली की 2007-08 रणजी ट्रॉफी जीत में भी उनकी अहम भूमिका रही थी और उन्होंने उस अभियान में 512 रन बनाए थे। इसके बावजूद वह कभी सीनियर भारतीय टीम के लिए नहीं खेल सका।
करीब दो दशक लंबे प्रोफेशनल करियर के बाद उन्होंने 2020 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया। उनका करियर उन खिलाड़ियों की याद दिलाता है, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट और IPL में लगातार प्रदर्शन किया, लेकिन टीम इंडिया की कैप उनसे दूर ही रही।
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ऑथर के बारे में
यह लेखक Cricketaddictor का एक सदस्य है जो क्रिकेट से जुड़ी खबरों और विश्लेषण पर लिखता है।