IPL में CSK की पुरानी बीमारी, 14वीं बार भी नहीं मिला इलाज! चेन्नई के लिए ये रिकॉर्ड बना ‘अभेद्य किला’

Published - 19 Apr 2026, 12:48 PM | Updated - 19 Apr 2026, 12:57 PM

CSK

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो उनके प्रशंसकों को परेशान कर सकता है। हाल ही में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के खिलाफ मिली हार ने CSK की उस पुरानी कमजोरी को उजागर कर दिया है

जिससे वे साल 2019 से जूझ रहे हैं। 180 से अधिक रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई की टीम एक बार फिर लड़खड़ा गई, जो उनके लिए अब एक 'अभेद्य किला' बन चुका है।

180+ रनों का पीछा करना बना टेढ़ी खीर

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CSK की टीम अपनी सधी हुई बल्लेबाजी और मैच को अंत तक ले जाने के लिए जानी जाती है, लेकिन जब बात 180 या उससे अधिक रनों के लक्ष्य की आती है, तो टीम का गणित बिगड़ जाता है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2019 के बाद से चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल में 14 बार 180 से अधिक रनों के लक्ष्य का पीछा करने की कोशिश की है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वे हर बार असफल रहे हैं।

हैदराबाद के खिलाफ मैच में भी यही देखने को मिला, जहां टीम लक्ष्य के करीब तो पहुंची लेकिन उसे पार नहीं कर सकी। सीएसके इस मैच को लगभग अपने पाले में कर चुकी थी लेकिन जीत कर भी मैच हार गई। इस हार की मुख्य वजह आयुष म्हात्रे का हेमस्ट्रींग में खिंचाव होने के बाद आउट होना भी रहा था, जहां से मैच में यू-टर्न आ गया था।

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2019 से जारी है CSK की हार का सिलसिला

चेन्नई सुपर किंग्स के लिए यह समस्या किसी पुरानी बीमारी की तरह हो गई है। धोनी की कप्तानी से लेकर अब तक के सफर में, CSK ने कई बड़े मैच जीते हैं, लेकिन बड़े स्कोर का पीछा करना उनके लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है।

2019 के बाद से जब भी विपक्षी टीम ने बोर्ड पर 180 से ज्यादा रन टांगे हैं, चेन्नई का मध्यक्रम दबाव में बिखर जाता है। तकनीकी रूप से देखा जाए तो पावरप्ले में धीमी शुरुआत और बीच के ओवरों में बाउंड्री की कमी टीम को लक्ष्य से दूर ले जाती है।

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क्या है इस कमजोरी की मुख्य वजह?

CSK की रणनीति अक्सर मैच को गहराई तक ले जाने की होती है। कम स्कोर वाले मैचों में यह रणनीति कारगर साबित होती है, लेकिन 180+ के लक्ष्य में प्रति ओवर औसत शुरू से ही ऊंचा रहता है।

ऐसे में अंत के ओवरों के लिए रन बचाकर रखना जोखिम भरा हो जाता है। इसके अलावा, चेपॉक जैसे धीमे मैदानों पर खेलने की आदत के कारण टीम को सपाट पिचों पर बड़े स्कोर का पीछा करने में कठिनाई आती है। अगर चेन्नई को आगामी मैचों में जीत की राह पर लौटना है, तो उन्हें अपनी इस बल्लेबाजी अप्रोच में बदलाव करना होगा।

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Sourabh Kumar

सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर

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