फर्स्ट क्लास में 10 हजार से ज्यादा रन बनाने के बावजूद टीम इंडिया में नहीं मिला लंबा मौका, महज 2 हफ्ते में खत्म हो गया टेस्ट करियर
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भारत में क्रिकेट खेलने वाले हर क्रिकेटर का सपना टीम इंडिया (Team India) के लिए खेलना होता है। इनमें से कुछ को ही सफलता मिलती है, जबकि बाकी को संघर्ष ही करना पड़ता है। अब खिलाड़ियों के पास अपनी पहचान बनाने के लिए कई प्लेटफार्म हैं और उनके माध्यम से आईपीएल में एंट्री होती, जो नेशनल टीम में जगह बनाने का एक शॉर्टकट भी माना जाता है।
हालांकि, जब आईपीएल की शुरुआत हुई थी, तब भारतीय टीम में जगह बनाने का एकमात्र जरिया घरेलू क्रिकेट था। खासतौर पर अगर किसी खिलाड़ी को टेस्ट में टीम इंडिया (Team India) का प्रतिनिधित्व करना होता था, तो उसे फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रनों का अंबार लगाना पड़ता था। लेकिन कई खिलाड़ी काफी अनलकी रहे, जिन्होंने डोमेस्टिक में ढेर सारे रन बनाए लेकिन उनका करियर भारत के लिए टेस्ट में बहुत सीमित रहा। ऐसे ही एक खिलाड़ी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।
घरेलू क्रिकेट के सितारे का सिर्फ दो सप्ताह में टीम इंडिया के लिए खत्म हुआ करियर
यहां हम जिस खिलाड़ी की बात करने जा रहे हैं, जो भारत के अलावा किसी अन्य देश में होता तो वहां के दिग्गज क्रिकेटर्स की लिस्ट में शुमार होने का दमखम रखता था, लेकिन टीम इंडिया (Team India) के लिए टेस्ट में उसे सिर्फ दो मैच खेलने का मौका मिला और इसके बाद उसकी छुट्टी हो गई।
अब चलिए आपको उस खिलाड़ी का नाम बता देते हैं। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि सुब्रमण्यम बद्रीनाथ है। बद्रीनाथ को घरेलू क्रिकेट में रन मशीन कहा जाता था लेकिन भारत के लिए टेस्ट फॉर्मेट में उन्हें बेहद कम मौके मिले।
बद्रीनाथ के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 हजार से ज्यादा रन, फिर भी नहीं मिला लंबा मौका

दाएं हाथ के बल्लेबाज सुब्रमण्यम बद्रीनाथ घरेलू क्रिकेट में तमिलनाडु की तरफ से खेलते थे। उन्होंने 2000/01 के सीजन में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था और आखिरी बार 2016 में नजर आए। इस दौरान बद्रीनाथ ने 145 रेड-बॉल मैच खेले, जिनकी 216 पारियों में 54.49 की बेहतरीन औसत से 10,245 रन बनाए। बद्रीनाथ के नाम 32 शतक और 45 अर्धशतक भी दर्ज हैं।
2010 में मिला Team India के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका
सुब्रमण्यम बद्रीनाथ को 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम चुना गया था, क्योंकि उस समय राहुल द्रविड़ चोटिल थे। बद्रीनाथ को नागपुर में डेब्यू का मौका मिला और उन्होंने अपनी पहली ही पारी में अर्धशतक बनाकर सभी को प्रभावित किया। हालांकि, दूसरी पारी में वह सिर्फ 6 रन ही बना सके। इसके बाद कोलकाता में खेले गए दूसरे टेस्ट में भारत ने सिर्फ एक ही बार बल्लेबाजी की और बद्रीनाथ 1 रन ही बना पाए।
इन्हीं दो मैचों में सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने टीम इंडिया (Team India) का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद राहुल द्रविड़ की वापसी हो गई और तमिलनाडु के इस बल्लेबाज को टीम से बाहर कर दिया गया। 2012 में उन्हें दोबारा चुना गया, लेकिन प्लेइंग XI में जगह नहीं दी गई। इस तरह बद्रीनाथ का दो मैचों में 21 की औसत से 63 रन के साथ टेस्ट करियर समाप्त हुआ।
टीम इंडिया के लिए बद्रीनाथ का टेस्ट करियर जल्दी खत्म होने की वजह
अब भारतीय टीम (Team India) काफी बदल गई है और मध्यक्रम में आसानी से जगह मिल जा रही है, लेकिन एक समय था जब राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के कारण युवाओं को जल्दी मौका नहीं मिलता था। जब इनमें से कोई चोटिल होता था, तभी दूसरे खिलाड़ियों के लिए दरवाजे खुलते थे। यही कारण रहा कि बद्रीनाथ का टेस्ट करियर भी बेहद सीमित रहा।
बद्रीनाथ भी मध्यक्रम के बल्लेबाज थे और इन दिग्गजों की मौजूदगी के कारण नियमित रूप से टीम इंडिया (Team India) में जगह बनाने में नाकाम रहे। इनके जाने के बाद चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे जैसे खिलाड़ियों को मौका मिला।
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