क्रिकेट इतिहास का सबसे अजीब टेस्ट, एक ही मैच में 4 विकेटकीपर ने की कीपिंग... चारों नहीं लपक पाए एक भी कैच
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4 wicketkeepers used by one team in a Test match: टेस्ट क्रिकेट को काफी मुश्किल फॉर्मेट माना जाता है। इसमें बल्लेबाजों के चोटिल होने की संभावना भी अधिक रहती है, क्योंकि गेंदबाजों को शॉर्ट बॉल डालने की आजादी होती है। बाउंसर और छोटी गेंदों के सामने बल्लेबाज काफी मुश्किल में आ जाता है और गेंद लगने से कई बार इंजर्ड भी हो जाता है। सिर्फ बल्लेबाज ही नहीं, गेंदबाज भी कई बार चोट का शिकार हो जाते हैं।
वहीं, विकेटकीपर (Wicketkeeper) भी विकेटकीपिंग या बल्लेबाजी के दौरान इंजर्ड हो जाते हैं। जब कोई विकेटकीपर चोटिल होता है तो उसकी जगह फिर दूसरे खिलाड़ी को विकेट के पीछे जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसा ही कुछ भारत ने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में किया है। ऋषभ पंत कलाई में चोट की वजह से विकेटकीपिंग करने में असमर्थ हैं। इसी वजह से प्लेइंग XI में शामिल ध्रुव जुरेल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं, पंत की जगह सरफराज खान सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में मौजूद हैं।
इस टीम ने टेस्ट मैच में एक या दो नहीं, बल्कि इस्तेमाल किए थे 4 अलग-अलग Wicketkeeper

ऋषभ पंत की जगह ध्रुव जुरेल के विकेटकीपिंग करने से एक ही टेस्ट में दो विकेटकीपर (Wicketkeeper) का इस्तेमाल की घटना सामान्य लगती है, क्योंकि ऐसा पहले भी हो चुका है। वहीं, कई अन्य टीमें भी अपने मुख्य विकेटकीपर के चोटिल होने पर प्लेइंग XI में शामिल दूसरे खिलाड़ी को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंप देती हैं या फिर स्क्वाड में शामिल अन्य विकेटकीपर को सब्स्टीट्यूट के रूप में चुन लिया जाता है।
हालांकि, आप में से शायद ही बहुत कम लोगों को उस टेस्ट मैच के बारे में पता हो, जिसमें इंग्लैंड की टीम ने 4 विकेटकीपर (Wicketkeeper) इस्तेमाल किए थे। इसी वजह से यह अपने आप में एक अनोखा ही मैच रहा था, जिसकी चर्चा आज भी होती है।
1986 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हुआ था ये अनोखा टेस्ट
1986 में इंग्लैंड ने अपने घर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज की मेजबानी की थी। इस सीरीज का पहला मुकाबला 24 से 29 जुलाई तक लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। इसी मैच में इंग्लैंड ने कुल 4 अलग-अलग विकेटकीपरों (Wicketkeepers) का इस्तेमाल किया था।
ये विकेटकीपर ब्रूस फ्रेंच, बिल एथे, बॉब टेलर और बॉबी पार्क्स थे। इन सभी ने मुकाबले में अलग-अलग समय पर विकेटकीपिंग की थी।
नियमित विकेटकीपर के चोटिल होने से शुरू हुई 4 विकेटकीपरों की कहानी
दरअसल, इंग्लैंड की पारी के दौरान नियमित विकेटकीपर (Wicketkeeper) ब्रूस फ्रेंच को बल्लेबाजी करते हुए गंभीर चोट लग गई थी और उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा था। इंग्लैंड के स्क्वाड में उस समय कोई भी बैकअप विकेटकीपर नहीं था। इस स्थिति से निपटने के लिए मैदान पर मौजूद फर्स्ट क्लास क्रिकेट से संन्यास ले चुके बॉब टेलर को इंग्लैंड ने कीपर के रूप में चुन लिया। टेलर उस समय मैच स्पॉन्सर के होस्ट के रूप में हॉस्पिटैलिटी टेंट में बैठे हुए थे।
हालांकि, न्यूजीलैंड की पारी शुरू होने में देरी हो रही थी। इसी वजह से इंग्लैंड ने पहले दो ओवरों के लिए बल्लेबाज बिल एथे को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके बाद टेलर ने कीपिंग की। उन्होंने दूसरे दिन और तीसरे दिन की शुरुआत तक जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद, इंग्लैंड ने एक सब्स्टीट्यूट विकेटकीपर को शामिल करना उचित समझा और बॉबी पार्क्स को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी सौंप दी, जो उस समय घरेलू क्रिकेट में सक्रिय खिलाड़ी थे। इसी वजह से उन्हें बेहतर विकल्प समझा गया।
हालांकि, मैच के आखिरी दिन ब्रूस फ्रेंच फिट हो गए और उन्होंने न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के दौरान विकेटकीपिंग की। इस तरह अलग-अलग खिलाड़ियों के तौर पर इंग्लैंड ने एक ही टेस्ट मैच में 4 विकेटकीपरों का इस्तेमाल किया।
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