IPL के बीच खेल जगत में छाया सन्नाटा! टीम इंडिया के पूर्व स्टार खिलाड़ी का निधन, आज ली अंतिम सांस
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Team India : भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जिसने हर खेल प्रेमी को भावुक कर दिया है। जहां एक ओर आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर टीम इंडिया (Team India) के दिग्गज खिलाड़ी गुरबख्श सिंह ग्रेवाल के निधन ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है। 84 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली और उनके जाने से भारतीय हॉकी के एक गौरवशाली युग की यादें फिर से ताजा हो गई हैं।
1968 ओलंपिक में Team India के हीरो थे ग्रेवाल

गुरबख्श सिंह ग्रेवाल भारतीय हॉकी टीम (Team India) के उस ऐतिहासिक दल का हिस्सा थे, जिसने 1968 ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीता था। उस दौर में भारतीय हॉकी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए थी और ग्रेवाल जैसे खिलाड़ी टीम की रीढ़ माने जाते थे। खास बात यह रही कि उसी ओलंपिक में उनके भाईबलबीर सिंह ग्रेवाल ने भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ओलंपिक इतिहास में यह एक दुर्लभ क्षण था, जब दो सगे भाई एक साथ देश के लिए मैदान पर उतरे।
दिल का दौरा बना मौत की वजह
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ग्रेवाल का निधन जालंधर में दिल का दौरा पड़ने से हुआ। शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसके बाद पूरे हॉकी समुदाय में शोक की लहर फैल गई। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूर्व खिलाड़ियों, खेल संगठनों और प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका जाना भारतीय हॉकी (Team India) के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
खेल के बाद भी जारी रखा योगदान
अपने इंटरनेशनल करियर के बाद भी गुरबख्श सिंह ग्रेवाल ने हॉकी से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे में सीनियर स्पोर्ट्स ऑफिसर के रूप में कार्य किया और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
विशेष रूप से उन्होंने कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पहचान कर उन्हें अवसर दिलाया, जिससे भारतीय हॉकी (Team India) को नई प्रतिभाएं मिलीं। रिटायरमेंट के बाद भी वह कोचिंग और प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रहे और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में खेल के विकास में योगदान देते रहे।
हॉकी इंडिया और दिग्गजों ने जताया शोक
हॉकी इंडिया ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ग्रेवाल ने खिलाड़ी, कोच और प्रशासक के रूप में भारतीय हॉकी की सेवा पूरी निष्ठा से की। संगठन के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल मैदान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का काम भी किया। उनके जाने से खेल जगत में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना बेहद कठिन होगा।
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