IPL Loan Rule Explained: क्या है IPL का लोन नियम? जिसमे बीच सीजन दूसरी टीम पर जा सकते खिलाड़ी
Published - 22 Apr 2026, 02:15 PM | Updated - 22 Apr 2026, 02:21 PM
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IPL Loan Rule Explained: इंडियन प्रीमियर लीग में दर्शकों को आए दिन एक नया नियम सुनने को मिलता रहता है, जिसके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं, लेकिन कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिसके बारे में शायद ही किसी ने सुना हो। इनमें से एक नियम है लोग नियम।
यह शब्द सुनने के बाद प्रशंसक सोच में पड़ गए होंगे कि आखिर यह लोन नियम (IPL Loan Rule Explained) क्या होता है और इसका उपयोग आईपीएल में किस तरह से किया जाता है। बता दें कि, इस नियम के तहत बीच सीजन एक टीम का खिलाड़ी दूसरी टीम में जाकर खेल सकता है। चलिए आपको विस्तारपूर्वक इस नियम के बारे में जानकारी देते हैं।
IPL Loan Rule Explained: क्या है IPL का लोन नियम?
यह नियम उस समय लागू होता है तो किसी टीम का कोई खिलाड़ी चोटिल होकर बाहर हो जाता है। इस स्थिति में एक टीम दूसरी टीम के खिलाड़ी को ले सकती है। यह नियम सिर्फ उन खिलाड़ियों पर लागू होता है, जिन्होंने आईपीएल में दो से अधिक मैच नहीं खेले हो। जबकि यह लोन विंडो सीजन के 7वें मैच के बाद बंद हो जाती है।
जबकि लोन (IPL Loan Rule Explained) के लिए खिलाड़ी और फ्रेंचाइजी दोनों की सहमति देना बेहद जरूरी होता है। इसमें ट्रेड शामिल नहीं होती। आईपीएल नियमों के अनुसार, किसी खिलाड़ी को सिर्फ तभी रिप्लेस किया जा सकता है जब उसने 2 या उस से कम मैच खेले हो। वहीं एक सीजन में सिर्फ दो बार ही इस नियम का उपयोग करना संभव है।
खिलाड़ी को कैसे मिलता है पैसा?
अब सवाल ये है कि जिस खिलाड़ी को लोग के जरिए ट्रेड किया गया है उसको पैसा कैसे मिलता है। क्या उसको दोनों फ्रेंचाइजी पैसा देती है या फिर सिर्फ एक? तो इसका जवाब है कि जिस फ्रेंचाइजी ने आईपीएल ऑक्शन के समय लोन पर ट्रेड होने वाले खिलाड़ी को खरीदा था, वहीं उसको तय अनुबंध या नीलामी (IPL Loan Rule Explained) में लगी बोली के अनुसार पैसा देती है।
वहीं, लोन के बाद जिस फ्रेंचाइजी ने प्लेयर को अपने दल में शामिल किया है, उसे ही प्लेयर को मैच फिस देनी होती है। वहीं, जो टीम खिलाड़ी को लोन पर लेती है, उसको दूसरी फ्रेंचाइजी के साथ लोन फीस पर सहमति बनानी होती है। लेकिन इसका आईपीएल सैलरी से कोई लेना-देना नहीं होता है।
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कब लागू हुआ था नियम?
आईपीएल में लोन सिस्टम और इसकी डेडलाइन से जुड़े नियम साल 2018 से ही लागू हैं। हालांकि, इसके नियम इसके कठोर बनाए गए हैं कि इसका अधिक इस्तेमाल देखने को नहीं मिलता है। साथ ही इस नियम के तहत एक फ्रेंचाइजी दूसरी फ्रेंचाइजी से खिलाड़ी केवल लोन (IPL Loan Rule Explained) पर ले सकती हैं, बल्कि उनको खरीद नहीं सकती हैं। जबकि केवल चोटिल होने पर दूसरी टीम से प्लेयर को लोन पर लिया जा सकता है।
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