कैसे काउंट होता DLS मेथड? 7 विकेट खोकर भी क्यों दी गई टीम इंडिया को जीत, समझें इसका पूरा गणित
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न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में टीम इंडिया ने जीत हासिल की। इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी न्यूजीलैंड ने की और 41 ओवर में 134 रन बनाए। इसके बाद, लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 26 ओवर में 113/7 का स्कोर बनाया लेकिन तभी बारिश आ गई और फिर खेल दोबारा नहीं शुरू हो पाया, जिसके कारण भारत को DLS मेथड के तहत 4 रन से विजयी घोषित कर दिया गया।
इस मैच के बाद एक बार फिर से डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) मेथड चर्चा में आ गया है। इस नियम के कारण कई बार मैचों का नतीजा बहुत ही ज्यादा अलग हुआ और कई टीमें जीत के करीब होने के बावजूद चूक गईं। तो चलिए आपको बताते हैं कि डीएलएस मेथड क्या है और दूसरे वनडे में 7 विकेट गिरने के बावजूद इसकी मदद से टीम इंडिया कैसे विजेता बन गई।
क्या है DLS मेथड? जानें कैलकुलेशन का पूरा गणित

जब भी किसी मैच में बारिश की वजह से खलल पड़ता है और नतीजे के लिए जरूरी मिनिमम ओवरों का खेल हो चुका होता है, तब DLS का इस्तेमाल किया जाता है। इस मेथड में गणना मुख्य रूप से दो चीजों पर निर्भर करती है। सबसे पहले यह देखा जाता है कि बल्लेबाजी करने वाली टीम के कितने ओवर बाकी हैं, फिर उसके पास कितने विकेट बचे हुए हैं। इन दोनों को मिलाकर टीम के पास उपलब्ध रन बनाने के संसाधनों का आकलन किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी टीम के पास 20 ओवर में 10 विकेट बाकी हैं, तो उसके रन बनाने के संसाधन उस टीम से ज्यादा होंगे, जो इतने ही ओवरों में 7 विकेट गंवा चुकी है। DLS मेथड में लगातार गणना की जाती है और हर एक बॉल व विकेट से कैलकुलेशन बदल जाता है। इसी आधार पर पहली पारी में बने स्कोर और दूसरी पारी में उपलब्ध संसाधनों की तुलना करके पार स्कोर निर्धारित किया जाता है। इसलिए यह गणना सिर्फ बचे हुए ओवरों या रन रेट के आधार पर नहीं होती।
IND vs NZ दूसरे वनडे में DLS मेथड का कैसे हुआ इस्तेमाल
टीम इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच दूसरा वनडे वेलिंग्टन में खेला गया। इस मैच के शुरू से ही बारिश का खलल देखने को मिला, जिसके कारण टॉस में देरी हुई और फिर दोनों टीमों के लिए 47-47 ओवर निर्धारित किए गए। कीवियों ने पहले बल्लेबाजी की, लेकिन ऑल आउट होकर 134 रन ही बना पाए। इसके बाद, टीम इंडिया की पारी में 26 ओवर के बाद बारिश ने दस्तक दे दी और फिर काफी देर खेल रुका रहा। इसके बाद, DLS मेथड के तहत भारत का पार स्कोर 109 रन निर्धारित किया गया।
सरल शब्दों में कहें तो भारत का स्कोर न्यूजीलैंड की बराबरी के लिए 109 होना चाहिए था लेकिन टीम इंडिया 113 रन बना चुकी थी। यही कारण है कि टीम इंडिया को 4 रन से विजेता घोषित कर दिया गया।
7 विकेट खोने के बावजूद Team India विजेता क्यों बनी?
जिस तरह से न्यूजीलैंड की टीम गेंदबाजी कर रही थी, भारत के लिए 135 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जरूरी 22 रन बनाना आसान काम नहीं होता लेकिन 7 विकेट खोने के बावजूद DLS मेथड से टीम इंडिया बाजी मारने में सफल रही। काफी लोगों के मन में सवाल होगा कि भारत क्यों विजेता बना तो बता दें कि इस मेथड में विकेटों के गिरने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। यह देखा जाता है कि कितने विकेट शेष हैं और कितने ओवर बाकी हैं।
इसी वजह से दूसरे वनडे में टीम इंडिया के बाकी 3 विकेट और शेष 21 ओवरों को ध्यान में रखते हुए DLS मेथड से गणना की गई, जिसके आधार पर भारत पार स्कोर से आगे था। इसी वजह से उसे विजेता डिक्लेअर किया गया।
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