Muttiah Muralitharan ने बताया IPL 2026 का कला सच, बताया पैसा कमाने के लिए किस हद तक गिर रहा BCCI
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Muttiah Muralitharan : इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में बल्लेबाज़ों के बढ़ते दबदबे ने क्रिकेट के पारंपरिक संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। हाल ही में मुंबई इंडियंस के खिलाफ मुक़ाबले में सनराइज़र्स हैदराबाद द्वारा 243 रन का विशाल लक्ष्य आठ गेंद शेष रहते हासिल करना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बन गया।
इस मैच के बाद टीम के स्पिन बॉलिंग कोच मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) ने आधुनिक क्रिकेट की सच्चाई को बेहद साफ शब्दों में सामने रखा। उनका मानना है कि आज का खेल अब सिर्फ कौशल का नहीं, बल्कि मानसिकता और मनोरंजन का भी खेल बन चुका है, जिसमें गेंदबाजों के लिए जगह लगातार कठिन होती जा रही है।
Muttiah Muralitharan का खुलासा: युवा बल्लेबाज़ों की नई सोच से बढ़ा दबाव
मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) के अनुसार क्रिकेट में सबसे बड़ा बदलाव खिलाड़ियों की सोच में आया है। पहले बल्लेबाज़ शुरुआत में संभलकर खेलते थे और 6 ओवर में 40-50 रन को अच्छा माना जाता था, लेकिन अब वही स्कोर 70-80 तक पहुंच गया है।
आज के बल्लेबाज़ किसी भी गेंदबाज़ की प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होते। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक युवा खिलाड़ी ने जसप्रीत बुमराह जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज़ पर ‘नो-लुक सिक्स’ जड़ दिया। यह बदलाव दर्शाता है कि नई पीढ़ी का लक्ष्य टिकना नहीं, बल्कि हावी होना है।
गेंदबाजों के लिए बढ़ती चुनौतियां
मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) ने साफ कहा कि आज के दौर में गेंदबाजों के पास बचने के ज्यादा विकल्प नहीं हैं। उन्हें अपनी सटीकता और कौशल को लगातार बेहतर करना होगा, लेकिन इसके बावजूद परिस्थितियां उनके खिलाफ जा सकती हैं।
पिच, मैदान के छोटे आयाम और बल्लेबाज़ों की आक्रामकता गेंदबाजों के लिए मुश्किलें बढ़ा देती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अब 40 रन देना भी अच्छी गेंदबाज़ी मानी जाती है, जो इस बदलाव की गंभीरता को दर्शाता है।
स्पिन गेंदबाजी की जड़ों में समस्या
स्पिन गेंदबाजी को लेकर भी मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) ने गहरी चिंता जताई। उनका मानना है कि आज के युवा स्पिनर गेंद को घुमाने के बजाय सिर्फ तेज़ डालने पर ध्यान दे रहे हैं। बचपन में सही तकनीक और अभ्यास की कमी के कारण उनकी मसल मेमोरी विकसित नहीं हो पाती।
उन्होंने कहा कि अगर 10-12 साल की उम्र में स्पिन की कला नहीं सीखी गई, तो बाद में इसे विकसित करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि आज कई स्पिनर थ्रोडाउन गेंदबाज़ जैसे लगते हैं, जिनमें असली स्पिन का अभाव होता है।
MURALITHARAN EXPOSES IPL’S DEADLY BUSINESS REALITY 🤯
— Sam (@Cricsam01) May 2, 2026
Muralitharan🎙️– IPL is now purely business; they make flat pitches bcz low scores are boring for sponsors! Even I would struggle to bowl against kids like Suryavanshi
They treat bowler like Slaves 😕pic.twitter.com/eEeil8JxAC
मनोरंजन बनाम संतुलन की बहस
जब उनसे पूछा गया कि क्या आईपीएल में बल्ले और गेंद के बीच संतुलन होना चाहिए, तो उन्होंने साफ कहा कि यह टूर्नामेंट मनोरंजन के लिए बनाया गया है। आईपीएल अब एक बड़ा बिज़नेस बन चुका है, जहां चौके-छक्के ही दर्शकों को आकर्षित करते हैं।
उनका मानना है कि अगर पिचों को संतुलित बनाया गया, तो दर्शकों की रुचि कम हो सकती है और इसका असर बीसीसीआई के व्यापारिक मॉडल पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जहां गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ दोनों नए-नए तरीके खोजते रहेंगे।
मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) ने यह भी माना कि अगर उनके दौर के महान स्पिनर शेन वार्न आज खेलते, तो वे भी ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाते। यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि आधुनिक क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका है, जहां पारंपरिक कौशल से ज्यादा आक्रामकता और मनोरंजन की मांग हावी हो गई है।
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