5 भारतीय खिलाड़ी जिन्होंने एक ही मैच में गेंद और बल्ले दोनों के साथ किया शुरुआत
Published - 03 Sep 2020, 10:47 AM

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अपने देश के लिए खेलना हर खिलाड़ी का सपना होता है. लेकिन बतौर ऑलराउंडर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना बहुत ज्यादा अहम भी हैं. लेकिन ऑलराउंडर खिलाड़ी मैच में गेंद और बल्ले दोनों के साथ शुरुआत करें ऐसा मौका बहुत ही कम देखने को मिलता है.
भारतीय क्रिकेट में उसके बाद भी कुछ ऐसे ऑलराउंडर खिलाड़ी रहे हैं. जिन्होंने गेंद और बल्ले दोनों के साथ टीम के लिए शुरुआत की हुई है. इन खिलाड़ियों ने भारत के लिए क्रिकेट के खेल में बहुत ही अहम योगदान दिया हुआ है. जिसके कारण ही वो चर्चा का केंद्र रह चुके हैं.
आज हम आपको उन 5 भारतीय खिलाड़ियों के बारें में बताने वाले हैं. जिन्होंने एक ही मैच में टीम के लिए गेंद और बल्ले दोनों से ही पारी की शुरुआत की हुई है. इस लिस्ट में शामिल अधिकतर खिलाड़ियों का नाम दिग्गजों में शामिल किया जाता है.
5. इरफ़ान पठान
भारतीय क्रिकेट इतिहास में कपिल देव के बाद ऑलराउडंर्स में सबसे ज्यादा प्रभाव बडौदा के इरफान पठान ने छोड़ा है. इरफान पठान को एक समय तो भारतीय टीम का दूसरा कपिल देव भी कहा जाने लगा था. वैसे इरफान अपने करियर को ज्यादा लंबा नहीं कर सके.
उन्होंने गेंदबाजी के साथ ही बल्ले से भी अच्छा योगदान दिया है. इरफान पठान के करियर में एक ऐसा मौका आया जब उन्हें गेंद और बल्ले दोनों के साथ शुरुआत करने का भी मौका मिला. इरफान पठान को 2005 में कोलकाता में खेले गए वनडे मैच में ओपनिंग करने का मौका दिया जहां वो खाता नहीं खोल सके तो वहीं गेंदबाजी में भी 10 ओवर में कोई विकेट नहीं ले सके.
4. वीरेन्द्र सहवाग
भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग ने बल्लेबाज के तौर पर क्या हासिल किया है ये किसी को भी बताने की जरूरत नहीं है. सहवाग क्रिकेट जगत के सबसे तूफानी और महान सलामी बल्लेबाजों में से एक कहे जाते हैं.
साथ ही वीरेन्द्र सहवाग को उनके करियर की शुरुआत में गेंदबाजी का भी मौका मिलता था. राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली की कप्तानी में तो वीरेन्द्र सहवाग ने लगातार अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी की है. सहवाग के वनडे करियर में एक ऐसा मौका भी आया जब उन्होंने एक ही मैच में सलामी बल्लेबाजी के साथ ही गेंदबाजी की भी शुरुआत की.
साल 2005 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में सहवाग ने गेंदबाजी की शुरुआत की थी तो वहीं बल्लेबाजी में भी ओपनिंग करने उतरे. हालांकि बल्ले से वो शून्य का स्कोर की कर पायें थे.
3. कपिल देव
भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे महान ऑलराउंडर रहे कपिल देव की गेंद और बल्ले की काबिलियत दुनिया ने देखी है.दिग्गज कपिल देव का नाम ऑलराउडंर्स में तो भारत ही नहीं विश्व में भी टॉप में शुमार रहा. कपिल देव ने अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी की अभूतपूर्व क्षमता के बूते भारत को कई मैचों में जीत दिलायी है.
कपिल देव भारत के लिए स्ट्राइक तेज गेंदबाज हुआ करते थे तो वहीं आमतौर पर वो नंबर 7 पर बल्लेबाजी करते थे. लेकिन साल 1992 विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्हें बल्लेबाजी में भी शुरुआत करने का मौका मिला. के श्रीकांत के साथ सलामी बल्लेबाज के रूप में उतरे कपिल देव ने उस मैच में मात्र 10 रन ही बनाए थे. साथ ही गेंदबाजी में 4 ओवर में केवल 6 रन दिए थे.
2. रोजर बिन्नी
विश्व कप 1983 में भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज रहे रोजर बिन्नी को उनकी स्विंग गेंदबाजी के लिए जाना जाता था. उस विश्व कप में रोजर बिन्नी भारतीय टीम के लिए सबसे कामयाब गेंदबाजों में से एक रहे. जिन्होंने अपनी तेज गेंदबाजी से खासा प्रभाव छोड़ा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोजर बिन्नी गेंदबाजी से तो शुरुआत करते ही थे साथ ही 2 वनडे ऐसे भी खेले हैं जिसमें उन्हें बल्लेबाजी में भी शुरुआत का मौका भी मिला.
जी हां रोजर बिन्नी तेज गेंदबाजी के साथ ही भारत के लिए 2 वनडे मैचों में ओपनिंग करने भी उतरे. 1980-81 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेन्सन एंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज में रोजर बिन्ना को 2 मैचों में पारी की शुरुआत करने का मौका मिला जिसमें उन्होंने 21 और 31 रन की पारी खेली. उनके जोड़ीदार के रूप में सुनील गावस्कर थे.
1. मनोज प्रभाकर
भारतीय क्रिकेट टीम को 90 के दशक में दिल्ली का एक बेहतरीन ऑलराउंडर मिला हुआ था. दिल्ली के पूर्व क्रिकेटर मनोज प्रभाकर अपने समय में भारतीय टीम के सबसे नियमित खिलाड़ी हुआ करते थे जिन्होंने भारतीय टीम के लिए 130 वनडे मैच खेले हैं.
मनोज प्रभाकर का बल्ले और गेंद दोनों से प्रभाव था तभी तो उन्होंने भारत के लिए एक ही वनडे में ना केवल एक या दो मैच बल्कि 45 मैचों में ओपनिंग करने के साथ ही गेंदबाजी की भी शुरुआत की. मनोज प्रभाकर ने अपने वनडे करियर में 157 विकेट हासिल करने के साथ ही 11 अर्धशतक और 2 शतकीय पारियां भी खेली हैं.