ये है वो 5 ऐसे मौके जिसने भारतीय क्रिकेट को पूरी तरह से बदल कर रख दिया

Published - 20 Sep 2019, 05:37 AM

खिलाड़ी

आज भारतीय टीम क्रिकेट की दुनिया में सबसे मजबूत टीम कही जा रही है. आज की भारतीय टीम ना सिर्फ अपने घर में जीत रही है बल्कि विदेशी जमीं पर भी अपना दबदबा दिखा रही है. आपको बता दे की भारतीय क्रिकेट टीम में ये बदलाव मात्र कुछ दिनों में नहीं है. इस बदलाव को होने में बहुत समय लगा है.

भारतीय टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ ही साथ फील्डिंग भी बहुत शानदार है. मौजूदा समय में भारतीय टीम के पास सबसे अच्छा तेज गेंदबाजी वाला यूनिट है. जिससे विश्व के सभी बल्लेबाजो को डर लगता है. आलराउंडर की संख्या भी अब बढ़ रही है.

हम आपको आज पांच ऐसे मौको के बारें में बताने जा रहे हैं. जिसके कारण भारतीय क्रिकेट टीम में आज इतना बड़ा बदलाव आया है. इन मौकों ने भारतीय क्रिकेट को तो बदला ही लेकिन इससे साथ ही इसका असर विश्व क्रिकेट पर भी पड़ा.

1.1971 में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में टेस्ट सीरीज जीत

कहा जाता है की हमारी क्रिकेट में बदलाव 1983 के बाद आया लेकिन उस टीम को जीत सकने का भरोसा 1971 की टीम ने दिया था. आज भी विदेशी सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीतना बड़ी बात मानी जाती है. उन दोनों दौरों पर भारतीय टीम के कप्तान अजीत वाडेकर थे.

अजीत वाडेकर जी टीम पहले वेस्टइंडीज गयी 1971 में, उस समय विश्व क्रिकेट ने पहली बार सुनील गावस्कर को बल्लेबाजी करते देखा. इस सीरीज में सुनील गावस्कर ने 774 रन बनाये थे. उनका साथ दिलीप सरदेसाई ने दिया था. जिन्होंने पहले मैच में शानदार दोहरा शतक लगाया था. जिसके कारण भारतीय टीम वो सीरीज जीत पाई थी.

वेस्टइंडीज में जीत के बाद भारतीय टीम इंग्लैंड गयी जहाँ पर पहले दो मैच ड्रा हो गये. तीसरे मैच में चंद्रशेखर ने 38 रन देकर 6 विकेट लिए जिसके कारण दूसरी पारी में भारतीय टीम को 173 रनों का लक्ष्य मिला. जिसके बाद सरदेसाई ने 40 रन और विश्वनाथ ने 33 रन बना कर भारतीय टीम को इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीता था दी थी. इस सीरीज के बाद भारतीय टीम को खुद को आत्मविश्वास आया.

2. 1983 का विश्व कप जीतना

मौजूदा समय में विराट कोहली की टीम जहाँ पर है उसका एक बड़ा कारण 1983 का विश्व कप जीतना है. इस विश्व कप के जीत के बाद सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने क्रिकेट खेलने का फैसला किया था. ये अवसर 25 जून 1983 को आया था.

इससे पहले दो विश्व कप खेले जा चुके थे. जिसमें भारतीय टीम कुछ खास नहीं कर पाई थी. तीसरे विश्व कप में भी किसी को कोई उम्मीद नहीं थी. लेकिन कप्तान कपिल देव और सुनील गावस्कर, मोहिंदर अमरनाथ जैसे खिलाड़ियों को अपने टीम पर पूरा विश्वास था. जिसका फायदा हुआ की भारतीय टीम फाइनल पहुँच गयी.

फाइनल में भारतीय टीम का सामना दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज की टीम से था. जहां पर भारतीय टीम ने मात्र 183 रन बनाये थे. लेकिन गेंदबाजो के दम पर भारतीय टीम ने ये मुकाबला जीत लिया था. इसके साथ ही भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया. भारतीय क्रिकेट ने यहाँ से बदलना शुरू किया.

3. 2001 ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट सीरीज जीतना

इस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम को अजेय कहा जाता था. ऑस्ट्रेलिया की टीम उस समय भारत लगातार 16 टेस्ट जीत कर आ रही थी. ऑस्ट्रेलिया की टीम ने पहला मैच मुंबई में बहुत ही आसानी से जीत लिया था. जिसके बाद सीरीज का दूसरा मुकाबला कोलकाता में खेला जा रहा था.

जहाँ ऑस्ट्रेलिया की टीम ने भारत को फॉलोऑन दे दिया था. लेकिन उसके बाद वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने रिकॉर्ड पार्टनरशिप की और भारतीय टीम को आगे ले गये. जिसके बाद हरभजन सिंह ने अपनी गेंदबाजी के दम पर ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया.

जिसके बाद भारतीय टीम में आत्मविश्वास आ गया. हरभजन सिंह ने इस सीरीज में 32 विकेट चटकाए. जिसके कारण भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ये सीरीज हरा दिया. इस जीत के बाद भारतीय टीम को ना सिर्फ दो सुपरस्टार मिले बल्कि इसके साथ ही कई अन्य टेस्ट सीरीज जीतने की प्रेरणा भी मिली.

4. 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल

हमने 1983 में विश्व कप जीतने के बाद एक टीम के रूप में खुद को बेहतर किया लेकिन वो इस बीच कोई बड़ी ट्रॉफी नहीं जीत पाए. लेकिन 2002 में लॉर्ड्स के मैदान पर जब भारतीय टीम ने नेटवेस्ट ट्रॉफी का फाइनल जीता तो कई बड़े बदलाव हुए. इसके बाद जो टीम में आत्मविश्वास आया तो हमने 2011 का विश्व कप भी जीता.

युवायों से भरी हुई सौरव गांगुली की टीम लॉर्ड्स के मैदान पर जब 326 रनों का स्कोर का पीछा करने उतरी तो किसी को टीम से उम्मीद नहीं थी. लेकिन गांगुली ने टीम में जिन युवा खिलाड़ियों को मौका दिया था. वो टीम के काम आया. जिसके कारण हमें युवराज सिंह जैसा सुपरस्टार मिला.

फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ की बल्लेबाजी के दम पर जीत दर्ज करी थी. इस ख़िताब के जीतने के बाद सौरव गांगुली ने अपनी टीशर्ट उतार कर लॉर्ड्स के बालकनी में लहराई थी. जो बता रहा था की आने वाले समय में हम राज करने वाले हैं.

5. 2007 टी20 विश्व कप जीत

टी20 का फोर्मेट नया आया था. उस समय आईसीसी ने इसके लिए एक टूनामेंट कराने की सोची. दक्षिण अफ्रीका में होने वाले इस टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के कई बड़े खिलाड़ी ने जाने से मना कर दिया. जिसके बाद महेंद्र सिंह धोनी को पहली बार कप्तान बना कर टीम के साथ भेजा गया.

महेंद्र सिंह धोनी ने एक कप्तान के रूप में पाकिस्तान के खिलाफ पहले मुकाबले में ही खुद को साबित किया. जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. भारतीय टीम का फ़ाइनल में सामना एक बार फिर पाकिस्तान से था. जहाँ पर भारतीय टीम ने फाइनल मुकाबला जीत कर इतिहास रच दिया था.

ये मात्र एक जीत नहीं थी. इस टूनामेंट के बाद भारतीय क्रिकेट टीम को सबसे सफल कप्तान के रूप में महेंद्र सिंह धोनी मिले. जिनके कप्तानी में भारतीय टीम ने बाद में 2011 में विश्व कप और 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीता. इस फाइनल में जीत के बाद ही भारतीय क्रिकेट में आईपीएल का आगमन हुआ था. जिसने भारतीय क्रिकेट को पूरी तरह से बदल दिया.

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