क्या होता है Pre-Seeding? क्यों इस विवाद पर टीम इंडिया और ICC की हो रही आलोचना

Published - 22 Feb 2026, 12:24 PM | Updated - 22 Feb 2026, 12:27 PM

Pre-Seeding

क्रिकेट की दुनिया में इन दिनों Pre-Seeding शब्द काफी चर्चा में है। आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट्स, खासकर टी20 विश्व कप 2024 और आगामी चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर इस नियम ने एक नई बहस छेड़ दी है। खेल प्रेमी इस बात से हैरान हैं कि टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही टीमों के स्थान और ग्रुप कैसे तय हो जाते हैं। आखिर यह Pre-Seeding क्या है और क्यों इसे टीम इंडिया और आईसीसी के बीच एक संबंध से जोड़ कर देखा जा रहा है? आइए विस्तार से समझते हैं।

क्या होती है Pre-Seeding?

ICC

Pre-Seeding एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत आईसीसी टूर्नामेंट के मुख्य दौर जैसे सुपर-8 या सेमीफाइनल के लिए टीमों की रैंकिंग और उनके ग्रुप पहले से ही निर्धारित कर दिए जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, अगर कोई टीम अपने ग्रुप स्टेज में पहले स्थान पर रहे या दूसरे पर, उसकी सीडिंग नहीं बदलती।

उदाहरण के तौर पर 2024 टी20 विश्व कप में भारत को ए1 और ऑस्ट्रेलिया को बी2 सीडिंग दी गई थी। नियम यह था कि भले ही भारत अपने ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहे, वह सुपर-8 में ए1 के स्लॉट पर ही जाएगा।

इसका मुख्य उद्देश्य ब्रॉडकास्टर्स और दर्शकों को यह पहले से बताना होता है कि उनकी पसंदीदा टीम किस तारीख को और किस मैदान पर मैच खेलेगी, ताकि टिकटों की बिक्री और टीवी व्यूअरशिप को मैनेज किया जा सके। लेकिन दुनिया भर में इसे अलग रुप दिया जा रहा है।

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Pre-Seeding को लेकर टीम इंडिया और ICC की आलोचना क्यों ?

इस नियम को लेकर आईसीसी और टीम इंडिया की आलोचना इसलिए हो रही है क्योंकि प्रशंसकों का मानना है कि यह खेल की निष्पक्षता के खिलाफ है। आलोचकों के अनुसार Pre-Seeding के जरिए आईसीसी यह सुनिश्चित करता है कि टीम इंडिया के सभी मैच ऐसे समय और स्थानों पर हों, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को अधिकतम फायदा हो।

विवाद तब और बढ़ गया जब यह देखा गया कि भारतीय टीम के सेमीफाइनल का स्थान पहले से तय था, चाहे वह ग्रुप में कहीं भी रहे।

इससे दूसरी टीमों को तैयारी करने का कम मौका मिलता है और ऐसा लगता है जैसे पूरा टूर्नामेंट एक विशेष टीम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। क्रिकेट दिग्गज जैसे माइकल वॉन ने भी इसे अनुचित लाभ बताते हुए आईसीसी की कड़ी निंदा की है।

क्या खेल भावना से बढ़कर है व्यावसायिक लाभ ?

क्या क्रिकेट अब केवल एक खेल न रहकर पूरी तरह से बिजनेस बन चुका है? Pre-Seeding के पीछे का असली तर्क आर्थिक है। आईसीसी का लगभग 80 प्रतिशत राजस्व भारतीय बाजार से आता है। अगर भारत के मैचों का समय और स्थान अनिश्चित हो, तो विज्ञापन और प्रायोजकों को करोड़ों का नुकसान हो सकता है।

हालांकि, खेल के नजरिए से Pre-Seeding स्पोर्टिंग मेरिट को खत्म करता है। जब किसी टीम को पता होता है कि उसे हारने या जीतने पर भी एक ही खास वेन्यू पर खेलना है, तो कंपीटीशन की भावना कम हो जाती है।

एक खेल प्रसंशक के नजरीए से देखें तो आईसीसी को पैसों से ज्यादा 'खेल की गरिमा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि हर टीम को बराबर का मौका मिल सके और टूर्नामेंट का रोमांच बना रहे।

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Sourabh Kumar

सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर

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