रणजी खेलने लायक नहीं हैं ये खिलाड़ी, लेकिन कोच गंभीर जबर्दस्ती वर्ल्ड कप 2027 में बना रहे इसके लिए जगह

Published - 11 Jan 2026, 11:57 AM | Updated - 11 Jan 2026, 12:02 PM

World Cup 2027

भारतीय क्रिकेट टीम इस समय बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है। मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन में टीम इंडिया अपनी भविष्य की रणनीतियों को अंतिम रूप दे रही है। आगामी बड़े टूर्नामेंटों जैसे वर्ल्ड कप 2027 (World Cup 2027) को ध्यान में रखते हुए टीम के संयोजन पर काफी मंथन किया जा रहा है।

खेल के गलियारों में कुछ सीनियर खिलाड़ियों की टीम में मौजूदगी और युवाओं की अनदेखी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। क्रिकेट फैंस और जानकारों के बीच इस समय टीम चयन की प्राथमिकताओं को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

रवींद्र जडेजा का World Cup 2027 में रहना असंभव?

भारतीय टीम के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा लंबे समय तक तीनों फॉर्मेट के मैच विनर रहे हैं, लेकिन अब उम्र के साथ उनके प्रदर्शन में गिरावट की चर्चा तेज है। आलोचकों का मानना है कि वर्ल्ड कप 2027 (World Cup 2027) को ध्यान में रखते हुए क्या जडेजा अभी भी वनडे फॉर्मेट में उतने ही प्रभावी हैं? आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ समय में वनडे क्रिकेट में उनकी विकेट लेने की क्षमता कम हुई है और बल्लेबाजी में भी वह फिनिशर वाली भूमिका में संघर्ष करते नजर आए हैं।

कुछ विशेषज्ञों का तो यहाँ तक कहना है कि वर्तमान फॉर्म को देखते हुए वह शायद घरेलू रणजी ट्रॉफी में भी वैसा प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं, जैसा एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से उम्मीद की जाती है। बावजूद इसके, कोच गौतम गंभीर उन्हें लगातार मौके दे रहे हैं, जिससे यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अनुभव के नाम पर भविष्य के साथ समझौता किया जा रहा है।

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अक्षर पटेल: एक बेहतर विकल्प जिसकी हो रही है अनदेखी

जडेजा के सीधे प्रतिद्वंदी के रूप में अक्षर पटेल ने खुद को एक बेहतरीन विकल्प साबित किया है। अक्षर न केवल गेंद से बल्कि बल्ले से भी जडेजा की तुलना में अधिक आक्रामक नजर आ रहे हैं। विशेषकर वनडे क्रिकेट में अक्षर की इकॉनमी रेट और बीच के ओवरों में विकेट निकालने की कला उन्हें वर्ल्ड कप 2027 (World Cup 2027) के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है। प्रशंसकों और क्रिकेट विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि अक्षर पटेल वर्तमान में जडेजा से कहीं बेहतर फॉर्म में हैं।

अक्षर ने टी20 वर्ल्ड कप में भी अपनी उपयोगिता साबित की थी, लेकिन वनडे फॉर्मेट में जब बात प्लेइंग इलेवन की आती है, तो गंभीर का झुकाव जडेजा की तरफ अधिक दिखता है। यह 'फेवरिटिज्म' टीम के संतुलन को बिगाड़ सकता है, क्योंकि आधुनिक वनडे क्रिकेट में आपको ऐसे ऑलराउंडर की जरूरत है जो मैच का रुख पलटने का दम रखे।

World Cup 2027 की तैयारी या कोच गंभीर की जिद?

गौतम गंभीर हमेशा से अपनी बेबाक राय और कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जडेजा के मामले में उनका रुख फैंस को समझ नहीं आ रहा है। वर्ल्ड कप 2027 (World Cup 2027) अभी काफी दूर है और दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर आपको तेजतर्रार और युवा एथलीट्स की जरूरत होगी। जडेजा तब तक 38 वर्ष के हो जाएंगे, ऐसे में उन्हें अभी से ढोना टीम के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

युवाओं को मौका न देना और फॉर्म से बाहर सीनियर खिलाड़ियों पर भरोसा जताना टीम इंडिया के 'ट्रांजिशन फेज' को धीमा कर रहा है। अगर बीसीसीआई और मैनेजमेंट ने समय रहते कड़े फैसले नहीं लिए, तो वर्ल्ड कप 2027 (World Cup 2027) का सपना फिर से अधूरा रह सकता है। गंभीर को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है ताकि टीम में केवल वही खिलाड़ी खेलें जो वास्तव में प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं।

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Sourabh Kumar

सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर

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