एक मैच में चलता यह भारतीय खिलाड़ी, फिर अगले 8-10 मैचों में हो जाता फ्लॉप
Published - 13 Oct 2026, 02:16 PM | Updated - 13 Oct 2026, 02:36 PM
भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की कभी कमी नहीं रही, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर लंबे समय तक वही टिक पाता है जो लगातार रन बनाए। टीम इंडिया में कई ऐसे चेहरे आए जिन्होंने मैदान पर उतरते ही ऐसा समां बांधा कि लगा बस अगला सुपरस्टार मिल गया। लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब एक अच्छी पारी खेलने के बाद वही खिलाड़ी अगली आठ-दस पारियों में खाता खोलने के लिए भी जूझता नजर आता है। ऐसे 'कभी खुशी, कभी गम' वाले प्रदर्शन को लेकर बहस छिड़ना तो बनता है।
एक आतिशी पारी और फिर फ्लॉप

ऐसे बल्लेबाजों की सबसे बड़ी यूएसपी उनका बेखौफ अंदाज होता है। जब इनका दिन होता है, तो सामने दुनिया का कोई भी गेंदबाज हो, गेंद सीधे बाउंड्री पार ही दिखती है। अकेले दम पर हारा हुआ मैच निकाल लेना, इनके बाएं हाथ का खेल लगता है। लेकिन समस्या यह है कि वह 'दिन' हफ्तों बाद आता है।
जैसे ही उस एक तूफानी पारी के दम पर उम्मीदें बढ़ती हैं, अगली कुछ पारियों में वही गैर-जिम्मेदाराना शॉट और सस्ते में विकेट गंवाने का पुराना सिलसिला लौट आता है। सिंगल डिजिट पर आउट होना आदत बन जाती है और लय पूरी तरह गायब दिखती है। वह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि संजू सैमसन (Sanju Samson) हैं।
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कोच गंभीर का Sanju Samson पर अंधा भरोसा
कोच गौतम गंभीर संजू सैमसन (Sanju Samson) को एक्स-फैक्टर मानकर लंबे समय से बैक करते आ रहे हैं, जिसका असर हमे टी20 विश्व कप 2026 के नॉकआउट मुकाबले में भी देखने को मिला। संजू (Sanju Samson) ने फाइनल जितवाने तक शानदार पारी खेलकर गंभीर के भरोसे को और मजबूत किया। हालांकि वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मुकाबलों में अब तक उनका बल्ला सिर्फ दूसरे मुकाबले में चला।
ड्रेसिंग रूम में यही सोच रहती है कि लड़का मैच-विनर है, किसी भी दिन पासा पलट सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि लगातार आठ-दस मैचों तक फ्लॉप रहने से पूरी टीम का बैटिंग ऑर्डर डगमगा जाता है। जब मिडिल या टॉप ऑर्डर से रन नहीं निकलते, तो बाकी बल्लेबाजों पर बेवजह दबाव बढ़ता है। सबसे ज्यादा नाइंसाफी उन खिलाड़ियों के साथ होती है जो घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाकर बेंच पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं।
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क्या बेंच स्ट्रेंथ का दबाव है?
आज की भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा उस स्तर पर है जहां किसी को ज्यादा वक्त नहीं मिलता। आईपीएल और घरेलू सत्र से ऐसे युवा लगातार दरवाजे खटखटा रहे हैं जो हर मैच में जिम्मेदारी से खेलने का दम रखते हैं। ऐसे माहौल में अगर कोई सीनियर खिलाड़ी निरंतरता नहीं दिखा पाता, तो वह सीधे निशाने पर आ जाता है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण संजू सैमसन (Sanju Samson) भी है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सिर्फ चमक-दमक जैसी पुरानी साख पर नहीं चलता यहां हर मैच में खुद को साबित करना पड़ता है। अगर समय रहते संजू सैमसन (Sanju Samson) अपनी कमजोरियों पर काम नहीं करते हैं, तो शायद टीम मैनेजमेंट के लिए बाहर का रास्ता दिखाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा क्योंकि पीछे यशस्वी जयसवाल भी खड़े हैं।
ऑथर के बारे में
यह लेखक Cricketaddictor का एक सदस्य है जो क्रिकेट से जुड़ी खबरों और विश्लेषण पर लिखता है।