भारतीय टीम के पूर्व एवं सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग को पूरे विश्व में सबसे शानदार बल्लेबाज के रूप में देखा जाता है. उन्हें अपनी टीम इलेवन में रखना हर किसी कप्तान का सपना होगा. वीरेन्द्र सहवाग का बल्लेबाजी करने का तरीका शायद ही कोई करता हो. क्योंकि उन्हें मैदान में आते ही पहली गेंद पर चौका-छक्का लगा कर टीम का खाता खोलने में ज्यादा मजा आता था.

कुमार संगकारा ने वीरेन्द्र सहवाग की जमकर की तारीफ

भारतीय टीम के सलामी और आक्रामक बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाने वाले वीरेन्द्र सहवाग ने भारतीय टीम के लिए काफी मैच खेले हैं. उसके साथ-साथ उन्होंने अपने नाम कई बड़े रिकॉर्ड भी किए है. लेकिन उन्हें अपने अच्छे व्यहार और नि:स्वार्थ नेचर के भी जाना जाता हैं.

उनके इस नेचर को देखते हुए कुमार संगकारा ने अपने एक कॉलम में वीरेंद्र सहवाग की तारीफ करते हुए कहा था कि

“जब से मैंने पहली बार उन्हें(वीरेन्द्र सहवाग) को खेलते देखा है, मैं वीरेन्द्र सहवाग का बड़ा प्रशंसक रहा हूं। सिर्फ उनकी अभूतपूर्व क्षमता ही नहीं बल्कि उनकी मानसिकता जिसमें वो बहुत तेजी के साथ रन बनाने का काम करते हैं।”

“ज्यादातर बल्लेबाजों में ये एक बहुत ही रेयर विशेषता होती है। हालांकि उनमें से ज्यादातर सहवाग के साथ सुविचारित और संरचित तरीके से रनों का संचय करने के लिए संतुष्ट हैं, ये उनकी एक पारी की पहली गेंद से प्रभुत्व की उस स्थिति को प्राप्त करने को संभव बनाते हैं जितना कम समय हो। सहवाग कभी भी अपने औसत और रिकॉर्ड के बारे में सोचने वाले खिलाड़ी नहीं थे। उनकी केवल एक ही महत्वाकांक्षा होती थी कि वो अपनी तरफ से रन बनाए वो जल्दी से स्कोर करते और परिणाम को जीत के रूप में खत्म करते।”

वीरेंद्र सहवाग जैसा नहीं हैं किसी के पास दम

“उनकी तकनीक बहुत ही सरल थी, जो एक महान हैंड-आई कॉर्डिनेशन, लॉ फुटवर्क और जबरदस्त संतुलन के साथ ही कलाई की शानदार तकनीक से आधारित थी। वो गेंदबाजों को स्टंप पर गेंदबाजी करवाने के लिए हमेशा ऑफ साइड में खुलने की कोशिश करते थे, क्योंकि उनका कहना था कि गेंद को हिट करने के लिए हाथ में बल्ला था और मैदान में एक सीमारेखा भी थी।”

“दो पारियां हैं जो विशेष रूप से बहुत शानदार रही। 2008 में गाले में पहली उनकी शानदार पारी थी जिसे मैंने कभी नहीं देखा था। ये उस श्रेणी में आता है जब ब्रायन लारा ने एक सीरीज में हमारे खिलाफ 688 रन बनाए थे। भारत सीरीज में 0-1 से नीचे था। अजंता मेंडिस अपने डेब्यू पर एसएससी में चल रहे थे। हर भारतीय बल्लेबाज को मुरली और मेंडिस ने परेशान किया था। लेकिन वीरेन्द्र सहवाग ने अपनी सभी गन को फूंक दिया। वो टीम के 329 रनों के टोटल में 231 गेंदों में 201 रनों पर कैरिंग द बैट के साठ लौटे।”

2009 में लगाई थी एक शानदार पारी

कुमार संगकारा ने सहवाग के बारें में बात करते हुए आगे कहा था कि

“फिर उन्होंवे 2009 में मुंबई में शानदार पारी के साथ मैच को हमारे सामने रखा, जहां से उन्होंने फिर से हमारे अधिकांश गेंदबाजों पर अपना काम कर लिया था। और जिस गति से उन्होंने रन बनाए उन्होंने 293 रनों के लिए केवल 254 गेंदों का सामना किया। इसका मतलब था कि भारत ने खेल में 700 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी समय पर मैच जीता।”

“वीरेन्द्र सहवाग वहां खड़े थे। वो स्टेप आउट करने पर भी मेंडिस या मुरली की पढ़ने की चिंता नहीं करते थे। वो आक्रमक बल्लेबाजी के मास्टरक्लास थे। इस क्षेत्र में ऐसा कोई बल्लेबाज नहीं था ऐसा कोई एरिया नहीं जहां वो शॉट्स नहीं खेल सकते थे। अगर कभी कोई दिक्कत होती जब वो गेंद को नहीं पढ़ पाते तो वो अपने हथियारों के विस्तार करते और गेंद को बाउन्ड्री के बाहर फेंक ही देते।”

“मेरे लिए वीरेन्द्र सहवाग महान हैं क्योंकि वो एक ही चीज को ध्यान में रखकर बल्लेबाजी करते थे कि किसी भी हालात में भारत को जीत की स्थिति में लाना है।”