भारतीय क्रिकेट में हमेशा से स्पिनर्स का बोलबाला रहा है,  अगर इस वक्त टेस्ट और वनडे रैंकिंग में टीम इंडिया नंबर एक है, तो इसका श्रेय काफी हद तक स्पिनर्स को जाता है.

टीम इंडिया के ऐसे दो स्पिनर्स हैं जिनका टेस्ट क्रिकेट में कोई सानी नहीं है, लेकिन फिर भी ये शॉर्ट फॉर्मेट में जगह नहीं बना पा रहे हैं.

टेस्ट क्रिकेट में बजता है इनके नाम का डंका

टीम इंडिया इस वक्त ICC टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक पायदान पर काबिज है, ये उपलब्धि हासिल करने में दो स्पिनर्स का बड़ा योगदान है,  ये दो नाम हैं, रविचन्द्रन अश्विन और रविन्द्र जडेजा, अगर टीम इंडिया लगातार पिछली 8 टेस्ट सीरीज जीतने ने कामयाब हुई है, तो उस जीत की स्क्रिप्ट इन दोनों ने ही लिखी है.

हाल ही में खेली गई टेस्ट सीरीज में भी श्रीलंकाई बल्लेबाजी अश्विन और जडेजा के सामने क्लब स्तरीय नजर आई थी. अश्विन ने 3 मैचों में सबसे ज्यादा 17 विकेट झटके थे, तो वहीं जडेजा ने दो मैच खेलकर 13 विकेट अपने नाम किए थे.

इससे पहले  ऑस्ट्रेलिया,  बांग्लादेश,  इंग्लैंड,  न्यूजीलैंड, विंडीज, साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी इन स्पिन के जादूगरों का  जादू जमकर चला था

वनडे में हो रही अनदेखी

अश्विन और जडेजा ने अपना आखिरी वनडे जून-जुलाई में विंडीज के खिलाफ खेला था,  इस सीरीज के बाद सलेक्टर्स ने श्रीलंका दौरे के लिए इन दोनों खिलाड़ियों को ये कह कर टीम में शामिल नहीं किया गया था, कि हम इन्हें आराम दे रहें हैं.

उसके बाद आस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए पहले 3 वनडे मैच के लिए भी दोनों दिग्गजों को टीम में जगह नहीं मिली, सीरीज के बीच में जडेजा को बुला लिया गया, क्योंकि अक्षर पटेल चोटिल हो गए थे, लेकिन फिर भी प्लेइंग इलेविन में शामिल नहीं किया गया.

अश्विन इस बीच इंग्लैंड में काउंटी क्रिकट खेलने का अनुभव ले रहे थे, तब उनका एक इंटरव्यू भी सामने आया था. जिसमें वो टीम इंडिया का हिस्सा ना होने की वजह से काफी निराश भी दिख रहे थे. कुछ समय पहले जडेजा ने भी ट्वीटर के माध्यम से अपना गुस्सा जाहिर किया था, हालांकि बाद में  बहुत जल्द ये ट्वीट हटा भी लिया था.

टी-20 में भी नहीं मिल रही जगह

रविन्द्र जडेजा – आर अश्विन दोनों कुछ महीने पहले टेस्ट और वनडे के साथ -साथ टी-20 के भी स्थायी खिलाड़ी थे, लेकिन अब इन दोनों को शॉर्ट फॉर्मेट में जगह बनाना मुश्किल हो रहा है. विंडीज के खिलाफ एकमात्र टी-20 वाली सीरीज के बाद से ही ये जोड़ी इस प्रारुप से गायब है.

आस्ट्रेलिया के खिलाफ भी तीन टी-20 मैचों की सीरीज के लिए टीम में इन दोनों को जगह नहीं मिल पाई, युवा स्पिनर युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और अक्षर पटेल पर ही सलेक्टर्स ने भरोसा दिलाया है.

अश्विन ने टी-20 करियर में 46 मैचों  में 6.97 की इकॉनमी से 52 विकेट झटके हैं,  तो वहीं जडेजा ने 40 मैचों में 7.27 की इकॉनमी से 31 विकेट अपने खाते में दर्ज किए हैं.

आखिर क्या है वजह ?

अश्विन -जडेजा की जोड़ी को आस्ट्रेलिया के खिलाफ टी -20 सीरीज में ना आजमाने की सबस बड़ी वजह है कुलदीप और चहल की जोड़ी का जबरदस्त प्रदर्शन,  ये दोनों ही रिस्ट स्पिनर्स हैं , जिन्होंने श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज से लेकर अब कंगारु टीम के सामने भी खुद को बेहतर साबित किया है.  इनके साथ ही अक्षर पटेल भी समय-समय पर अपनी छाप छोड़ते रहें हैं.

दूसरी वजह है अश्विन और जडेजा का टी-20 और वनडे में टेस्ट के अपेक्षाकृत फीका प्रदर्शन, पिछले कुछ सीमित ओवर्स के मुकाबलों में विपक्षी बल्लेबाजों को इन ऑफ ब्रेक और लेफ्ट ऑर्म स्पिनर्स के सामने हाथ खोलते देखा गया है, यानि कहीं ना कहीं बल्लेबाज इनकी फिरकी को समझने लगे हैं.

तीसरी  वजह टीम इंडिया के सलेक्टर एम एस के प्रसाद और टीम मैनेजमेंट द्वारा अपनायी गई रोटेशन नीति है,  जिसे वर्ल्डकप 2019 के मद्देनजर अपनाया जा रहा है. इस पद्धति के पक्षधर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली भी हैं. इस मेथर्ड के तहत  टीम में खिलाड़ियों में लगातार बदलाव किया जाता है.

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