Virat Kohli

कोरोना वायरस के बाद क्रिकेट की पटरी ट्रैक पर लौट आई है। लेकिन खिलाड़ियों का लंबे समय तक लगातार इस तरह बायो बबल में रहते हुए क्रिकेट खेलना आसान नहीं है। ऐसे में इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड रोटेशन पॉलिसी का इस्तेमाल करती है। भारतीय कप्तान विराट कोहली भी रोटेशन पॉलिसी को उपयुक्त मानते हैं। उनका मानना है कि बायोबबल में खिलाड़ियों को मानसिक थकान हो जाती है।

रोटेशन पॉलिसी है उपयुक्त

विराट कोहली

कोरोना वायरस के आने के बाद जितने भी क्रिकेट टूर्नामेंट्स या सीरीज खेली जा रही हैं, वह बायो सिक्योर वातावरण के अंदर ही खेला जा रहा है। इसके चलते खिलाड़ियों को मानसिक थकान हो जाती है, जिसके लिए कप्तान विराट कोहली को लगता है कि बायो बबल में रोटेशन पॉलिसी उपयुक्त है। कोहली ने कहा, ‘

‘बायो बबल में जिस तरह नियमों का पालन करना पड़ता है, उससे चीजें कभी कभी काफी नीरस हो जाती हैं और छोटी चीजों को लेकर खुद को उत्साहित रखना बेहद मुश्किल होता है।”

बीच-बीच में ब्रेक मिलना सही

भारतीय कप्तान विराट कोहली को मानना है कि खिलाड़ी किसी भी फॉर्मेट में ब्रेक ले सकता है, क्योंकि कोई भी इंसान पूरे साल होने वाले सारे मैच नहीं खेल सकता है। कोहली ने कहा,

”मुझे लगता है कि खेल का कोई भी प्रारूप ब्रेक के लिए सही है। कोई भी इंसान पूरे साल इतने सारे मैच नहीं खेल सकता। सभी को ब्रेक के लिए समय की जरूरत है।”

बेंच स्ट्रैंथ है कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण

विराट कोहली

किसी भी देश को यदि रोटेशन नीति को सफलतापूर्वक लागू करना है, तो उसके लिए मजबूत बेंच स्ट्रैंथ बेहद जरूरी है। विराट का मानना है कि रोटेशन के लिए हमारी बेंच स्ट्रैंथ कहीं अधिक महत्वपूर्ण उन्होंने कहा,

”हमारी बेंच स्ट्रैंथ कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर आपके पास ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनमें भूख है, जो तैयार हैं, जो समझते हैं कि खेल किस तरफ जा रहा है और उनमें मौकों का फायदा उठाने का साहस है तो फिर हम आसानी से खिलाड़ियों को रोटेट कर सकते हैं।”