विराट कोहली

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टी-20 मैचों की सीरीज खेली जा रही है, जिसके  4 मुकाबलों में भारतीय टीम दो मैच हारकर सीरीज में 2-2 से पीछे चल रही है। इस सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा हैं, बल्लेबाजों के इस खराब प्रदर्शन की वजह बल्लेबाज पूरी तरह से नहीं हैं, बल्की टीम इंडिया की प्लेइंग 11 ही कुछ इस तरह की रही है, जिसकी वजह टीम दो मैच हारी है।

ऊपर लिखी हुई बातें आपको कुछ चौंका सकती हैं, लेकिन तसल्ली से बैठिए हम आपको बताएंगे, कि कप्तान विराट कोहली ने प्लेइंग इलेवन को चुनते वक्त इस सीरीज में क्या झोल किया है, जिसकी वजह से टीम असंतुलित नजर आ रही है, और इसी की वजह खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरी  सामने आई है।

पुछल्ले बल्लेबाजों के भरोसे टीम इंडिया

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अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में चल रही भारत और इंग्लैंड के बीच टी-20 सीरीज में पिछले 4 मैचों के टीम इंडिया की प्लेइंग 11 को जरा एक बार सरसरी नज़र से देखिए, और खिलाड़ियों की ताकत और कमजोरी का आकलन कीजिए। फिर ये  भी सोचिए कि अगर टीम किसी फॉर्मेट में जीत रही है तो क्या उसकी कमियों को नजरअंदाज करना चाहिए? अगर किसी खिलाड़ी ने अपने तय रोल से कहीं आगे बढ़कर कोई खास प्रदर्शन किया है, तो क्या उसी पर निर्भर होकर रह जाना चाहिए?

बचपन में आपने वो कहानी जरूर सुनी होगी कि एक आदमी ने लालच के चक्कर में हर रोज सोने का एक अंडा देने वाली मुर्गी का पेट काट दिया था। कुछ ऐसी ही स्थिति इन दिनों भारतीय टीम की हो गई है। ऑस्ट्रेलिया में खेली गई टेस्ट सीरीज में वॉशिंगटन सुंदर और रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों ने बल्ले से जमकर योगदान दिया था।

बेहद असंतुलित है प्लेइंग इलेवन टीम इंडिया की

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ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद से ही कप्तान विराट कोहली को वो ही खिलाड़ी पंसद आ रह हैं जो बल्लेबाजी कर पाएं, वो चाहते हैं कि हर गेंदबाज रन बनाए, और इसकी वजह से भारतीय टीम का प्लेइंग 11 बेहद असंतुलित हो गया है। हालांकि इसी असंतुलित प्लेइंग 11 के भरोसे उन्हें टेस्ट सीरीज में जीत मिली इसलिए किसी ने उस वक्त सवाल नहीं किया।

लेकिन अब टी-20 फॉर्मेट में वही असंतुलन टीम को खल रहा है। हालांकि हो सकता कि आने वाले समय में विराट कोहली फिर इसी प्लेइंग 11  से जीत जाएं, लेकिन वो किसी एक-दो खिलाड़ी के ‘इंडिविजुल ब्रिलिएंस’ की जीत होगी न की पूरी टीम की जीत होगी।

जरूरत से ज्यादा बल्लेबाज खिलाने पर आमादा हैं कप्तान विराट कोहली

विराट कोहली

अहमदाबाद में खेली जा रही मौजूदा टी-20 सीरीज के पिछले तीन मैचों में खेली भारतीय टीम पर अगर हम सरसरी नजर डालेंगे, तो देखेंगे कि 4 मैच में युजवेंद्र चहल और भुवनेश्वर कुमार को छोड़ दें तो, 9 खिलाड़ी विराट कोहली ने ऐसे खिलाएं जो बल्लेबाजी भी कर सकते हैं। पहले मैच में अक्षर पटेल तक बल्लेबाजी थी, तो दूसरे और तीसरे मैच में वॉशिंगटन सुंदर तक बल्लेबाजी थी।

हालांकि हम कह सकते हैं, कि बतौर बल्लेबाज वॉशिंगटन सुंदर या अक्षर पटेल से कोई आपत्ति नहीं है। इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने काबिलियत के हिसाब से बेहतरीन प्रदर्शन किया है, और इन्हें आगे भी मौका मिलना चाहिए। लेकिन विराट कोहली को ये देखना होगा कि इन दोनों को वो किस तरह की रणनीति में अपनाते हैं।

हालांकि शार्दुल ठाकुर को भी टीम में बनाए रखने के पीछे विराट की सोच यही है, कि वो बल्लेबाजी भी कर लेते हैं। टी-20 में पांच में से तीन स्पेशलिस्ट गेंदबाज तो फिर भी मैच संभाल सकते हैं। लेकिन सिर्फ 2 स्पेशलिस्ट गेंदबाज और बाकी 3 ऐसे गेंदबाज जो बल्लेबाजी भी करते हैं, ये तालमेल नहीं चलेगा। ठाकुर भी इसलिय टीम में हैं, वरना बेहतर विकल्प नवदीप सैनी हो सकते हैं।

टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों की वजह है इसका कारण

विराट कोहली

मौजूदा वक्त में भारतीय टीम के पास टॉप ऑर्डर में दुनिया के सबसे आक्रामक और धमाकेदार बल्लेबाजों का पूरा स्क्वॉड मौजूद है, लेकिन कोरोना से मिली आंशिक राहत के बाद हुई क्रिकेट की बहाली में ये बात सामने आई है, कि ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज में भी भारतीय टीम के टॉप-4 बल्लेबाज संघर्ष कर रहे थे। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

कप्तान विराट कोहली खुद अपनी फॉर्म से संघर्ष कर रहे थे। ऑस्ट्रेलिया में तो उन्होंने एक टेस्ट मैच ही खेला था, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान उनसे पूरी सीरीज में रन नहीं बने। हालांकि चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसे भरोसेमंद बल्लेबाज भी अपनी काबिलियत के मुताबिक रन नहीं बना पाए।

निचले क्रम के बल्लेबाजों ने बचाई लाज

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लम्बें समय से लगातार टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के फ्लॉप होने के दरम्यान निचले क्रम में बल्लेबाजों ने टीम की लाज बचाई, निचले क्रम के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करके टीम को जीत दिलाई, तो विराट को उन पर कुछ ज्यादा ही भरोसा होने लगा। हालांकि परेशानी इस भरोसे से भी नहीं है, दरअसल परेशान टीम के संतुलन से है।

वॉशिंगटन सुंदर या शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ियों को तो ये भी नहीं पता होगा, कि उन्हें ज्यादा ध्यान अपनी गेंदबाजी पर देना है या बल्लेबाजी पर। क्योंकि टीम में उनकी जगह किससे बचेगी, उन्हें ये भी तो पता रहें। हार्दिक पांड्या भी चोट से वापसी के बाद टीम के लिए पांचवे गेंदबाज नहीं हो सकते। छठे गेंदबाज के तौर पर उन्हें जगह मिल सकती है, लेकिन दिक्कत ये है कि फिलहाल विराट कोहली को क्रिकेट की हर जंग जीतने के लिए सिर्फ बल्लेबाज चाहिए, गेंदबाज नहीं।