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दौलत,शौहरत और क्रिकेट का गहरा नाता है। क्रिकेट के दम पर तमाम लोगों ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है। देश में सबसे बड़े खेल आयोजनों की बात करें,तो क्रिकेट का नाम प्रमुखता से आता है। लेकिन इस चकाचौंध भरी दुनिया से इतर कई क्रिकेटर मुफलिसी और गुमनामी का जीवन जी रहे हैं।

बदहाली के इस दौर में उन्हें एक अदद नौकरी की तलाश है। ऐसे ही एक क्रिकेटर हैं,जिन्होंने दो देश को दो विश्वकप जीताने में अहम योगदान दिया है। लेकिन वो आज एक नौकरी और मदद के लिए सरकारी चौखटों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर  हैं। आइए जानते हैं तंगहाली में जीवन जीने वाले इस क्रिकेटर के बारे में…

दो बार विश्वकप जीताने में रहा योगदान

This player who won the Cricket World Cup twice is craving for bread

जी हां हम बात कर रहे हैं भारतीय दृष्टिहीन क्रिकेट टीम के कप्तान शेखर नायक की । शेखर नायक ने 2012 में देश को टी-20 विश्वकप और 2014 में क्रिकेट विश्वकप का खिताब जीता चुके हैं।  क्रिकेटर शेखर नायक पद्मश्री से सम्मानित भी है। 13 साल तक देश के लिए खेलने वाले शेखर नायक को आज एक नौकरी की तलाश के लिए सरकारी चौखटों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं,लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

कर्नाटक में जन्में शेखर नायक

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क्रिकेटर शेखर नायक का जन्म 7 अप्रैल 1986 को कर्नाटक के शिमोगा नामक स्थान पर हुआ। शेखर की आंखों में रोशनी बचपन से नहीं थी। इसके बाद भी वो शारदा देवी ब्लाइंड स्कूल में पढ़ते समय क्रिकेट के गुर सीखे।

बचपन में ही गुजर गए माता-पिता

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शेखर नायक के माता-पिता बचपन में गुजर गए थे। शेखर के पिता का देहांत पहले हो गया था। 1998 में उनकी माता जी का भी देहावासन हो गया। इसके बाद शेखर बिल्कुल अकेले पड़ गए,क्योंकि उनके कोई भाई बहन नहीं थी। हालांकि इसके बाद शेखर का सहारा उनकी मौसी बनी।

मौसी के सहारे के चलते शेखर ने स्कूल में क्रिकेट सीखा। साल 2000 में शेखर का चयन कर्नाटक की स्टेट टीम में हो गया। 2002 में वो भारतीय टीम का हिस्सा बन गए और उन्हें विश्वकप खेलने का मौका मिला। इसके बाद इन्हें टीम की कप्तानी सौंप दी गई।

कप्तानी में देश को मिले दो विश्वकप

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शेखर नायक की कप्तानी में भारत को दो विश्वकप जीतने का गौरव हासिल है। साल 2012 में बेंगलुरू में हुए टी-20 विश्वकप के मुकाबले में भारतीय ब्लाइंड क्रिकेट टीम ने शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में हुए एक दिवसीय वर्ल्डकप में भी भारतीय टीम ने जीत दर्ज की थी। विश्वकप के अगले साल ही शेखर टीम से अलग हो गए। इस समय उनकी आयु 30 वर्ष थी। तीन साल बाद वो तंगहाली का जीवन जी रहे है,इसी को लेकर अब वो सरकारी मदद की आस में लगे हुए हैं।

सांसदों और विधायकों से लगाई मदद की गुहार

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेखर नायक ने कई सांसदों और विधायकों से सरकारी मदद और नौकरी की मांग की है। लेकिन अभी तक आश्वासन के सिवा कुछ भी नहीं मिला है। शेखर का कहना कि लोग मेरी तारीफ करते हैं, तो मुझे अच्छा लगता है,लेकिन जब मैं अपने परिवार में वापस जाता हूं,तो पत्नी और दोनों बेटियों की चिंता सताने लगती है। सरकार से हमारी गुजारिश हैं कि हमारी योग्यता के अनुसार हमें नौकरी दी जाए। बता दें कि शेखर नायक की दो बेटियां हैं । बड़ी बेटी पुर्विका सात साल की हैं और दूसरी बेटी सान्विका 2 साल की है।

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