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निस्वार्थ और क्रिकेट इन शब्दों को एक ही वाक्य में सुनकर कई दिग्गज खिलाड़ियों की छवि आपके मस्तिष्क में उभर जाती होगी. क्रिकेट में आज आपसी कॉम्पीटिशन बहुत बढ़ गया है. खेलों में इस तरह के मौके अक्सर देखने को मिलते हैं. जब दोनों तरफ से खेल भावना पराजित होती दिखाई पड़ती है.

लेकिन इसके साथ ही क्रिकेट में कुछ ऐसे अवसर भी आते हैं. जब खिलाड़ी खेल भावना को अपनी निजी परफॉर्मेंस से भी ज्यादा अहमियत देते हैं. देश के लिए कुछ कर गुजरने का सपना हर इंसान का होता है. क्रिकेटर भी चाहते हैं कि अपने देश के लिए वह कुछ ऐसा करें जिससे देश में उनका नाम हो.

क्रिकेट इतिहास में अनेक ऐसे अवसर आए जब निस्वार्थ पूर्ण खेल से खिलाड़ियों ने सभी के दिल जीत लिए. यहां हम क्रिकेट के ऐसे ही कुछ निस्वार्थ अवसरों का जिक्र कर रहे हैं. इसी कारण आज हम आपको दिग्गज क्रिकेटरों की उन 5 निस्वार्थ पारियों के बारे में बताएँगे. जिन्हें शायद बहुत से लोगों ने भुला दिया है.

5. रोबिन उथप्पा ने रोहित को दिया मौका

13 नवंबर 2014 को रोहित शर्मा ने वन डे क्रिकेट के इतिहास में असंभव से दिखने वाले 250 रनों के स्कोर को पार कर दिया. उन्होंने 264 रनों की पारी खेली. यह वनडे क्रिकेट का सर्वाधिक निजी स्कोर भी है. रोहित शर्मा को इस शानदार पारी का श्रेय दिया ही जाना चाहिए. लेकिन यदि कर्नाटक के विकेटकीपर बल्लेबाज रोहिन उथप्पा ने उन्हें अधिकांश गेंदें खेलने का मौका न दिया होता तो यह रिकॉर्ड न बनता.

दरअसल उथप्पा 41वें ओवर में वह क्रीज पर आए. आपको बता दें कि लम्बे समय बाद वापसी करने वाले उथप्पा टीम में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें भी जल्दी रन बनाकर टीम में अपनी जगह पुख्ता करनी था, लेकिन उन्होंने निस्वार्थ भाव से खेल दिखाया. उस समय टीम इंडिया का स्कोर 4 विकेट पर 276 रन था. रोहित शर्मा दूसरी छोर जबरजस्त लय में दिखाई दे रहे थे. उथप्पा के आने के बाद रोहित ने 43 गेंदों पर 91 रन बनाए.

इस दौरान उथप्पा ने केवल 16 गेंदें खेलीं. इसका सबसे बड़ा कारण यह था की उथप्पा रोहित को लगातार सिंगल लेकर स्ट्राइक दे रहे थे. रोहित ने इसी वजह से 264 रन बनाने में सफल रहे. वहीँ उथप्पा केवल 16 रन बनाकर नाबाद रहे. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि रोहित इस माइलस्टोन को हासिल कर सकें. भारत ने इस मैच में 4 विकेट पर 404 रन बनाए. उथप्पा की यह पारी बड़े ही निस्वार्थ भाव से खेली गयी थी.

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Ashutosh Tripathi

मैं एक पत्रकार हूँ. पत्रकार ना तो आस्तिक होता है और ना तो नास्तिक होता है बल्कि...