इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का ग्यारहवा संसकरण महज कुछ दिनों बाद शुरू होने वाला है. उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. आईपीएल ऐसा नाम है जिसे सुनने ही फैन्स उत्साहित हो जाते हैं. मैच के दौरान हर क्रिकेटप्रेमी अपनी-अपनी टीम को लेकर उत्साहित रहता है. सीजन शुरू होने से पहले अभी से ही कयास लगाया जाने लगा है कि इस बार विजेता कौन सी टीम होगी. हर टीम के खिलाड़ी की काबिलियत को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है. वैसे तो क्रिकेट अनिश्चिताओं का खेल है, इसमें पहले से कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन फिर भी कभी कधार उम्मीद सही निकल जाते हैं.

इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स फिर से गुजरात लायंस व पुणे वारियर्स की जगह दो सालों बाद वापसी कर रही हैं. चेन्नई ने हर सीजन में शानदार खेल दिखाया है. दो सीजन तो चेन्नई ने ख़िताब पर कब्ज़ा भी जमाया है. ऐसे में इस सीजन चेन्नई से फैन्स को काफी उम्मीदें हैं लेकिन कुछ चीज़ों को देख लगता है कि इस बार चेन्नई खिताब जीतने से कही दूर रहेगी.

आइये जानते है किस वजह से चेन्नई इस सीजन कमजोर लग रही है, क्या है चेन्नई की परेशानी:

कप्तान धोनी का गिरता स्ट्राइक रेट

टीम की कमान संभाल रहे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का गिरता स्ट्राइक रेट चेन्नई के लिए चिंता का कारण है. बता दें, धोनी ने 2017 आईपीएल में 115 की ख़राब स्ट्राइक रेट से रन बनाये है जो टी-20 में किसी लिहाज से ठीक नहीं कहा जा सकता. इससे पहले धोनी ने आईपीएल 2013 और 2014 में 163 व 149 की स्ट्राइक रेट से रन बनाये थे. वहीं 2017 आईपीएल में धोनी ने 16 मैचों में मात्र 31 बार गेंद को सीमा रेखा के बाहर पहुंचाया था. जिसमें 16 छक्के व 15 चौके लगाये थे.

अनुभवी भारतीय गेंदबाज का न होना

आईपीएल में भारतीय गेंदबाजों का दबदबा हर बार देखने को मिलता है. वैसे भी आईपीएल में महज बल्लेबाजी से ख़िताब पर कब्ज़ा नहीं जमाया जा सकता. पिछले सीजन में हमने देखा है कि भारतीय गेंदबाज जैसे जसप्रीत बुमराह, भुनेश्वर कुमार, उमेश यादव, मोहित शर्मा ने खासा बल्लेबाजों को परेशान किया था. इस बार की चेन्नई टीम को देखें तो भारतीय पेसर के रूप में केवल एक नाम, शार्दूल ठाकुर का. इनके पास भी कुछ ही अंतराष्ट्रीय मैचों का अनुभव है ऐसे में आप महज एक गेंदबाज से टूर्नामेंट नहीं जीत सकते.

जरुरत से ज्यादा स्पिनर

क्रिकेट के इस प्रारूप में पेसर व स्पिनर दोनों की भूमिका अहम हो जाती है. ब्रेक थ्रू के लिए कप्तान के पास पर्याप्त आप्शन होना चाहिए. अब इस बार की चेन्नई टीम को देखे स्पिनरों पर टीम मैनेजमेंट ने कुछ ज्यादा ही भरोसा दिखाया है. जैसे रविन्द्र जडेजा, इमरान ताहिर, करण शर्मा, मिशेल सैंटनर, व हरभजन सिंह जैसे दिग्गज स्पिनर तो इस टीम में हैं लेकिन तेज़ गेंदबाज के नाम पर कोई ऐसा नहीं है जिसके बूते मैच जीता जा सके. जो विकेट स्पिनर के लिए मददगार नहीं होगी वहां चेन्नई के लिए मुश्किलें बढ़ जायेंगी.

रहस्यमयी खिलाड़ी का न होना

टी-20 गेम में चीज़े इतनी तेज़ी से बदलती हैं कि समझने से पहले मैच हाथ से निकल जाता है. इस गेम के लिए कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने बलबूते मैच का रुख बदलने का दम रखते हैं. जैसे गेंदबाजी में सुनील नरेन, लसिथ मलिंगा या राशिद खान को ले लीजिये या फिर बल्लेबाजी में डेविड वार्नर, क्रिस गेल या ग्लेन मेक्सवेल जैसे बल्लेबाज. इस तरह का कोई भी खिलाड़ी चेन्नई में नहीं है जिससे किसी भी मैच में चमत्कार की उम्मीद नहीं की जा सकती.

चेन्नई सुपर किंग की टीम
केदार जाधव , हरभजन सिंह ,कर्ण शर्मा ,अंबाति रायडू , इमरान ताहिर ,फाफ डू प्लेसिस ,शार्दुल ठाकुर ,ड्वेन ब्रावो ,शेन वॉटसन ,रवींद्र जडेजा , महेंद्र सिंह धोनी ,सुरेश रैना, मुरली विजय, सैम बिलिंग्स ,जगदीशान नारायण ,ध्रुव शौरे ,चैतन्य बिश्नोई ,मार्क वुड लुंगी नगिडी ,दीपक चाहर, मोनू कुमार,आसिफ केएम ,कनिष्क सेठ, मिचेल सैंटनर, क्षितिज शर्मा.

Anurag Singh

लिखने, पढ़ने, सिखने का कीड़ा. Journalist, Writer, Blogger,

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