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Team India को 4 अगस्त से इंग्लैंड क्रिकेट टीम के साथ उसी के घर पर 5 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। ये बात किसी से छिपी नहीं है कि इंग्लैंड की मुश्किल परिस्थितियों में भारतीय टीम का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ही खराब रहा है, 2007 में राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड में 1-0 से सीरीज जीती थी। वहीं पिछले 10 टेस्ट में भारत सिर्फ दो जीत पाया है, जबकि 7 में से हार का सामना करना पड़ा है। अब यदि आप आंकड़ों पर गौर करें, तो इन सभी हार का बड़ा कारण रही है भारत की ओपनिंग जोड़ी।

इंग्लैंड में फ्लॉप हो जाते हैं भारतीय ओपनर्स

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क्रिकेट की एक पुरानी कहावत है कि इंग्लैंड में जिसने खेल लिया, वह किसी भी मैदान पर प्रदर्शन कर सकता है। ये बात सच भी है क्योंकि इंग्लैंड की मुश्किल परिस्थितियों में जिसका बल्ला बोला, वो फिर कहीं नहीं रुकता। लेकिन पिछले 20 सालों से भारत के सलामी बल्लेबाज लगातार इंग्लैंड में फ्लॉप हो रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी, मगर इसमें बड़े-बड़े नाम शामिल हैं, जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

राहुल द्रविड़, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, शिखर धवन, दिनेश कार्तिक, संजय बांगर, वसीम जाफर, अभिनव मुकुंद, मुरली विजय और केएल राहुल शामिल हैं। ये सभी बल्लेबाज इंग्लैंड में Team India के लिए ओपनिंग कर चुके हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं आ सकी।

2007 में ओपनिंग जोड़ी ने दी थी अच्छी शुरुआत

भारत ने पिछली बार 2007 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टेस्ट सीरीज में 1-0 से जीत दर्ज की थी। उस सीरीज में दूसरा मैच भारत ने 7 विकेट से जीतकर अपने नाम किया था। मैच में भारत की सलामी जोड़ी ने ही जीत में सबसे बड़ा योगदान दिया था। अब जाहिर है कि जब फ्लॉप हो रही ओपनिंग जोड़ियां हार की वजह हो सकती हैं, तो यदि वही ओपनिंग जोड़ी हिट हो जाए, तो मैच जिता सकती है।

ऐसा ही कुछ 2007 दौरे पर नॉर्टिंघम टेस्ट में हुआ। जब वसीम जाफर (62) व दिनेश कार्तिक (77) ने पहली पारी में 147 रनों कर भारत को अच्छी शुरुआत दी और फिर तो बल्लेबाजों ने बड़ी-बड़ी पारियां खेली और भारत कमांडिंग कंडीशन में आ गया और आखिर में 7 विकेट से जीत दर्ज कर ली।

बात कुछ ऐसी है कि यदि ओपनर्स क्रीज पर सेट होकर कुछ घंटे निकाल देते हैं, तो बाकी बल्लेबाजों के लिए खेल कुछ हद तक आसान हो जाता है। इस सीरीज की खास बात ये थी कि कप्तान द्रविड़ और टीम मैनेजमेंट ने ओपनिंग जोड़ी से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। कार्तिक और जाफर ही तीनों टेस्ट में बतौर ओपनर मैदान पर उतरे।

जीत चाहिए तो ओपनर्स को करना होगा कमाल

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2007 के बाद Team India की कोई ओपनिंग जोड़ी इंग्लैंड में टीम को मजबूत शुरुआत देने में कामयाब नहीं रही। 2011, 2014 व 2018 सभी दौरों पर भारत शिकस्त झेलकर घर लौटा, क्योंकि ओपनिंग जोड़ी में लगातार बदलाव किए गए। पिछले दौरे को याद करें, तो 2018 में भी भारत इसी समस्या से जूंझता नजर आया। तब भारतीय ओपनर्स ने 10 पारियों में 23.70 की औसत से 237 रन बनाए थे।

अब ये तो साफ है कि यदि इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीतनी है, तो उसके लिए भारत की ओपनिंग जोड़़ी को कुछ कमाल करना होगा। बता दें, इस वक्त भारत की ओपनिंग जोड़ी को लेकर काफी चर्चा चल रही है। शुभमन गिल के चोटिल होने केबाद अब रोहित शर्मा के साथ दूसरे ओपनर के नाम के लिए मंथन जारी है, जिसमें मयंक अग्रवाल, केएल राहुल, हनुमा विहारी व स्टैंडबाई प्लेयर अभिमन्यू ईश्वरन के विकल्प मौजूद हैं।