कांग्रेस पार्टी के दिग्गज राजनेता शशि थरूर कुछ समय पहले पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से ख़ासा राज थे. वो क्या कारण था इसका खुलासा खुद इस दिग्गज नेता ने किया है. इस दौरान थरूर ने न केवल धोनी बल्कि पूर्व भारतीय दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का भी नाम लिया. दरअसल थरूर ने कारण का खुलासा करते हुए बताया कि वो डीआरएस को लेकर धोनी तथा सचिन से नाराज थे.

डीआरएस को लेकर धोनी तथा सचिन से नाराज थे शशि थरूर

आपको बता दने कि शशि थरूर सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी से तब बहुत निराश हुए थे जब इन दोनों ने डीआरएस लागू करने के प्रति रूचि नहीं दिखाई थी. थरूर  ने स्पोर्टसकीड़ा के फेसबुक पेज पर इस बात का खुलासा करते हुए कहा कि वह शुरू से ही डीआरएस के फैन हैं और भारत को इसे इस्तेमाल करने पर शुरू में ही राजी हो जाना चाहिए था. इसी विषय पर बोलते हुए थरूर ने कहा,

“मैं तकनीक का बहुत बड़ा फैन हूं. मैं शुरू से ही डीआरएस की वकालत करता हूं. और जब धोनी और तेंडुलकर ने इसे मानने से इनकार किया तो मैं काफी नाराज था. मैं क्रिकेट देखता हूं हर बार मैंने देखा है कि खराब अंपायरिंग फैसलों का हमें कितना नुकसान हुआ है. मुझे समझ नहीं आया था कि हम डीआरएस से इतना परहेज क्यों कर रहे थे.”

मोटिवेशनल कप्तान नहीं थे सचिन तेंदुलकर

कांग्रेस के इस सांसद ने सचिन तेंदुलकर को नॉन मोटिवेशनल कप्तान बताया है. इस दौरान थरूर ने सचिन की कप्तानी की बारीकियों पर बात की. सचिन की कप्तानी पर थरूर ने कहा,

‘सचिन के कप्तान बनने से पहले मुझे लगता था कि वह एक बेहतर कप्तान साबित होंगे, लेकिन उनकी कप्तानी सफल नहीं रही. दरअसल, जब वे कप्तान नहीं थे तो काफी एक्टिव थे. वे स्लिप में फील्डिंग करते थे. कप्तान को सलाह भी देते थे. उसका हौसला बढ़ाते थे। मैंने सोचा कि इस खिलाड़ी को कप्तान बनना चाहिए. हालांकि, जब वे कप्तान बने तो चीजें उनके पक्ष में नहीं गईं. उनके पास ज्यादा मजबूत भारतीय टीम नहीं थीं. सचिन खुद भी इस बात को स्वीकार करेंगे कि वह ज्यादा प्रेरणायादक और मोटिवेशनल कप्तान नहीं थे’

थरूर ने बताई डीआरएस की खूबी

थरूर ने जोर देकर कहा कि तकनीक कितनी गलतियों को रोकती है इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट भविष्य में कभी डीआरएस के बिना नहीं खेला जाएगा. इस पर विस्तार से बोलते हुए उन्होंने कहा,

“डीआरएस कितनी गलतियों को रोकता है और यह टीवी पर देखने वाले के लिए एक अलग स्तर का रोमांच पैदा करता है. और जहां तक मुझे लगता है कि यह एक अलग मसाले की तरह काम करता है.”

आपको बता दें कि भारत डीआरएस को इस्तेमाल करने वाले शुरुआती देशों में था. श्रीलंका के खिलाफ 2008 में इसका इस्तेमाल किया गया था. लेकिन भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इसके हक में नजर नहीं आए थे. वह इस तकनीक में कई खामियां मानते थे. पिछले दशक में जाकर ही भारतीय टीम ने इसे पूरी तरह अपनाना शुरू किया.