Sanjay Bangar

टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पंत का प्रदर्शन सब देख चुके हैं, वही विश्व कप में भी उनको नंबर 4 पर उतार कर देखा गया था, जहाँ उन्होंने कुछ ख़ास प्रदर्शन नहीं दिया. अब पूर्व बल्लेबाजी कोच संजय बांगर ने पन्त के प्रदर्शन को लेकर अपनी राय दी है, जिसमे उन्होंने बताया कि वनडे क्रिकेट को समझने में अभी पन्त को कुछ समय लगेगा.

ऋषभ पंत को वनडे क्रिकेट को समझने में लगेगा समय 

ऋषभ पंत

ऋषभ पन्त को भारतीय टीम में महेंद्र सिंह धोनी का उतराधिकारी माना जाता है, क्योंकि यह भी धोनी की तरह ही टीम के लिए बल्लेबाजी और विकेटकीपरिंग करते हैं. लेकिन विश्व कप के समय से इस युवा खिलाड़ी को अपने खराब शॉट सिलेक्शन के कारण आलोचना का सामना करना पड़ा था.

इसके बाद भी भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाजी कोच संजय को लगता है कि वह टेस्ट क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते हैं लेकिन एकदिवसीय क्रिकेट को समझने में उनको अभी समय लगेगा. इसके साथ ही उनका मानना है कि समय के साथ पन्त एकदिवसीय क्रिकेट में भी खुद को साबित करेंगे.

संजय बांगड़ ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में कहा कि,

”टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पन्त सबकी अपेक्षाओं पर खरे उतरे है, लेकिन पन्त को वनडे क्रिकेट में अपने खेल को समझने में समय लगेगा, जहां पर उसको हवाई शॉट पर नियंत्रण रखना होगा. कई बार मध्य क्रम बल्लेबाजों को हालात और टीम की जरूरत के हिसाब से खेलना होता है. हमने इस बात पर काम किया कि वो कैसे शुरुआत में मैदान पर टिक कर खेल सकते है और स्ट्राइक रोटेट कर सकते है.”

विराट, रोहित और धवन की बल्लेबाजी तकनीक पर की चर्चा 

ऋषभ पंत

पंत के बाद संजय ने और तीन दिग्गज खिलाडियों के प्रदर्शन के बारे में भी बात की और उनके साथ अपने अनुभव साझा किये. इसमें उन्होंने उन तीन खिलाडियों की बल्लेबाजी तकनीकी के बारे में बताया,

संजय ने कहा कि,

”रोहित को पहले दायें और बाएं से आने वाली गेंदों की दिक्कत थी, इस तरह की गेंदो के खिलाफ खेलने की परेशानी को हल करने के लिए हमने लगातार प्रैक्टिस की इसके बाद हमने पुजारा की भी कई कमियों को हटाने के लिए काम किया जैसे उसके स्टांस की चौड़ाई कम करने पर काम किया. इसका श्रेय उन्हें जाता है क्योंकि उन्होंने पुराने तरीकों को भुलाने और नए तरीकों को सीखने के लिए कड़ी मेहनत की.”

विराट और धवन के लिए संजय ने कहा कि,

”विराट एक ऐसे खिलाडी हैं, जो खुद अपनी कमी दूर करने की कोशिश करते हैं. हमने क्रीज पर उसके पोजीशन, सीम वाले हालातों में उसके अप्रोच पर काम किया. वही शिखर शुरुआत में ऑफ साइड के खिलाड़ी थे, वो गेंद की लाइन की सीध में रहता था. हमने उसके गेंद के पीछे आने और स्कोरिंग एरिया बढ़ाने और शॉर्ट गेंद के खिलाफ आउट होने की समस्या से उबरने पर काम किया.”

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