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18 जनवरी 1998, बंगबंधु नेशनल स्टेडियम, ढाका। मुकाबला भारत बनाम पाकिस्तान। 48 ओवर का खेल। भारतीय कप्तान मोहम्मद अजरूद्दीन टॉस जीतते हैं और पहले गेंदबाजी करने का फैसला लेते हैं। इस मैच में भारत की ओर से राहुल संघवी अपना डेब्यू कर रहे थे (मैच के बाद सोच रहे होंगे किसी और मैच में करा लेना था डेब्यू) खैर, हरविंदर सिंह जल्द ही शाहिद अफरीदी और सोहेल को चलता कर देते हैं। बस…..भारतीय गेंदबाजों की इस पारी में एकमात्र सफलता यही थी।

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इसके बाद बल्लेबाजी करने आते हैं इजाज़ अहमद और शुरू होती है भारतीय गेंदबाजों की ऐसी सुताई कि पूछिए मत। अनवर 132 गेंद में 140 रन 14 चौक्कें, 2 छक्के 106.06 के स्ट्राइक रेट के साथ। इनका साथ दे रहे इजाज़ 113 गेंद में 117 रन 8 चौक्कें 1 छक्का 104.46 के स्ट्राइक रेट के साथ। दोनों बल्लेबाज खूंटा गाड़ के खेल रहे थे। भारतीय गेंदबाजों की हालत ख़राबहो गई थी। वो केवल फेंकते जा रहे थे।

जवागल श्रीनाथ 10 ओवर 61 रन, हरविंदर सिंह 10 ओवर में 74 रन और पहला मैच खेल रहे राहुल संघवी 5 ओवर में 38 रन। पाकिस्तान 48 ओवर में 314 रन 5 विकेट के नुकसान पर। उस समय ये पहाड़ जैसे स्कोर की सूची में आता था।

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इसके बाद भारतीय सलामी बल्लेबाज सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर आते ही पाकिस्तानी गेंदबाजों की कुटाई शुरू कर दी। सचिन तेंदुलकर 26 गेंद में 41 रन 7 चौक्का और एक छक्का। तेंदुलकर पूरी लय में नजर आ रहे थे लेकिन जल्द ही अफरीदी ने उनको आउट कर दिया। यहां अजरुद्दीन ने सबको चौंकाते हुए नंबर तीन पर रॉबिन सिंह को बल्लेबाजी करने भेजा और फिर इन दोनों ने मिलकर पाकिस्तानी गेंदबाजों को छठी का दूध याद दिला दिया।

दादा तो एकदम अलग ही रंग में थे। 138 गेंद में 124 रन 11 चौक्का और 1 छक्का। रॉबिन सिंह को पाकिस्तानी फिल्डरों ने कई मौके दिएं। उन्होंने भी मिले मौकों को भूनाया और 83 गेंद में 82 रन जड़ दिए। 4 चौक्के और 2 छक्के के मदद से। दादा और रॉबिन मैच को भारत के पक्ष में खींच कर ले आए थे। लेकिन इनके आउट होने के बाद भारत का मध्यक्रम ड्रेसिंग रूम में बैठने को बेकरार था।

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अजरूद्दीन, जडेजा, सिद्धू और नयन मोंगिया ने मिलकर 26 रन ही बनाए। वो तो भला हो हमारे पुछल्ले बल्लेबाजों का जिन्होंने छोटे-छोटे योगदान से भारत को मैच और फाइनल दोनों जीता दिया। दादा की वो पारी मेरे लिए उनकी बेहतरीन पारियों में से एक है। ये ऐसा मैच था जिसमें सचिन तेंदुलकर के आउट होने के बाद भी लोगों ने अपने टीवी और रेडियो बंद नहीं किए थे।

written by

– adarsh kumar