क्रिकेट में भगवान की तरह पूजे जाने वाले सचिन तेंदुलकर खुद में ही एक बड़ा नाम हैं। जिन्हेंं सुनते ही हाथ में तूफानी बल्ला लिए क्रिकेटर याद आता है जो लाल बॉल और सफेद बॉल दोनों में ही अपने नाम का लोहा मनवा चुके हैं। लेकिन अगर हम आपको बताएं कि इस दिग्गज खिलाड़ी को भी अपने शुरूआती दिनों में ओपनिंग करने के लिए काफी मनऊव्वत करनी पड़ी थी, तो आपको यकीन होगा?

मैं नाकाम हुआ तो दोबारा नहीं आऊंगा

सचिन तेंदुलकर उन खिलाड़ियों में आते हैं जिन्हें देखकर ढेरों क्रिकेटरों ने क्रिकेट खेलना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वह शुरूआती दिनों में अलग सोच के साथ मैदान पर उतरे थे। तेंदुलकर ने अपने लिंकडिन अकाउंट पर न्यूडीलैंड के उस दौरे को याद करते हुए एक वीडियो शेयर कर बताया,

“1994 में जब मैंने भारत के लिए बल्‍लेबाजी शुरू की थी तब सभी टीमों की रणनीति विकेट बचाना थी। मैंने अलग हटकर सोचने का प्रयास किया। मैंने सोचा कि मैं ऊपर जाकर विपक्षी गेंदबाजों पर हमला करूं। लेकिन मुझे इस मौके लिए गिड़गिड़ाना पड़ा। मैंने कहा यदि मैं नाकाम हो गया दोबारा आपके पास नहीं आऊंगा।“

हार से कभी मत डरना: सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल ओपनर में से एक सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट के शुरूआती दिनों में मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी की थी लेकिन वहां सफलता हाथ नहीं आई। सचिन का मानना है कि नामाम होने से कभी घबराना नहीं चाहिए। इस बारे में उन्होंने कहा

“पहले मैच (ऑकलैंड में न्‍यूजीलैंड के खिलाफ) में मैंने 49 गेंद में 82 रन बनाए इसलिए मुझे दोबारा मौका दिए जाने के बारे में पूछने की जरूरत नहीं पड़ी। वे मुझसे ओपनिंग कराने को तैयार थे। मैं यह कहना चाहता हूं कि नाकाम होने से मत घबराओ।“

सचिन के नाम हैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक

जब भी किसी रिकॉर्ड की बात होती है तो सचिन तेंदुलकर लिस्ट में टॉप पर ही विराजमान नजर आते हैं। उन्होंने अपने दिनों में क्रिकेट की दुनिया में अपने नाम का लोहा मनवाया साथ ही भारतीय क्रिकेट की तस्वीर बदलने का श्रेय भी दिग्गज को ही जाता है। आपको बता दें, तेंदुलकर ने जब क्रिकेट को अलविदा कहा तब उनके खाते में कुल 100 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज थे।

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