Sachin Tendulkar Tension

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) के नाम आज सैकड़ों बड़े रिकॉर्ड्स दर्ज हैं। मगर एक वक्त था जब सचिन भी मानसिक दबाव में रहते थे। हालांकि पहले के वक्त में खिलाड़ी अपने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत नहीं करते थे, लेकिन अब बड़े-बड़े खिलाड़ी इसपर बात कर रहे हैं। इसी क्रम में तेंदुलकर ने भी खुलासा किया है कि वह अपने खेल के दिनों में 10-12 सालों तक सो नहीं पाते थे।

Sachin Tendulkar ने की मानसिक स्वास्थ्य पर बात

Sachin Tendulkar

दुनियाभर में खेलने वाले एथलीट्स को शारीरिक रूप से फिट होना तो आवश्यक होता ही है, मगर मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही अहम है, जितना शारीरिक। मगर आम तौर पर लोग इसे नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब खिलाड़ी इसपर खुलकर बात करते हैं। इसी क्रम में Sachin Tendulkar ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा,

‘मेरे करियर के 10 से 12 सालों के दौरान मैं मैच से पहले सो नहीं पाता था। मैं बिस्तर पर सो नहीं पाता था और करवटें बदलता रहता। मैं मैच के बारे में सोचता रहता था। एक दशक के बाद मुझे एहसास हुआ कि शायद मैं इसी तरह मैच के लिए तैयार होता हूं। मैंने उस हालात से लड़ना बंद कर दिया। मैं मैच से पहले टीवी देखता था। मैं वो सब करता था जो मुझे मैच में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए मदद करता था।’

खेल के बारे में नहीं सोचता था

Sachin Tendulkar दुनियाभर के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। मगर इस मुकाम पर पहुंचने के लिए तेंदुलकर ने मानसिक तैयारी भी की। जिसके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा,

“ये शारीरिक ही नहीं मानसिक तैयारी भी होती थी। मैं कोशिश करता था कि मैं मानसिक तौर पर शांत रहूं और ये ना सोचूं कि मैं अगले दिन कैसे खेलूंगा। कुछ समय में मैंने अपने बारे में काफी कुछ सीखा। मैं उन हालातों से निपटना सीखा जिसने मेरी काफी मदद की।”

खुद की उम्मीदों पर ध्यान देने का लिया फैसला

Sachin Tendulkar

जब एक खिलाड़ी मैदान पर होता है, तो उससे तमाम फैंस बड़ी-बड़ी उम्मीदें करते हैं। ऐसा ना होने पर ना केवल खिलाड़ी बल्कि फैंस भी निराश होते हैं। ऐसे में सचिन तेंदुलकर ने बताया है कि उन्होंने लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के बजाए अपनी उम्मीदों पर खरे उतरने का रास्ता चुना। Sachin Tendulkar ने आगे कहा,

“एक चीज थी कि मैं लोगों की उम्मीदों के बारे में सोचूं या फिर अपनी खुद से की गई अपेक्षाओं पर ध्यान दूं। मैंने खुद की उम्मीदों पर ही ध्यान देने का फैसला किया क्योंकि लोग नहीं जानते थे कि मेरे दिमाग में क्या चल रहा है. मैं किस दबाव में हूं। मैंने खुद को हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह झोंका।”