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बात 22 अगस्त 2002 की है, जब भारतीय टीम चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने इंग्लैंड गई हुई थी। सीरीज का पहला मैच इंग्लैंड के नाम रहा था और दूसरा ड्रा हो गया था। इसके बाद तीसरा टेस्ट मैच लीड्स के मैदान पर अच्छी खासी ठण्ड में शुरू हुआ। इस मैच में कुछ ऐसा हुआ जिसे सिर्फ 90 के दशक के लोगों ने ही देखा होगा।

 भारतीय क्रिकेट इतिहास का ऐसा कारनामा जो फिर कभी नहीं दोहराया जा सका। जी हां, इस मैच में मास्टर ब्लास्टर Sachin Tendulkar, द वाल Rahul Dravid और पूर्व भारतीय कप्तान Saurav Ganguli, इस दिग्गज तिकड़ी ने पहली बार एक ही मैच में शानदार शतक लगाया। हालांकि तेंदुलकर सिर्फ 7 रन से दोहरा शतक लगाने से चूक गए थे।

Sachin, द्रविड़ और गांगुली, त्रिमूर्ति ने लगाया शतक

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यह वो दौर था जब Sachin Tendulkar अपने पूरे शबाब पर थे। टेस्ट मैचों में 29 शतक लगा चुके थे। उस समय कुछ ऐसा हाल था कि कुछ क्रिकेट दिग्गज और प्रशंसकों का कहना था कि सचिन इतने रन बनाते हैं कि अब बोर हो गए हैंगांगुली शार्ट पिच गेंदें नहीं खेल पाते हैं और राहुल द्रविड़ अपने ही अन्दर कॉम्प्लेक्स हुए घूम रहे हैं लेकिन, 22 अगस्त 2002 के दिन ये सभी बातें झूठी साबित हुईं। मैच के दौरान सबसे शानदार समय तब आया, जब अम्पायर ने बल्लेबाजी कर रहे गांगुली को बैड लाइट की दुहाई देते हुए खेल रोकने को कहा, लेकिन गांगुली ने साफ मना कर दिया।

 इन तीनों ही खिलाड़ियों ने ऐसी बल्लेबाजी की जैसे गेंदबाजों को आईना दिखा रहे हों। मैच में कप्तान सौरव गांगुली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। इसके बाद सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग सिर्फ 8 रन पर ही पवेलियां लौट गए। इसके बाद राहुल द्रविड़, Sachin Tendulkar और कप्तान सौरव गांगुली, तीनों ने ही शानदार शतक लगाया। इस त्रिमूर्ति के दम पर भारत ने इतिहास रचा। इस मैच में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को ठीक उसी तरह से पछाड़ा था, जैसे रॉकी मूवी में रॉकी ने अपोलो क्रीड को मात दी थी।

भारत की तरफ से हुईं तीन शतकीय साझेदारियां

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भारत और इंग्लैंड के बीच लीड्स में खेले जा रहे सीरीज के तीसरे मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने Sachin Tendulkar के 193, राहुल द्रविड़ के 148 और सौरव गांगुली के 128 रन की बदौलत 8 विकेट के नुकसान पर 628 रन पर पारी घोषित की थी। इन तीनों के साथ ही सलामी बल्लेबाज संजय बांगड़ ने भी 68 रन की उपयोगी पारी खेली थी। इस मैच में भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार लगातार तीन 150 रन से ज्यादा की साझेदारी हुई थीं।

 पहली साझेदारी संजय बांगड़ और राहुल द्रविड़ के बीच दूसरे विकेट के लिए 170 रनों की, फिर तीसरे विकेट के लिए द्रविड़ और Sachin के बीच 150 रनों की और तीसरी साझेदारी सचिन और गांगुली के बीच चौथे विकेट के लिए 249 रनों की हुई थी। बता दें कि यह वो दौर थे जब भारतीय टीम के पहले विकेट गिरने के बाद दर्शक तालियां बजाने लगते थे। क्योंकि यह समय होता था Sachin Tendulkar के क्रीज पर आने का। इस मैच में इंग्लैंड के गेंदबाज सफल नहीं हो सके थे। 

पारी और 46 रन से जीता भारत

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लीड्स की ठंड में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच में 628 रनों का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम पहली पारी में 273 रन पर आलआउट हो गई थी। जिसमें इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक स्टीवर्ट ने सबसे ज्यादा 78 रन बनाए थे। इस पारी में हरभजन सिंह और अनिल कुंबले ने 3-3 और जहीर खान व अजित अगरकर ने 2-2 विकेट लिए थे। इसके बाद भारतीय टीम के स्कोर तक ना पहुंच पाने की वजह से इंग्लैंड को फॉलोऑन खेलना पड़ा था।

इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में भी खास कमाल नहीं कर सकी और कप्तान नासिर हुसैन के 110 और एलेक स्टीवर्ट के 47 रनों के बाद भी सिर्फ 309 रन पर ही आलआउट हो गई। इस बार भी अनिल कुंबले ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 वक्त अपने नाम किए थे। इंग्लैंड की पारी का आखिरी विकेट एंडी कैडिक के रूप में गिरा जिसका कैच सेकंड स्लिप में खड़े सौरव गांगुली ने लपका था। इसी कैच के साथ भारत पारी और 46 रन से मैच अपने नाम कर चुका था।