Ramiz Raja
Ramiz Raja

Ramiz Raja: पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी रमीज़ राजा जबसे पीसीबी यानी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष बने हैं तबसे वो काफी चर्चा में रहते हैं. वह पाकिस्तान क्रिकेट को ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए लगातार जी तोड़ कोशिश में लगे हुए हैं. कोरोना महामारी के बीच पाकिस्तान में पीएसएल का आयोजन सफलतापूर्वक होना, ऑस्ट्रेलिया का 24 साल बाद पाकिस्तान दौरे पर आना. ऐसी बड़ी सफलताओं के वाद अब रमीज़ राजा (Ramiz Raja) की नज़रें भारत-पाक के बीच फिर से क्रिकेट शुरू करवाने पर है.

रमीज़ राजा चाहते हैं भारत-पाक के बीच क्रिकेट

Ramiz Raja

आपको बता दें कि पीसीबी अध्यक्ष रमीज़ राजा ने काफी समय पहले ही अपनी मंशा साफ़ कर दी थी कि वो भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर क्रिकेट शुरू करना चाहते हैं. रमीज़ पाकिस्तान, भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हर साला एक टूर्नामेंट का आयोजन करवाना चाहते हैं. जिसमें हर साल रोटेशन बेसिस पर देश इस टूर्नामेंट की मेज़बानी करेंगे.

इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का आयोजन करवाने के लिए रमीज़ राजा (Ramiz Raja) ने दिन रात एक कर रखे हैं. वो चाहते हैं कि एक बार फिर भारत-पाक के बीच क्रिकेट के सबंध बने. ग़ौरतलब है कि साल 2012 के बाद से दोनों देश राजनीतिक तंगी के चलते सिर्फ आईसीसी इवेंट्स और एशिया कप में ही एक दूसरे के साथ क्रिकेट खेलते हुए दिखाई देते हैं. वहीं अब पीसीबी अध्यक्ष ने इस संबंध में एक और बड़ा बयान दिया है.

“राजीनीति को खेल से अलग रखा जा सकता है”

Ramiz Raja

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज़ राजा (Ramiz Raja) ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा है कि राजनीती को खेल से अलग रखना चाहिए और भारत बनाम पाकिस्तान के बीच होने वाले रोचक मुकाबलों का आनंद फैंस को मिलना चाहिए. रमीज़ राजा ने कहा,

“जब भी मैं भारत और पाकिस्तान के बारे में बात करता हूं, यह हमेशा क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नहीं होती है. लेकिन यह क्रिकेटर है जो बाहर आता है और एक क्रिकेटर के रूप में मैं कहूंगा कि राजनीति को खेल से अलग रखा जा सकता है. क्रिकेट फैंस को भारत-पाकिस्तान के मैचों का आनंद क्यों नहीं लेना चाहिए?”

रमीज़ ने आगे कहा,

“भारत और पाकिस्तान के बीच दुनिया में अभी भी सबसे अच्छी प्रतिस्पर्धा क्यों है. चार देशों का टूर्नामेंट कराने का विचार उसी से उपजा है. हमें किसी तरह इसे पूरा करना होगा. अगर अब नहीं तो कब.”