साल 2011 का एकदिवसीय विश्व कप… यह वहीं टूर्नामेंट था जिसे टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में जीतकर एक नायाब इतिहास रचा. विश्व कप का जब जब जिक्र होता है तब तब युवराज सिंह, धोनी की फाइनल में खेली गयी यादगार पारी और गौतम गंभीर के 97 रनों की चर्चा हमेशा सुनने को मिलती है.

मगर सुरेश रैना के नाम का जिक्र कहीं नहीं होता… जबकि हमको यह भुलना नहीं चाहिए कि भारत को विश्व कप जीताने में एक अहम भूमिका सुरेश रैना ने भी निभाई. क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध नाबाद 34 रन और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ रैना के 36 रनों की नाबाद पारी ने देश को फाइनल तक ले जाना में मदद की.

रैना ने ऑस्ट्रेलिया की खिलाफ खेली गयी पारी को किया याद

ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध भारत को मैच जीतने के लिए 261 रनों का लक्ष्य मिला था और सुरेश रैना ने काफी कठिन परिस्तिथि में आकर 28 गेंदों में 34 रनों की नाबाद पारी खेल टीम को जीताने में एक अहम भूमिका निभाई.

मैच में रैना और युवराज सिंह (57)* ने छठे विकेट के लिए नाबाद 74 रन जोड़े थे. सुरेश रैना ने इस मैच के बारे में बात करते हुए आकाश चोपड़ा से कहा,

‘ड्रेसिंग रूम में मेरे बगल में सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग थे. सचिन पाजी ने कहा ‘जा आज तेरा दिन है, तू मैच जीताकर आएगा. फिर मैंने कहा कि आज तो मैं छोडूगा. युवी पा (युवराज सिंह) अंदर खेल रहे थे और धोनी आउट होकर आ रहे थे. उनके चेहरे पर मायूसी थी. तब मैंने ठान लिया कि मुझे यह मौका मिला है और प्रदर्शन करना है. भले ही मैं गिर ही क्यों न जाऊं.”

इस पल से रैना को मिला मैच जीतने का यकीन

सुरेश रैना ने आगे कहा, ‘‘जिस वक़्त मैदान पर गया था उस समय गेदन का रंग बदल रहा था. ऑस्ट्रेलिया ने ऑफ स्पिनर को हटा दिया था. ऑफ स्पिनर ही हमें आउट कर सकता था. मैंने ब्रेट ली को छक्का मारा तो लगा मैंने कहा कि अब तो मैच जीतना ही है.

आप सभी को बता दे, कि इस मैच में युवराज सिंह ने नाबाद 57, सचिन तेंदुलकर ने 53 और गौतम गंभीर के बल्ले से 50 रनों की शानदार पारी देखने को मिली थी.

AKHIL GUPTA

क्रिकेट...क्रिकेट...क्रिकेट...इस नाम के अलावा मुझे और कुछ पता नहीं हैं. बस क्रिकेट...