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वैसे तो सभी खिलाड़ी मैदान पर जी-जान लगाकर अपने देश का नाम रोशन करते हैं,  लेकिन एक भारतीय खिलाड़ी ऐसा है जिसने क्रिकेट के मैदान पर तो हमेशा तिरंगा लहराने में अपना सौ प्रतिशत योगदान दिया है और साथ ही देश के लिए हर क्षेत्र मे ंकुछ ना कुछ करने की कोशिश करता है.

इस बार इस  खिलाड़ी ने देशवासियों से बेहद प्रासंगिक अपील की है, ट्विटर के माध्यम से  दिए गए संदेश में क्रिकेटर ने उस पहलू को उठाया है  जो हमेशा से  भारत में एक बड़ी  समस्या रही है.

क्रिकेट के मैदान पर भी दिखाई है देशभक्ति

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हम बात कर रहें हैं एक समय में टीम इंंडिया की जान समझे जाने वाले कड़क ओपनर गौतम गंभीर की, जिन्होंने अपने करियर में कई बड़ी जीत की नींव रखी हैं.  2007 टी-20 वर्ल्डकप  और 2011 वर्ल्डकप में टीम इंडिया की जीत में गौतम ने बड़ किरदार निभाया है.

इस खब्बू बल्लेबाज ने अब तक 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी-20 मैच खेलें है. टेस्ट में 41.96 क औसत से 4154 रन बनाए हैं, वनडे में 39.68 की एवरेज से 5238 रन अपने नाम किए हैं, तो वहीं टी-20 में भी 27.41 क औसत से 932 रन बनाए हैं.

भारत- पाकिस्तान के मैच में गोतम गंभीर हमेशा से ही बेहद आक्रामक नजर आते हैं, कई बार पाकिस्तानी खिलाड़ियों से उनकी जुबानी जंग भी हो चुकी है. शाहिद आफरीदी और कामरान अकमल से हुई उनकी नोंकझोक क्रिकेट फेंस के जहन में आज भी जिंदा हैं.

फिलहाल टीम में नहीं मिल रही जगह 

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गौतम गंभीर लगभग एक साल से टीम इंडिया से बाहर से हैं, उन्होंने नवंबर 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच खेला था.  वनडे में तो इस अनुभवी बल्लेबाज  को इंग्लैंड के खिलाफ 2013 के बाद से ही टीम में जगह नहीं मिली है. टी-20 में भी गंभीर ने दिसंबर 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना आखिरी मुकाबला खेला था.

गौतम स्वभाव से भी गंभीर हैं, कई खिलाड़ी को साथ इस खिलाड़ी के सम्बंध बहुत अच्छे नहीं माने जाते हैं, ये भी एक वजह है, कि गंभीर को टीम में जगह बनाने में खासी दिक्कत हो रही है.

शिखर धवन का लगातार शानदार प्रदर्शन भी गंभीर की वापसी को रोक रहा है. गौरतलब है शिखर ने चैम्पियन्स ट्राफी में सबसे ज्यादा रन बनाकर गोल्डन बैट का अवॉर्ड जीता था. इसके अलावा विंडीज और श्रीलंका के खिलाफ भी धवन के बल्ले ने जबरदस्त धमाका किया था.

देशवासियों को दिया बड़ा संदेश

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अब गौतम गंभीर ने ट्वीट कर एक संदेश दिया है कि देशभक्ति की भावना कुछ विशेष दिन नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमेशा दिल में देेशभक्ति ज़िदा रहनी चाहिए.बकौल गंभीर,”15 अगस्त, 26 जनवरी और 2 अक्टूबर को शेल्फ में रखी तारीख आ गई है, जिसकी लाइफ 24 घंटे की है। 365 दिन घोर राष्ट्रवाद की अपेक्षा नहीं करता, लेकिन थोड़ी बहुत देशभक्ति दिल में हरदम धड़कनी चाहिए।”

गंभीर पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर देशभक्ति का पाठ पढ़ा चुके हैं, उन्होंने ये भी कई बार ये भी कहा है कि अगर वो क्रिकेटर ना होते तो वो इंडियन आर्मी के सोलजर होते और वो बचपन में एक फौजी बनने की इच्छा रखते थे.

कई बार दिखायी है देशभक्ति

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गंभीर ने कई मौकों पर आगे आकर अपनी देशभक्ति का परिचय भी दिया है. कश्मीर के अनंतनाग में  शहीद सहायक पुलिस निरीक्षक अब्दुल रशीद की 5 साल की बेटी जोहरा  की पूरी पढ़ाई का जिम्मा गंभीर ने ले लिया था.

24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ पर हुए नक्सली हमले में शहीद 25 सैनिकों के पीड़ित परिवारों के बच्चों की पूरी शिक्षा की जिम्मेदारी भी इस देशभक्त खिलाड़ी ने लिया था.

 गंभीर का ट्वीट यहां देखे

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