न्यूजीलैंड

क्रिकेट आज के समय में खेलने वाले खिलाड़ियों की जिन्दगी बदल जाती है. आर्थिक रूप से उन्हें किसी भी समस्या से नहीं जूझना पड़ता है. लेकिन हमेशा से ही ऐसा नहीं रहा है. न्यूजीलैंड के लिए अपने पर्दापण मैच में शतक बनाने वाले बल्लेबाज मैथ्यू सिंक्लेयर के पास आज कोई नौकरी भी नहीं है.

न्यूजीलैंड के लिए पर्दापण मैच में दोहरा शतक लगाया था मैथ्यू सिंक्लेयर ने

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पूर्व क्रिकेटरों के लिए भी कुछ बोर्ड ने अब नियम बनाने शुरू कर दिए हैं. जिससे उन्हें संन्यास के बाद बहुत ज्यादा मुश्किलों से ना गुजरना पड़े. लेकिन न्यूजीलैंड में अभी तक क्रिकेट बोर्ड ने ऐसा कदम नहीं उठाया है. जिसके कारण पूर्व खिलाड़ियों की स्थिति बेहतर नहीं है. ऐसा ही कुछ न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज मैथ्यू सिंक्लेयर के साथ हुआ था.

वेस्टइंडीज के खिलाफ 1999 में अपने पर्दापण मैच में मैथ्यू ने दोहरा शतक जड़कर खुद को साबित कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी 150 रनों की अहम पारी खेली थी. जिसने उन्हें टीम में स्थापित कर दिया था. अपने 12वें टेस्ट मैच में उन्होंने पाकिस्तान टीम के खिलाफ भी दोहरा शतक जड़कर खुद को स्टार बल्लेबाज साबित कर दिया था. हालाँकि ये बहुत ज्यादा समय तक नहीं चला था.

लंबे समय तक न्यूजीलैंड टीम का नियमित हिस्सा नहीं रहे मैथ्यू

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अपने शुरुआती करियर में शानदार प्रदर्शन कर आगाज करने वाले मैथ्यू सिंक्लेयर उसके बाद अचानक ही बुरे दौर से गुजरने लगे. बल्ले से रन नहीं बनाने के कारण वो हमेशा टीम के अंदर-बाहर होने लगे. अपना आखिरी टेस्ट मैच उन्होंने 2010 में खेला था. न्यूजीलैंड टीम के लिए मैथ्यू सिंक्लेयर ने 33 टेस्ट मैच में 32.06 के औसत से 1635 रन बनाये.

जिसमें 3 शतक और 2 दोहरा शतक था. 54 एकदिवसीय मैच में उन्होंने 28.35 के औसत से 1304 रन जोड़े थे. जिसमें 2 शतक बनाया था. जबकि न्यूजीलैंड के लिए 2 टी20 मैच खेलने के बाद भी एक रन नहीं बनाये. क्रिकेट खेलने के कारण अब उनके पास डिग्री भी नहीं है. जिसके कारण संन्यास के बाद उनकी जिन्दगी अच्छे से नहीं कट रही है.

पत्नी को कॉफ़ी शॉप में करना पड़ा काम

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नियमित नौकरी नहीं होने के कारण उनकी पत्नी को भी कॉफ़ी शॉप में काम करना पड़ा था. उनकी पत्नी और मैथ्यू के बीच रिश्ते भी जिसके कारण बीच में ख़राब रहे थे. हालाँकि फ़िलहाल वो इस समय जमीन बेचने का काम कर रहे हैं. लेकिन यदि वो कोई जमीन नहीं बेच पाते हैं तो उन्हें पैसे नहीं मिलेंगे. जो सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी करती है.