Rameez Raja-Khalid Mehmood

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष रमीज राजा (Rameez Raja) अपने एक बयान के चलते सुर्खियों में बने हुए हैं. जिसने पीसीबी (PCB) की पूरी पोल खोलकर रख दी है. लेकिन, इसी बीच बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष खालिद महमूद (Khalid Mehmood) ने इस अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वर्तमान अध्यक्ष के बयान को देश के गरिमा के खिलाफ बताया है. इस पूरे मसले पर उन्होंने क्या कुछ कहा है इसके बारे में हम आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए बताने जा रहे हैं…

पूर्व अध्यक्ष खालिद महमूद ने रमीज राज के बयान पर रखा अपना पक्ष

Rameez Raja

दरअसल सोमवार को इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि, पाकिस्तान में क्रिकेट को कोई बर्बाद नहीं कर सकता यहां तक ​​कि भारत में भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं है. इस बारे में पत्रकारों से हुई बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि,

“यह [भारत] वर्षों से पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश में व्यस्त है. लेकिन, इसकी ओर से रची गई हर कोशिश और साजिश नाकामयाब होती रही है.”

उन्होंने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के फंड और भारतीय निवेश के बारे में रमीज राजा (Rameez Raja) का बयान बेतुका है.” क्योंकि आईसीसी फंड पाकिस्तान के अधिकार हैं और ये फंड उन देशों को दिए जाते हैं जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संघ के सदस्य हैं. “उनका बयान राष्ट्रीय गरिमा के खिलाफ है.” महमूद ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि, आईसीसी फंडिंग एक बिजनेस है ना कि दान और पाकिस्तान समेत सभी को इससे फायदा होता है.

पीसीबी अध्यक्ष को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए- महमूद

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आगे उन्होंने यह भी कहा कि, “रमीज को तुरंत माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.” उन्होंने ये बात भी कही कि,

‘रमीज राजा (Rameez Raja) एक तरफ विभागीय क्रिकेट को बंद करने के पक्ष में हैं तो दूसरी तरफ निवेश के लिए कारोबारियों से मिल रहे हैं.’

“क्या विभाग हमारे क्रिकेट में भारी निवेश नहीं कर रहे थे? कई डिपार्ट्समेंट क्रिकेट पर सालाना करोड़ों रुपये खर्च करते थे. वो अब उनसे स्पॉन्सरशिप की उम्मीद कर रहे हैं. विश्व कप के लिए नियुक्त किए गए विदेशी कोच कुछ दिनों में [राष्ट्रीय टीम में] क्या सुधार सकते हैं?”

आखिर में उन्होंने यह बात भी कहा कि, अधिकारी और जितने खिलाड़ी हैं वो टीम के साथ यात्रा कर रहे हैं. क्या यह पूंजी की बर्बादी नहीं है? विभागों की भूमिका खत्म करने के बाद नए निवेशक तलाशना अच्छी रणनीति नहीं है.