willow kashmir bat

Kashmir bat Industry: क्रिकेट जगत में इंग्लिश विलो के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए अब कश्मीर विलो पूरी तरह तैयार हो चुकी है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद आइसीसी ने कश्मीर में मिलने वाली विलो से बनने वाले क्रिकेट के बल्लों (बैट) को अधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलाें में इस्तेमाल की अनुमति मिल गई. जिसके बाद  कश्मीर बैट इंड्रस्ट्री (Kashmir bat Industry) को लगे चार चांद लग गये हैं.कश्मीर विलो बैट की मांग बेहद बढ़ गई है और दुनिया भर से ऑर्डर आ रहे हैं.

विलो बैट को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिली जगह

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कश्मीर में विलो बैट काफी टाइम से है. लेकिन इसके बल्ले सिर्फ घरेलू और गली क्रिकेट तक सीमित थे. अब इनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगितिओं में रनोंं की बौछार में शामिल हाेने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. कश्मीर विलो बैट आखिरकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में आ गए हैं.

दुबई में आयोजित पिछले टी20 वर्ल्ड कप में 75 साल में पहली बार 2 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ियों ने कश्मीर विलो बैट का इस्तेमाल किया. इस डिवेलप्मेंट ने कश्मीर विलो बैट उद्योग का भाग्य बदल दिया है. 100 करोड़ का सालाना कारोबार दोगुना होने की उम्मीद है. कश्मीर विलो बैट की मांग बेहद बढ़ गई है और दुनिया भर से ऑर्डर आ रहे हैं.

लगभग 12 क्रिकेट खेलने वाले देशों के बैट आयातकों ने कश्मीर बैट के कारखानों को ऑर्डर दिए हैं. भारत को आजादी मिलने के बाद 1947 में कश्मीर बैट उद्योग की स्थापना हुई थी. तब से घाटी में लाखों बैट बनाए गए, लेकिन किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ियों द्वारा उपयोग नहीं किया गया.

बैट उद्योग करता है सालाना 100 करोड़ का कारोबार

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इसका श्रेय बीजबेहाड़ा के युवा उद्यमी फौजुल कबीर को जाता है. उन्होंने करीब डेढ़ वर्ष तक इसके लिए कड़ी मेहनत की और आज जम्मू कश्मीर के पहली ऐसे बैट निर्माता हैं, जिनके उत्पाद को आईसीसी ने मान्यता दी है. दक्षिण कश्मीर में बीजबेहाड़ा को बैट उद्याेग का केंद्र माना जाता है.  कश्मीर क्रिकेट बैट उद्योग प्रति वर्ष लगभग 100 करोड़ का कारोबार करता है और यह उद्योग कश्मीर में लगभग 56 हजार लोगों को पालता है.

इसे पूरे क्षेत्र में करीब 3000 परिवारों के लिए बैट उद्योग ही प्रत्यक्ष रोजगार का जरिया है. पूरे भारतवर्ष में हर साल करीब पांच लाख बैट तैयार होते हैं और उनमें से 90 प्रतिशत कश्मीर विलो से ही बनाए जाते हैं. विलो का पेड़ पूरे भारत में सिर्फ कश्मीर में ही पाया जाता है. यह पाकिस्तान में भी मिलता है, लेकिन गुलाम कश्मीर के कुछ हिस्सों में. इसके अलावा विलो इंग्लैंड व अस्ट्रेलिया व कुछ अन्य देशों में भी पाया जाता है.