रविवार, 23 जुलाई को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान पर आईसीसी महिला एकदिवसीय विश्व कप का फाइनल मुकाबला खेला गया. जहाँ ख़िताब की प्रबल दावेदार भारतीय टीम को एक बेहद ही रोमांचक मुकाबलें में 9 रनों से हार का सामना करना पड़ा. एक समय मैच में ऐसा भी था, जहाँ भारतीय टीम बहुत ही आसानी के साथ विश्व कप जीत सकती थी, लेकिन क्रिकेट को इसलिए अनिश्चिताओं का खेल कहा जाता हैं. कब क्या हो पाए, कोई नहीं कह सकता. जो इंग्लैंड की टीम की हार की कगार पर खड़ी थी, वह जीत और जो टीम जीत के लिए खेल रही थी, वह हार गयी.

गावस्कर ने बताई हार की बड़ी वजह 

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भारतीय टीम की बड़ी हार का मानो सभी को सदमा सा लग गया हैं. किसी को भी यह यकीन ही नही हो पा रही हैं, कि आखिरी कैसे मिताली राज एंड कंपनी खिताब जीतने से चुक गयी. इस मुद्दे पर बात करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और विश्व के महानतम खिलाड़ियों में शुमार सुनील गावस्कर ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, कि

”भारतीय महिला खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में काबिले तारीफ प्रदर्शन किया. मगर टीम की ज्यादातर खिलाड़ियों को बड़े और निर्णायक मैच खेलने का अनुभव नहीं हैं, जो हम सभी को रविवार को साफ साफ देखने को मिला. सभी खिलाड़ियों ने अपना बेस्ट देना चाहा, लेकिन असफल रही. कोई भी खेल को एक टीम को अंत में हार और एक टीम को अंत में जीत मिलती ही हैं. यह वाकई में एक बहुत ही करीबी मैच रहा. मैं टीम की सभी खिलाड़ियों को 10 में से 10 अंक दूंगा. मुझे इस बात पर गर्व और बहुत ज्यादा ख़ुशी हैं, कि हमारी टीम ने यहाँ तक का सफ़र तय किया और लाजवाब खेल भी दिखाया.”

खुद को हालत में ढालना जरुरी 

सुनील गावस्कर ने आपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहा, कि ”सारा खेल अनुभव का होता हैं. इस तरह के हालतों और इस तरह के मैचों में केवल आपना तजुर्बा आपके काम आता हैं. जिसकी कमी हमारी टीम में साफ़ देखने को मिल रही थी. विकटों के पतझड़ के बीच में यदि एक साझेदारी 20 से 30 रनों की हो जाती, तो भारतीय टीम चैंपियन होती.” 

क्या हुआ था मैच में 

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मैच की शुरुआत मेजबान इंग्लैंड के टॉस जीतने के साथ हुई थी और टीम की कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया था. इंग्लैंड की टीम ने अपने 50 ओवर के खेल के दौरान 228/7 का स्कोर बनाया और भारतीय टीम को विश्व कप जीतने के लिए 229 रनों का एक आसान सा लक्ष्य दिया. भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा विकेट पूर्व कप्तान और नामी गेंदबाज़ झूलन गोस्वामी तीन ने लिए.

229 रनों के एक आसान से लक्ष्य के जवाब में भारतीय टीम मात्र 219 रनों पर ढेर हो गयी और यह मैच 9 रनों के मामूली अंतर से हार गयी. टीम के लिए सबसे बड़ी पारी सलामी बल्लेबाज़ी पूनम राउत 86 ने खेली. मगर पूनम भी देश को खिताबी जीत दिलाने में असफल रही और टीम हार गयी.

दूसरी बार मिली हार 

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यह दूसरा मौका रहा जब भारतीय टीम को एकदिवसीय विश्व कप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा हो. इससे पहले टीम 2005 के विश्व कप में भी फाइनल में पहुंच कर ऑस्ट्रेलियाई टीम से हार गयी थी और इस बार इंग्लैंड की टीम ने हमें मात दे दी. खास बात यह रही, कि दोनों बार भारतीय टीम को मिताली राज की अगुवाई में ही हार का सामना करना पड़ा.

AKHIL GUPTA

क्रिकेट...क्रिकेट...क्रिकेट...इस नाम के अलावा मुझे और कुछ पता नहीं हैं. बस क्रिकेट...

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