भारतीय टीम
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भारतीय टीम में वैसे तो अलग फ़ॉर्मेट के लिए अलग कप्तान का फ़ॉर्मूला सफल रहा है. लेकिन उसके बाद भी इसे कम आजमाया गया है. राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले एक ही समय में भारत के लिए अलग-अलग फ़ॉर्मेट संभाल रहे थे. उस समय टीम अच्छा भी कर रही थी.

जिसके बाद 2014 से लेकर 2017 तक विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी के बीच ये फ़ॉर्मूला प्रयोग में लाया गया था. जो बहुत सफल भी रहा था. अब एक बार फिर से फैन्स इसी फ़ॉर्मूला को भारतीय टीम में देखना चाहते हैं. इस बार विराट कोहली और रोहित शर्मा को लेकर चर्चा है.

आज हम आपको उन 3 कारणों के बारें में बताएँगे. जिसके कारण अब बीसीसीआई को अलग फ़ॉर्मेट और अलग कप्तान के फ़ॉर्मूले के बारें में फिर से विचार करना चाहिए. जिससे टीम के सफल होने की मौके भी बढ़ जाने के आसार नजर आ जाते हैं. जो बहुत अहम भी हैं.

1. दोनों कप्तानों पर कम रहेगा दबाव

मौजूदा समय में विराट कोहली सभी फ़ॉर्मेट में कप्तानी करते हुए नजर आ रहे हैं. जिसके कारण उनपर बहुत ज्यादा दवाब नजर आता है. तीनो फ़ॉर्मेट में लगातार खेलना और कप्तानी करना बहुत ज्यादा दबाव भरा होता है. जो कई बार मैदान पर नजर भी आ जाता है.

यदि रोहित शर्मा को सीमित ओवर फ़ॉर्मेट की कप्तानी सौंप दी जाए तो फिर दोनों पर कम दवाब नजर आएगा. जिसके कारण वो ज्यादा खुलकर खेलते हुए नजर आयेंगे. जिसके बाद दोनों खिलाड़ियों की ही उपयोगिता अपने आप ही बढ़ जाएगी. जिससे टीम को ही फायदा होगा.

विराट कोहली पर नजर आने वाला दबाव यदि कम हुआ तो फिर वो और खुलकर खेलते हुए नजर आयेंगे. जो बहुत ज्यादा अहम भी होगा. वही वो ज्यादा खिलाड़ियों को उत्साहित करते हुए नजर आ सकते हैं. पिछले 3 साल जो भूमिका धोनी ने निभाई वो फिर विराट कर सकते हैं.

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