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भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) श्रीलंका के साथ खेली गई 3 वनडे मैचों की सीरीज में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके। ना तो उनका बल्ला चला और ना ही उनकी गेंदबाजी में स्पार्क नजर आया। जिसके चलते उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। मगर इस बीच पूर्व श्रीलंकाई दिग्गज मुथैया मुरलीधरन का कहना है कि यदि वह कप्तान होते, तो वह हार्दिक को दुनिया की किसी भी टीम में खिलाते।

मुरलीधरन ने की Hardik Pandya की तारीफ

Hardik Pandya

स्टार ऑलराउंडर Hardik Pandya के लिए वनडे सीरीज अच्छी नहीं रही। लंबे वक्त बाद गेंदबाजी करने उतरे हार्दिक ने 2 विकेट चटकाए और 19 रन बनाए। इसके लिए उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ राह है। इस बीच मुथैया मुरलीधरन ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो पर कहा,

“हार्दिक पांड्या एक खास खिलाड़ी हैं। अगर मैं कप्तान होता, तो मैं उन्हें दुनिया की किसी भी टीम में रखता। एक आईपीएल टीम, ऑस्ट्रेलियाई टीम … दुनिया की कोई भी टीम। क्योंकि उनमें 140 की गति से गेंदबाजी करने की क्षमता है और वो स्थिति के हिसाब से खुद को ढाल सकते हैं और स्लो गेंदबाजी भी कर सकते हैं। मुझे लगता है कि चोट के कारण वो ज्यादा कुछ नहीं कर सके।”

सूर्या-राणा जैसी बल्लेबाजी की नहीं करनी चाहिए उम्मीद

पहले वनडे मैच में Hardik Pandya की बल्लेबाजी नहीं आई थी। दूसरे मैच में वह शून्य पर ही आउट हो गए, वहीं तीसरे मैच में उन्होंने 17 गेंदों पर 19 रन बनाकर अपना विकेट गंवा दिया। अब मुरलीधरन ने हार्दिक की बैटिंग की बात करते हुए कहा,

“दूसरी बात ये कि उनकी बल्लेबाजी भी खास है। हम उनसे नीतीश राणा या सूर्यकुमार यादव की तरह खेलने के उम्मीद नहीं कर सकते … कि वो लंबे समय तक टिके रहें और रन बनाएं। वो एक छोटी अवधि के बल्लेबाज हैं जो आपको 40 गेंदों में शतक के साथ आपको हैरान कर देंगे। मुझे उनसे यही उम्मीद होगी। वो पहले दो ओवरों में आउट हो सकता है लेकिन अगर वो 20-30 गेंदों पर हिट करता है, तो वो 50 रन बना लेगा। हार्दिक पांड्या से यही उम्मीद है। अगर आप उसे 70 गेंद खेलकर 90 रन बनाने की उम्मीद करते हैं, तो वो नहीं होगा।”

खेलने दें स्वभाविक खेल

Hardik Pandya

Hardik Pandya एक आक्रामक बल्लेबाज हैं, जो आखिर में आकर पारी को फिनिश करना बखूबी जानते हैं, मगर वह क्रीज पर जमकर नहीं खेल सकते। पूर्व श्रीलंकाई दिग्गज ने इसके लिए जयसूर्या का उदाहरण पेश किया और कहा,

“ये ऐसा होगा जैसे जयसूर्या को सलामी बल्लेबाजी करने और हर गेंद पर रन बनाने के लिए कहना। वो सफल नहीं होगा। ये खिलाड़ी नंबर सात या आठ पर किसी भी समय खेल सकते हैं। उसे मैदान पर उतारें और अपना स्वाभाविक खेल खेलने दें।”