हार्दिक पांड्या-पिता

हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या के पिता के निधन की खबर क्रिकेट जगत के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी. बीते हफ्ते की बात है, जब हार्दिक पांड्या के पिता ने बीमारी के चलते वडोदरा में ही दुनिया को अलविदा कह दिया था, जिससे सबसे बड़ा सदमा उनके परिवार को लगा है. आए दिन पिता को याद करते हुए हार्दिक पांड्या कोई न कोई तस्वीर या फिर पोस्ट साझा करते ही रहते हैं.

पिता के देहांत से टूट गए हैं हार्दिक पांड्या

हार्दिक पांड्या-पिता निधन

भारतीय टीम के स्‍टार ऑलराउंडर खिलाड़ी हार्दिक पांड्या ने हाल ही में एक बार फिर अपने पिता हिमांशु पंड्या  को याद करते हुए एक वीडिया साझा किया है. जिससे आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि, पिता के गुजर जाने के बाद किस तकलीफ से पंड्या ब्रदर्स गुजर रहे हैं. दोनों ही भाई अपनी पिता की डेथ के बाद से बिल्कुल टूट गए हैं.

पिता के साथ बिताए गए हर पल की फोटो को बैकग्राउंड सॉन्ग के साथ हार्दिक पंड्या ने एक वीडियो बनाई है. इस वीडियो को हार्दिक पांड्या ने शनिवार को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया है, जो काफी ज्यादा इमोशनल है.

पिता को याद करते हुए हार्दिक पांड्या ने साझा किया इमोशनल वीडियो

हार्दिक पांड्या-पिता

शेयर किए गए वीडियो में हार्दिक पांड्या पिता हिमांशु पंड्या के साथ नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में हार्दिक पांड्या ने अपने पूरे परिवार की तस्वीरों को शामिल किया है, जो उनकी यादों से जुड़ी है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद फैंस भी इस अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. वीडियो में हार्दिक ने बॉलीवुड सॉन्ग ‘अपने तो अपने होते हैं’, को एड किया है.

कुछ दिनों पहले ही वडोदरा में हार्दिक पांड्या और क्रुणाल पांड्या के पिता का देहांत दिल का दौरा पड़ने से हुआ था. पिता के निधन के खबर सुनने के बाद क्रुणाल पंड्या बड़ौदा टीम के बायो बबल से बाहर निकल गए थे, और सीधा घर पहुंच गए थे. इस साल क्रुणाल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बड़ौदा की मेजबानी कर रहे थे. लेकिन अब वो इस टूर्नामेंट को छोड़ चुके हैं.

बेटों को क्रिकेटर बनाने के लिए छोड़ दिया था अपना शहर

हार्दिक पांड्या-पिता

दरअसल हार्दिक पांड्या और क्रुणाल को क्रिकेटर बनाने के लिए उनके पिता ने वो सब किया जो उन्हें अपने बेटों के लिए जरूरी लगा था. यहां तक कि उन्होंने बेटों के लिए अपना शहर भी बदल दिया था. कहते हैं कि दोनों भाइयों को क्रिकेटर्स बनाने के लिए पिता ने बिजनेस को बंद कर दिया था और दूसरे शहर में शिफ्ट हो गए थे. ताकि दोनों को क्रिकेट की सारी सुविधाएं मिल सकें.

हिमांशु पांड्या ने जब अपना बिजनेस छोड़ा था तब हार्दिक महज 5 साल के थे. यहीं पर उन्‍होंने अपने बेटों को क्रिकेट की सुविधा दिलाने के लिए किरण मोरे एकेडमी में एडमिशन दिलवा दिया. इस दौरान पंड्या का फैमिली किराए के मकान में रहती थी. लेकिन पिता ने किसी चीज की कमी नहीं होने दी.