इंडियन क्रिकेट टीम इनदिनों बेहतरीन फॉर्म में चल रही है। गेंदबाज से लेकर बल्लेबाज सभी अपना दमखम दिखा रहे हैं। कप्तान कोहली ने अपनी उत्कृष्ट बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा हैं। इसी का नतीजा रहा कि भारतीय टीम ने 26 साल बाद अफ्रीका में कोई वनडे सीरीज पर अपना कब्जा किया है।

वहीं यजुवेंद्र चहल और कुलदीप यादव अफ्रीका की धरती में एशिया के सबसे सफलतम गेंदबाज बन गए हैं। दोनों की गेंदबाजी के आगे अफ्रीका के धुरांधर बेबस नजर आए। लेकिन टीम में इनदिनों एक मोस्ट सीनियर प्लेयर के साथ नाइसांफी की जा रही है। इसके चलते उसका बाकी का बचा क्रिकेट करियर काफी प्रभावित हो रहा। क्रिकेट से जुड़े और उनके फैंस ने इस पर नाराजगी जाहिर की है ।

धोनी का क्रम नहीं हो पा रहा फिक्स

2019 के विश्वकप को ध्यान में रखते हुए इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम एक बड़े इक्सपेरीमेंट से गुजर रही है। टीम की तलाश विश्वकप से पहले बेहतरीन युवा खिलाड़ियों की तलाश करना है। जो विश्वकप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए टीम का जीत दिला सके। अब इस इक्सपेरीमेंट का खामियाजा एमएस धोनी को भुगतना पड़ रहा है।

दरअसल हर मैच में युवा बल्लेबाजों का पहले क्रम में उतारा जा रहा है,जिस वजह से धोनी का कोई स्थान निश्चित नही ंहो पा रहा है। यहीं वजह है कि धोनी को 10 हजार रन पूरा करने के लिए मजह 33 रनों की आवश्यकता है,लेकिन पिछले कई मैचों के बाद भी वो इस मुकाम में नहीं पहुंच पाएं।

टीम प्रबंधन भी नहीं दे रहा ध्यान

एमएस धोनी के साथ हो रही नाइसांफी पर टीम प्रबंधन का ध्यान नहीं जा पा रहा है। या फिर यूं कहूं कि इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। पिछले कई मैचों में धोनी को पुछल्ले क्रम में बल्लेबाजी करने का मौका मिला है। मैदान में धैर्य के साथ रहने वाले धोनी अभी भी अपना धीरज बनाए हुए हैं।

अंतिम ओवरों में धोनी जाते हैं जब उनके हाथ में कुछ ही ओवर रहते हैं। नंबर चार पर बल्लेबाजी करने वाले धोनी की इन दिनों गेंदबाजों के साथ 6 या 7 नंबर में बल्लेबाजी करने का मौका दिया जा रहा है। धोनी ने 32 मैच खेले लेकिन उन्हें सिर्फ 23 मैचों में ही बल्लेबाजी करने का मौका मिल पाया।

पांड्या से भी पीछे हुए धोनी

क्रम के आधार पर पूर्व कप्तान विराट कोहली हरफनमौला क्रिकेटर हार्दिक पांड्या से भी पीछे हो गए हैं। टीम में हार्दिक पांड्या को धोनी से पहले उतारा जाता है फिर उसके बाद धोनी का खेलने का मौका दिया जाता है। अपनी कप्तानी में दो विश्वकप जीतने वाले खिलाड़ी के साथ हो रही नाइसांफी हर कोई हैरान परेशान है।

विश्वकप पर पड़ सकता है असर

धोनी के क्रम को नजरअंदाज करना टीम के लिए घातक हो सकता है। अगले साल इंग्लैंड की धरती में विश्वकप का आयोजन है। ऐसे में विश्वकप टीम में धोनी को शामिल किया जाएगा,तो उन्हें खेलने का भी पूरा मौका दिया जाना चाहिए। टीम मैनेजमेंट ने सही समय पर सही निर्णय नहीं लिया तो धोनी की बल्लेबाजी विश्वकप में खटाई में पड़ सकती है। इसका प्रभाव ये हो सकता है कि धोनी को वनडे से भी जानबूझकर सन्यास लेना पड़ सकता है।

टीम प्रबंधन पर उठे सवाल

धोनी के साथ हो रही इस साजिश का विरोध कई बड़े क्रिकेट के दिग्गजों ने भी किया। इसमें पूर्व धुरांधर भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का नाम प्रमुख है। सहवाग ने धोनी के क्रम को लेकर कई बार प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सहवाग ने कहा था कि धोनी को चार नंबर पर भेजा जाना चाहिए,क्योंकि वो इस जगह पर फिट बैठते हैं।

चौथा स्थान धोनी के लिए रहा लकी

चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए एमएस धोनी का प्रदर्शन उम्दा रहा है। उन्होंने इस दौरान 27 मैच खेले,जिसमें उन्होंने 11 अर्धशतक और एक शतक भी लगाया । अगर बात औसत की करें तो धोनी का औसत 59.90 रहा जो काफी अच्छा है। चौथे स्थान पर बल्लेबाजी करते हुे धोनी ने 1230 रन बनाए हैं। बता दें कि इसी स्थान पर रहते हुए धोनी दुनिया के बेहतरीन फिनिशर बने और कई बार टीम को जीत दिलाई।

जब  पाकिस्तान के छुड़ाए थे छक्के

साल 2006 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सीरीज में धोनी की भूमिका को कोई नहीं भूला सकता । सीरीज के पांचवें मैच में धोनी सबसे बड़े फिनिशर बनकर उभरे थे। इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने भारत को जीत के लिए 286 रन का लक्ष्य दिया। चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए महेंद्र सिंह धोनी ने 56 गेंदों में नाबाद 77 रन की  पारी खेली।

उम्मीद यहीं की जा रही है कि एमएस धोनी के प्रदर्शन को देखते हुए टीम में उनके साथ हो रहे पक्षपात को खत्म किया जाएगा। और अगले साल इंग्लैंड में होने वाले विश्वकप में एक बार फिर एमएस धोनी विकेट के पीछे से टीम को गुरमंत्र देते हुए विश्वविजेता बनाएंगे।