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क्रिकेट का कोई भी प्रारूप हो फील्डिंग में जिस टीम का प्रदर्शन अच्छा होता है संभावना ज्यादा उसी टीम के जीत की होती है. भारतीय टीम की फील्डिंग की बात करे तो ये शुरू से ही कमजोरी रही. हालंकि भारतीय टीम की फील्डिंग इस समय काफी अच्छी है. अगर भारतीय फील्डिंग की अच्छे प्रदर्शन और सुधार की बात करे तो सबसे पहला नाम  मोहम्मद कैफ का आता है.

मोहम्मद कैफ की गिनती खिलाड़ियों उन में की जाती है जिन्होंने अपने फिटनेस और फील्डिंग से काफी नाम कमाया. मोहम्मद कैफ ने युवराज सिंह के साथ मिलकर पॉइंट और कवर के क्षेत्र से दुसरे खिलाड़ियों के लिए रन बनाना काफी दुर्लभ कर दिया था.

भारतीय टीम के ‘जोंटी रोड्स’  कहे जाते हैं कैफ 

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मोहम्मद कैफ को भारतीय क्रिकेट टीम का जोंटी रोड्स कहा जाये तो इसमें कोई बड़ी बात नही है. इन्होने कई दफा अपनी फील्डिंग से भारतीय टीम को मजबूती और मैच में पकड़ बनाने में योगदान दिया है.लेकिन उत्‍तर प्रदेश के इस क्रिकेटर के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) की धूल भरी गलियों से निकलकर भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्‍सा बनना आसान नहीं रहा.
कैफ ज्‍यादा पढ़े लिखे नहीं हैं. उन्‍होंने प्रयागराज के मेवा लाल अयोध्‍या प्रसाद इंटरमीडिएट कॉलेज सोरांव से 12वीं तक की पढ़ाई की है. इसके बाद वे क्रिकेट की दुनिया में ही रच बस गए.

बचपन से ही क्रिकेट के प्रति लगाव था 

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मोहम्मद कैफ का शुरू से ही क्रिकेट के प्रति अलग तरह की रूचि थी जिसको उन्होंने साबित करके भी दिखाया. उन्‍होंने साबित किया कि किताबी ज्ञान से ज्‍यादा जिस चीज में मन लगता हो उसपर दिल से मेहनत करनी चाहिए. वे प्रयागराज से कानपुर आ गए. यहां पर वे ग्रीन पार्क स्‍टेडियम के हॉस्‍टल में रहने लगे. यहीं से उनका सफर भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचा. कैफ ने अपनी मेहनत से रास्‍ता बनाया और वे 2003  वर्ल्‍ड कप में भी खेले.

पहली बार भारतीय टीम को अंडर 19 विश्वकप चैम्पियन बनाया 

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घरेलु टीम में काफी मेहनत के बाद सन 2000 में उनको भारतीय अंडर 19 टीम में जगह मिली. श्रीलंका में हो रहे अंडर 19 विश्वकप में मोहम्मद कैफ को कप्तानी की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने अपनी कप्तानी में पहली बार भरतीय टीम अंडर 19 विश्वकप विजेता बनाया.

इसी साल उन्‍हें दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भारतीय टेस्‍ट टीम में शामिल कर लिया गया. दो साल बाद ही वे वनडे टीम का हिस्‍सा बन गए और उन्‍होंने 2003 के वर्ल्‍ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा रहे. उस समय वे युवराज सिंह के साथ मिलकर भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर की रीढ़ हुआ करते थे. 2003 वर्ल्ड कप में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में चार कैच पकड़ने का रिकोर्ड उनके नाम है.

मोहम्मद कैफ ने अपने करियर  13 टेस्‍ट मैचो में 624 रन बनाए. वहीं वनडे में 125 मैचों में उन्‍होंने 2753 रन बनाए. इंग्‍लैंड के खिलाफ 2002 में नेटवेस्‍ट ट्रॉफी के फाइनल में खेली गई उनकी पारी को भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार पारियों में गिना जाता है. उस मैच में मोहम्मद कैफ ने नाबाद रहते इंग्‍लैंड के दिए 325 रन के लक्ष्‍य को हासिल किया था. वे अभी आईपीएल में दिल्‍ली कैपिटल्‍स की कोचिंग टीम का हिस्‍सा हैं.

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