Bhagwat chandrasekhar-birthday

भारतीय क्रिकेट टीम में कई ऐसे स्पिनर रहे हैं, जो आज के युवाओं के लिए आइडल हैं. इसी लिस्ट में दिग्गज स्पिनर भागवत चंद्रशेखर (Bhagwat chandrasekhar) का भी नाम शामिल है. आज उनका 75वां जन्मदिन है. एक दौरा था जब टीम इंडिया में  70-80 के दशक में मशहूर स्पिन चौकड़ी हुआ करती थी. जिनमें बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना, वेंकेट राघवन नाम शामिल है. जन्मदिन के इस खास मौके पर हम आपको भागवत के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी दिलचस्प कहानियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में शायद ही आपने सुना हो.

70-80 के दशक में टीम इंडिया के पास थे मशहूर स्पिनर

Bhagwat chandrasekhar

साल 1964 से लेकर 1979 तक भारतीय टीम के कई मैचों का हिस्सा चंद्रशेखर भी रहे. उतार-चढ़ाव की इस लड़ाई में उन्होंने टीम का पूरा साथ निभाया. लेकिन इस दौरान कभी भी उन्होंने अपनी कमी को लोगों की नजरों में खटकने नहीं दिया. ऐसे बहुत मैच में उन्होंने जबरदस्त प्रदर्शन किया, जिसमें टीम को जबरदस्त जीत हासिल हुई. दरअसल उनकी जिंदगी में वो काला दिन भी आया था, जब उन्हें महज 5 से 6 साल की उम्र में यह पता चला कि वो पोलियो से जूझ रहे हैं. पोलियो के कारण उनका हाथ बिल्कुल काम नहीं करता था.

लेकिन, 10 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे उनके हाथ में मूवमेंट होने लगी और चीजें ठीक होने लगीं. हालांकि पूरी तरह से ठीक तो नहीं हुआ. लेकिन उन्होंने इसे कभी अपनी कमजोरी नहीं समझा और 78-80 के दशक में टीम इंडिया के सबसे ज्यादा अनोखे और चमत्कारी स्पिनर के तौर पर खुद को साबित किया. हाथ पतला होने के बाद उन्हें लचीलापन और गेंदों को ज्यादा टर्न कराने की ताकत मिली. भागवत चंद्रशेखर (Bhagwat chandrasekhar) ज्यादातर लेग स्पिन ही करते थे. ऐसे में उनकी तेज तर्रार गुगली अक्सर बल्लेबाजों के लिए परेशानी का सबब बन जाती थी.

रिची बेनॉड के बहुत बड़े फैन थे भागवत

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भागवत 17 मई 1945 को मैसूर में जन्मे थे. उनका पूरा नाम भागवत सुब्रमण्य चंद्रशेखर है. भारतीय टीम के स्पिनर ऑस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर और ऑलराउंडर खिलाड़ी रिची बेनॉड के सबसे बड़े फैन थे. उन्हीं से प्रभावित होकर उन्होंने साल 1963 में स्पिनर बनने का सपना देखा था. साल 1946 में 21 जनवरी इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने पहली बार टेस्ट मैच में डेब्यू किया था. लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर में उन्हें टीम ने सिर्फ 1 वनडे मैच में खेलने का मौका दिया था.

ये मैच उन्होंने 22 फरवरी 1976 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था. दिलचस्प बात तो यह है कि, भागवत चंद्रशेखर (Bhagwat chandrasekhar) ने टेस्ट फॉर्मेट में कुछ 58 मैच खेले थे. इन 58 मुकाबलों में खेलते हुए उन्होंने 242 विकेट चटकाए था. इनमें से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 79 रन देकर 8 विकेट चटकाना था. हालांकि वनडे में उन्होंने केवल 3 विकेट झटके थे. बेहतरीन परफॉर्मेस के दम पर उन्हें 1972 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयर चुना गया था.

इस वजह से ऑस्ट्रेलिया ने दिया छेद वाला बल्ला

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हालांकि गेंदबाजी में चंद्रशेखर कई बड़ी हस्तियों में शुमार हैं. लेकिन, इससे कहीं ज्यादा वो अपनी खराब बल्लेबाजी के लिए भी सुर्खियों में रहे हैं. इसकी एक बड़ी वजह पोलियो की चपेट में आया उनका हाथा था. टीम इंडिया का एक दौर पर ये इतिहास रहा है कि, नंबर 6 के बाद जितने भी खिलाड़ी आते थे उन्हें खासा संघर्ष का सामना करना पड़ा था. साल 2010 के आस-पास जाकर ये कमी कम हुई और अब टीम में टैलेंट की कमी नहीं है.

साल 1977 और 78 की बात है, जब भागवत चंद्रशेखर (Bhagwat chandrasekhar) ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर पहुंचे थे. यहां पर विदेशी टीम ने उन्हें गिफ्ट के तौर पर एक बैट दिया था, जिसमें एक छेद था. दरअसल कंगारूओं के खिलाफ खेली गई इस सीरीज में भागवत 4 बार बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए थे. हालांकि गेंद से उन्होंने कमाल का प्रदर्शन किया था. इसी की याद में उन्हें ऑस्ट्रेलिया टीम ने ऐसा बल्ला दिया था जिसमें बीच में एक छेद था. क्रिकेट करियर में वो 23 बार शून्य पर आउट हुए और कुल 167 रन बनाए.