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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान तथा कोच अनिल कुंबले के नाम से कौन वाकिफ नहीं हैं. भारतीय क्रिकेट में जिस वक्त बल्लेबाजों का बोलबाला था, उस दौर में इस फिरकी गेंदबाज की टीम में एंट्री होती है. छह फीट 1 इंच लंबे, शांत से दिखने वाले अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट इतिहास में सर्वाधिक विकेट चटकाने वाले गेंदबाज हैं. अनिल कुंबले, टेस्ट क्रिकेट में मुथैया मुरलीधरन (800) और शेन वॉर्न (708) के बाद तीसरे सबसे सफल गेंदबाज, जिनके नाम 619 विकेट हैं.

अनिल को विश्व क्रिकेट में ‘जम्बो’ के नाम से भी पहचाना जाता है. दरअसल, एक लेग स्पिनर की तरह दाहिना हाथ घुमाने वाले कुंबले की गेंदें लेगब्रेक न होकर यदा-कदा ऑफब्रेक होती थी. यह बात जानते सभी थे फिर भी बल्लेबाज उनके शिकार हो जाते. उनकी सफलता का राज स्पिन में नहीं बल्कि ‘जम्बो जेट’ जैसी रफ्तार में निहित था.

इस पूर्व फिरकी गेंदबाज ने भारतीय टीम के लिए कुछ समय तक कोचिंग भी की है. उस दौरान उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों को टीम में खेलने का मौक़ा दिया. हालाँकि जबसे अनिल कुंबले ने अपने इस पद से स्तीफा दिया उन खिलाड़ियों की वापसी बहुत ही मुश्किल हो गई. क्योंकि वो खिलाड़ी भारतीय टीम के मौजूदा कोच रवि शास्त्री को नहीं जचें.

इसी कारण आज के इस विशष लेख में हम आपको उन 4 खिलाड़ियों के बारे में बताएँगे जिन्हें कुंबले दे रहे थे मौका लेकिन शास्त्री हमेशा करते रहे नजरअंदाज.

4. जयंत यादव

Bowlers who score a century in test match and creates history

भारतीय टेस्ट टीम में नौवें नंबर के बल्लेबाज के रूप में शतक लगाने वाले जयंत यादव की इंग्लैण्ड के खिलाफ वो टेस्ट सीरीज ड्रीम डेब्यू थी. हालांकि वनडे में वो एक महीना पहले ही डेब्यू कर चुके थे, न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़. वो उनका आजतक का इकलौता वनडे मैच है. इंग्लैंड के खिलाफ़ पांच मैच की सीरीज़ के दूसरे मैच में उन्होंने टीम इंडिया की कैप पहनी. इस दौरान टीम के कोच अनिल कुंबले ही थे.

वानखेड़े स्टेडियम की टर्निंग पिच पर यादव ने 204 गेंदों का सामान किया. इस पारी में उन्होंने 15 चौके लगाए और 50.98 की स्ट्राइक से रन जुटाए. कोहली और जयंत के बीच आठवें विकेट के लिए 241 रनों की रेकॉर्ड साझेदारी हुई. इससे पहले 1996 में मोहम्मद अजहरुद्दीन और अनिल कुंबले ने 161 रन बनाए थे.

अगले तीन टेस्ट में उनके नाम के आगे 9 विकेट और 221 रन लिखे जा चुके थे. लगभग 74 की औसत से उन्होंने ये रन बनाए थे. फिर पांचवे मैच से पहले उन्हें हैमस्ट्रिंग इंजरी हो गई और टीम से बाहर होना पड़ा.उसके बाद उन्हें लगभग ढाई महीने बाद मैदान पर देखा गया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ पुणे में पहले टेस्ट मैच के लिए उन्हें चुना गया. हालांकि वो उनका आख़िरी मैच साबित हुआ. क्योंकि रवि शास्त्री ने उन्हें हमेशा ही नजरअंदाज किया है.

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