सौरव गांगुली
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भारतीय क्रिकेट इतिहास के दो बड़े कप्तान जिन्होंने भारतीय टीम के मजबूती का अहसास पूरे विश्व कप को कराया. वो थे सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी. इन दोनों महान कप्तानों का जन्मदिन मात्र एक दिन के अंतराल में होता है. कल यानी 7 जुलाई को महेंद्र सिंह धोनी का जन्मदिन था तो आज 8 जुलाई को सौरव गांगुली का जन्मदिन है.

आज हम इन दोनों कप्तानों के 5 बड़े साहसिक फैसले के बारें में बताने जा रहे हैं जिसने भारतीय क्रिकेट का परिदृश्य पूरी तरह से बदल दिया.

1.सौरव गांगुली का महेंद्र सिंह धोनी को समर्थन देना

सौरव गांगुली ने भारतीय टीम की कप्तानी उस समय संभाली जब भारतीय टीम फिक्सिंग जैसे आरोपों से घिरी हुई थी. उसके बाद उन्होंने भारतीय टीम को फिर से अपनी तरह से तैयार किया. उस समय भारतीय टीम को एक अच्छे विकेटकीपर की तलाश भी थी. नयन मोंगिया के संन्यास के बाद भारत ने कई विकेटकीपर को आजमाया लेकिन कोई अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाया.

उसके बाद सौरव गांगुली ने टीम में महेंद्र सिंह धोनी जैसे विकेटकीपर को जगह दी. पाकिस्तान के खिलाफ हो रही सीरीज में धोनी ने शुरूआती चार मुकाबले खेले थे लेकिन उन्हें बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिल रहा था. तब सौरव गांगुली ने धोनी को पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज के अंतिम मुकाबले में तीसरे नंबर पर भेजने का फैसला किया. उस मैच में महेंद्र सिंह धोनी ने शानदार 148 रन बनाए और विश्व क्रिकेट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

उसके बाद धोनी ने श्रीलंका के खिलाफ 183 रन बनाए जो आज तक एक विकेटकीपर बल्लेबाज का एकदिवसीय क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ स्कोर है. उसके बाद 2007 में पहली बार धोनी भारतीय टीम के टी20 विश्व कप में कप्तान बने जिसके बाद उन्होंने एक के बाद एक बड़ा इतिहास रच दिया. विकेटकीपर के रूप में भी धोनी का कोई मुकाबला नहीं है.

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