युवराज सिंह ने एमएस धोनी के साथ अपने रिश्ते पर किया चौंकाने वाला खुलासा, कहा– “माही मेरे दोस्त नहीं हैं…”

Published - 18 Jan 2026, 11:56 AM | Updated - 18 Jan 2026, 11:58 AM

Yuvraj Singh

भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे सफल जोड़ियों में से एक, एमएस धोनी और युवराज सिंह (Yuvraj Singh) के आपसी रिश्तों को लेकर हमेशा से कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं। मैदान पर एक साथ मिलकर भारत को 2007 और 2011 का विश्व कप जिताने वाले इन दो दिग्गजों के बीच असल में कैसा तालमेल था, इसका सच अब खुद 'सिक्सर किंग' ने दुनिया के सामने रख दिया है। एक हालिया पॉडकास्ट में युवराज ने धोनी के साथ अपने व्यक्तिगत समीकरणों पर ऐसी बात कही है, जिसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है।

Yuvraj Singh का बड़ा बयान

रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए युवराज (Yuvraj Singh) ने स्पष्ट किया कि उनके और महेंद्र सिंह धोनी के बीच कभी भी बहुत गहरी व्यक्तिगत दोस्ती नहीं रही। युवराज ने कहा, "माही और मैं करीबी दोस्त नहीं थे। हम क्रिकेट के जरिए एक-दूसरे से जुड़े थे और भारत के लिए साथ खेले। हमारी जीवनशैली बहुत अलग थी, इसलिए हमारे बीच कभी वैसा निजी जुड़ाव नहीं बन पाया जैसा दोस्तों के बीच होता है।"

युवराज ने बताया कि जब वे टीम में थे, तब वे और धोनी केवल खेल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण साथ थे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब धोनी टीम में आए थे, तब युवी उनसे चार साल सीनियर थे। यह बयान स्पष्ट करता है कि मैदान पर दिखने वाला तालमेल पेशेवर था, न कि व्यक्तिगत।

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धौनी और Yuvraj Singh के बीच मतभेद

धोनी के कप्तान और युवराज (Yuvraj Singh) के उप-कप्तान रहने के दौर को याद करते हुए युवी ने टीम के आंतरिक फैसलों पर भी चर्चा की। उन्होंने स्वीकार किया कि जब आप नेतृत्व की भूमिका में होते हैं, तो विचारों का टकराव होना स्वाभाविक है। युवराज ने कहा कि जब आप कप्तान या उप-कप्तान होते हैं, तो फैसलों में अंतर होना स्वाभाविक है। कई बार उन्होंने ऐसे फैसले लिए जिनसे मैं सहमत नहीं था, और कई बार मैंने ऐसे फैसले किए जो उन्हें पसंद नहीं आए।"

यह पहली बार है जब युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने इतनी बेबाकी से मैदान के भीतर होने वाले वैचारिक मतभेदों को स्वीकार किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन मतभेदों का असर कभी देश के लिए उनके प्रदर्शन पर नहीं पड़ा।

पेशेवर रिश्ते की मिसाल

भले ही निजी जीवन में दोनों के रास्ते अलग थे, लेकिन युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने जोर देकर कहा कि जब बात तिरंगे की आती थी, तो वे दोनों एक जान हो जाते थे। युवराज के मुताबिक, "चाहे हमारे बीच कैसे भी मतभेद रहे हों, जब भी हम मैदान पर उतरते थे, हमने देश के लिए हमेशा अपना 100% से ज्यादा दिया।"

2011 विश्व कप का फाइनल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ दोनों ने अंत तक टिककर भारत को जीत दिलाई थी। युवराज सिंह (Yuvraj Singh) ने यह भी साझा किया कि करियर के अंत में धोनी ने ही उन्हें स्पष्ट रूप से बताया था कि चयन समिति अब भविष्य की ओर देख रही है। यह ईमानदारी ही उनके पेशेवर रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत थी। आज भी, भले ही वे दोस्त न हों, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान हमेशा बरकरार है।

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Sourabh Kumar

सौरभ भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से रेडियो एंड टेलीविजन पत्रकारिता में उच्च शिक्षा प्राप्... रीड मोर

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