वैभव सूर्यवंशी vs तिलक वर्मा: अश्विन ने कर दी सीधी तुलना, बिना घुमाए-फिराए चुना बेस्ट खिलाड़ी

Published - 21 Feb 2026, 03:18 PM | Updated - 21 Feb 2026, 03:30 PM

Ravichandran Ashwin

अनुभवी ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा के बीच सीधी तुलना की है, और बिना किसी झिझक के खुले तौर पर बेहतर खिलाड़ी को चुना है। अपना ईमानदार अंदाजा शेयर करते हुए Ravichandran Ashwin ने दोनों युवाओं की ताकत पर जोर दिया, लेकिन यह भी साफ किया कि उनके हिसाब से अभी इम्पैक्ट, कंसिस्टेंसी और ओवरऑल मैच इन्फ्लुएंस के मामले में कौन आगे है।

इस सीधी तुलना ने फैंस के बीच बहस छेड़ दी है, क्योंकि दोनों खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट का भविष्य बनाने की क्षमता वाले होनहार टैलेंट माना जाता है।

Ravichandran Ashwin ने की भारत की कंसिस्टेंसी की तारीफ

Ravichandran Ashwin ने ग्रुप स्टेज में सूर्यकुमार की लीडरशिप वाली टीम की कंसिस्टेंसी की तारीफ की, लेकिन माना कि नीदरलैंड्स के खिलाफ बैटिंग परफॉर्मेंस खास तौर पर असरदार नहीं थी। उन्होंने बताया कि सूर्यकुमार यादव ने स्मार्ट तरीके से पारी को आगे बढ़ाया, जबकि शिवम दुबे, हार्दिक पांड्या और रिंकू सिंह ने सही समय पर तेजी दिखाई। Ravichandran Ashwin के मुताबिक, जब भारत अपना बेस्ट नहीं दे रहा होता है, तब भी उनकी गहराई और अनुभव उन्हें हराना बहुत मुश्किल बना देते हैं।

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Ravichandran Ashwin ने की वैभव बनाम तिलक की सीधी तुलना

Ravichandran Ashwin

अपने YouTube शो के दौरान, वैभव बनाम तिलक ने बिना किसी झिझक के साफ अंदाजा लगाते हुए वैभव सूर्यवंशी और तिलक वर्मा की खुलकर तुलना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि T20 में सफलता हमेशा जबरदस्त पावर पर निर्भर नहीं करती है।

रविचंद्रन अश्विन ने बताया कि चोट से वापसी कर रहे तिलक जरूरी नहीं कि बड़े पावर-हिटर हों, लेकिन वे टाइमिंग और बल्ले का सही जगह ढूंढने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि खिलाड़ी अलग-अलग तरीकों से सफल हो सकते हैं — कोई वैभव की तरह एग्रेसिव स्ट्रोक प्ले से हावी हो सकता है, जबकि कोई तिलक की तरह टाइमिंग और स्मार्ट प्लेसमेंट पर भरोसा करके आगे बढ़ सकता है।

पावर से ज्यादा टाइमिंग की अहमियत

Ravichandran Ashwin ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे छोटे फॉर्मेट में, साफ टाइमिंग और शॉट सिलेक्शन अक्सर सिर्फ ताकत से ज्यादा कीमती होते हैं। उन्होंने सलाह दी कि बैट्समैन को जबरदस्ती शॉट लगाने के बजाय बल्ले के बीच से गेंद मारने और गैप का फ़ायदा उठाने पर ध्यान देना चाहिए। आर. अश्विन ने दोहराया कि जहां जबरदस्त बैटिंग की अपनी जगह है, वहीं टाइमिंग के जरिए कंसिस्टेंसी भी उतनी ही असरदार हो सकती है, खासकर वर्ल्ड कप जैसे हाई-प्रेशर टूर्नामेंट में।

आगे सुपर-8 का चैलेंज

भारत का अगला मैच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में साउथ अफ्रीका से होगा, जिसके बाद जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज के खिलाफ मैच होंगे। अश्विन ने नीदरलैंड्स के खिलाफ वरुण चक्रवर्ती की बॉलिंग की भी तारीफ की, और कहा कि डच बैट्समैन उन्हें समझने में जूझ रहे थे, जबकि जसप्रीत बुमराह की पावरप्ले में स्विंग और यॉर्कर बहुत ज़रूरी थीं। स्थिर बैटिंग और डिसिप्लिन्ड बॉलिंग के बैलेंस्ड कॉम्बिनेशन के साथ, इंडिया निर्णायक Super-8 फेज़ में प्रवेश करते हुए मजबूत दावेदार बना हुआ है।

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Akash R.

Akash R. - करीब दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कागज-कलम से शुरू हुआ उनका सफर अब कम्प्यूटर-कीबो... रीड मोर

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