इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) हमेशा से अपने नए प्रयोगों और नियमों को लेकर चर्चा में रही है। लेकिन हर नया नियम फैंस और खिलाड़ियों को पसंद आए, ऐसा जरूरी नहीं होता। पिछले कुछ सीज़न में लागू किया गया ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम भी ऐसा ही एक बदलाव रहा, जिस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब आईपीएल 2026 (IPL) से पहले हुई प्री-सीज़न बैठक में इस नियम को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है, जिससे यह साफ है कि क्रिकेट जगत में इसे लेकर असंतोष अब भी बना हुआ है।
यह नियम शुरुआत में भले ही रोमांच बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया हो, लेकिन समय के साथ इसकी कमियां ज्यादा उजागर होने लगी हैं और अब इसे हटाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
IPL में इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर बढ़ता विरोध
आईपीएल 2023 (IPL) में लागू हुआ ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ नियम शुरुआत में एक रणनीतिक बदलाव के तौर पर लाया गया था। इसका उद्देश्य टीमों को अधिक लचीलापन देना था, ताकि वे मैच के दौरान परिस्थितियों के अनुसार खिलाड़ी बदल सकें।
लेकिन समय के साथ यह नियम कई कप्तानों और कोचों को असंतुलित लगने लगा। उनका मानना है कि इससे खेल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है और ऑलराउंडर्स की भूमिका भी कम होती जा रही है। कई टीमों का कहना है कि इससे प्लेइंग इलेवन का पारंपरिक महत्व भी घटा है।
BCCI का सख्त रुख
हाल ही में हुई बैठक में कई फ्रेंचाइजी कप्तानों ने इस नियम पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन बोर्ड ने साफ कर दिया कि फिलहाल इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। BCCI ने पुष्टि की है कि यह नियम कम से कम 2027 तक लागू रहेगा।
यानी फिलहाल इस ‘बेहूदा’ और ‘अटपटे’ माने जा रहे नियम से छुट्टी मिलने की कोई संभावना नहीं है। बोर्ड का मानना है कि इससे मैच और अधिक रोमांचक बनते हैं और रणनीतिक गहराई बढ़ती है, इसलिए इसे जारी रखना जरूरी है।
खेल के संतुलन पर असर
क्रिकेट विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि इस नियम ने बल्लेबाजी को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा दिया है। टीमों को अतिरिक्त बल्लेबाज रखने की सुविधा मिल जाती है, जिससे स्कोर लगातार ऊंचे होते जा रहे हैं। इसके कारण गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा है और मैच का संतुलन एकतरफा होता नजर आता है।
कई पूर्व खिलाड़ियों ने भी कहा है कि इससे पारंपरिक क्रिकेट की भावना प्रभावित हो रही है और मुकाबलों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ा है।
IPL में आगे क्या हो सकता है
हालांकि फिलहाल BCCI ने इस नियम को जारी रखने का फैसला किया है, लेकिन जिस तरह से विरोध बढ़ रहा है, उससे यह साफ है कि भविष्य में इस पर दोबारा विचार हो सकता है।
अगर आने वाले सीज़न में भी खिलाड़ियों और फैंस की नाराज़गी जारी रहती है, तो संभव है कि बोर्ड को इस नियम में बदलाव करना पड़े या इसे पूरी तरह हटाना पड़े। फिलहाल आईपीएल 2026 (IPL) में यह नियम फिर से देखने को मिलेगा, लेकिन इसके भविष्य पर सवाल अब भी बने हुए हैं।